मुंबई: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुनाल कामरा के शो “नया भारत” को लेकर उठे विवाद में नया मोड़ आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने इस शो में भाग लेने वाले कुछ दर्शकों को समन भेजा है, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या दर्शकों को केवल किसी शो को देखने के लिए कानूनी तौर पर बुलाया जा सकता है? इस मुद्दे ने न सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) बल्कि नागरिकों के अधिकारों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
क्या है विवाद?
स्टैंड-अप शो “नया भारत” में कुनाल कामरा ने कथित रूप से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को “गद्दार” कहा था। इस पर कुछ राजनीतिक दलों और समर्थकों ने कड़ी आपत्ति जताई। अब खबर है कि पुलिस ने कुछ दर्शकों को पूछताछ के लिए समन भेजा है—यह जानने के लिए कि उन्होंने शो में क्या देखा, क्या सुना, और क्या उन्हें कोई आपत्तिजनक सामग्री लगी।
कानून क्या कहता है?
भारत में कानून के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी आपराधिक जांच में गवाह के रूप में बुलाया जा सकता है, बशर्ते कि उसके पास जांच में मददगार जानकारी हो।
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 160 के तहत, पुलिस किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुला सकती है यदि वह:
- 18 साल से अधिक हो
- जांच में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गवाह हो सकता हो
- उसके पास कोई महत्वपूर्ण सूचना हो
लेकिन यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि केवल किसी शो को देखने के लिए उपस्थित होना, बिना कोई अपराध किए या समर्थन दिए, अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।
क्या दर्शकों को बुलाना जायज है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दर्शकों को समन करने की प्रक्रिया अत्यधिक और डर पैदा करने वाली हो सकती है। वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि अगर किसी दर्शक ने खुद कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की या मंच पर कोई गतिविधि में हिस्सा नहीं लिया, तो उसे आरोपी या संदिग्ध मानना अनुचित है।
वरिष्ठ अधिवक्ता रीना गांधी का कहना है:
“केवल किसी शो में बैठना व्यक्ति को दोषी नहीं बनाता। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का एक हिस्सा है। अगर दर्शक पर कोई सीधी भूमिका नहीं है, तो समन भेजना गलत संदेश देता है।”
कलाकारों की प्रतिक्रिया
कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने इस घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा:
“मुंबई पुलिस को दर्शकों को नहीं, बल्कि खुद शो देखने आना चाहिए था। जोक्स उन्हें बर्बाद कर देते।”
कई कलाकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कदम को “कलात्मक अभिव्यक्ति पर हमला” बताया है।
यह मामला क्यों है चिंताजनक?
- डर का माहौल: अगर दर्शक भी समन का सामना करेंगे, तो लोग किसी भी व्यंग्य, राजनीतिक या सामाजिक शो में शामिल होने से डर सकते हैं।
- अभिव्यक्ति की आज़ादी पर असर: आर्ट और कॉमेडी समाज का आईना होते हैं। इस तरह की कार्रवाइयाँ उनकी आवाज़ को दबा सकती हैं।
- लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन: भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में विचारों की विविधता को दबाना संविधान के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है।
कुनाल कामरा के शो के दर्शकों को समन करने का मामला सिर्फ एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि कैसे कला, अभिव्यक्ति और नागरिक स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ रहा है। जहां एक ओर प्रशासन जांच के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर समाज में यह सवाल गूंज रहा है कि कहीं हम व्यंग्य और हास्य की स्वतंत्रता को खो तो नहीं रहे?
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