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क्रिप्टो नीति पर भारत का पुनर्विचार: वैश्विक बदलावों के बीच सरकार की नई रणनीति

2 फरवरी (रायटर) – भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अपने रुख की समीक्षा कर रही है, क्योंकि दुनिया भर में डिजिटल एसेट्स को लेकर रुख बदल रहा है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका सहित कई देशों की क्रिप्टो-फ्रेंडली नीतियों को देखते हुए भारत भी अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहा है।

इस समीक्षा के चलते क्रिप्टोकरेंसी पर चर्चा पत्र (Discussion Paper) के प्रकाशन में देरी हो सकती है, जिसे सितंबर 2024 में जारी किया जाना था। भारत के आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने एक साक्षात्कार में कहा, “कई देशों ने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपना नजरिया बदला है, उसके उपयोग और स्वीकृति को लेकर उनके दृष्टिकोण में बदलाव आया है। इसी कारण हम भी अपने चर्चा पत्र की समीक्षा कर रहे हैं।”

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और भारत की नीति

अजय सेठ ने यह भी स्पष्ट किया कि क्रिप्टो परिसंपत्तियों की प्रकृति सीमाओं में बंधी नहीं होती, इसलिए भारत का रुख एकतरफा (unilateral) नहीं हो सकता। हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन अमेरिका में हाल ही में हुए क्रिप्टो सुधार पर संकेत दिया।

अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो वर्किंग ग्रुप बनाने का आदेश दिया है, जो डिजिटल एसेट्स के लिए नए नियामक प्रस्ताव तैयार करेगा और राष्ट्रीय क्रिप्टो स्टॉकपाइल पर विचार करेगा। ट्रंप का यह कदम उनके अमेरिका की क्रिप्टो नीति को बदलने के वादे का हिस्सा है।

भारत में क्रिप्टो निवेश और सरकारी कार्रवाई

भारत में सख्त टैक्स नियमों और कड़े नियामक कदमों के बावजूद निवेशकों ने क्रिप्टोकरेंसी में भारी मात्रा में पूंजी लगाई है।

क्रिप्टो के भविष्य को लेकर मिली-जुली राय

भारतीय बाजार नियामक (SEBI) ने सुझाव दिया था कि क्रिप्टो ट्रेडिंग पर कई नियामकों को निगरानी रखनी चाहिए, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ सरकारी संस्थाएं निजी क्रिप्टो एसेट्स को स्वीकार करने के पक्ष में हैं।

हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का कहना है कि प्राइवेट डिजिटल करेंसी आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा पैदा कर सकती है।

👉 अब देखना यह होगा कि सरकार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी नीति में क्या बदलाव करती है और भारतीय निवेशकों के लिए क्या नए नियम लाती है!

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