नई दिल्ली: प्राकृतिक गैस प्रवासन विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट के सरकार के पक्ष में दिए गए फैसले के बाद, सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और उसके भागीदारों पर $2.81 बिलियन (करीब 23,000 करोड़ रुपये) की मांग का नोटिस जारी किया है। यह जानकारी खुद रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को दी।
हालांकि, RIL ने इस फैसले को अस्थायी और कानूनी रूप से अस्थिर करार दिया है और इसे चुनौती देने की योजना बनाई है। कंपनी का कहना है कि उसे इस मांग नोटिस से कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा।
क्या है मामला?
14 फरवरी 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (International Arbitral Tribunal) के फैसले को पलट दिया। इस न्यायाधिकरण ने पहले यह फैसला दिया था कि RIL और उसकी साझेदार BP को सरकार को कोई मुआवजा देने की जरूरत नहीं है।
सरकार का आरोप है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और BP ने बंगाल की खाड़ी में स्थित अपने KG-D6 ब्लॉक से जो प्राकृतिक गैस बेची थी, उसमें से कुछ हिस्सा असल में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ONGC के KG-DWN-98/2 ब्लॉक से निकाला गया था।
2016 में भी लगाया गया था $1.55 बिलियन का जुर्माना
इस मामले में सरकार ने 2016 में भी RIL और उसके साझेदारों पर $1.55 बिलियन (करीब 12,700 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया था।
इसके बाद रिलायंस ने यह मामला अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में ले जाया, जहां 2018 में न्यायाधिकरण ने RIL के पक्ष में फैसला सुनाया।
हालांकि, 2023 में सरकार ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। पहले एकल पीठ ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन सरकार द्वारा अपील किए जाने पर डिवीजन बेंच ने इस आदेश को पलट दिया और सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।
RIL करेगी कानूनी चुनौती
रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला और पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी किया गया यह मांग नोटिस कानूनी रूप से अस्थिर है, इसलिए कंपनी इसे उच्च अदालतों में चुनौती देगी।
अब देखना होगा कि यह मामला अगले कानूनी चरणों में किस ओर जाता है और क्या रिलायंस इंडस्ट्रीज पर यह भारी भरकम जुर्माना लागू होगा या नहीं।



