आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में जहां स्टार्टअप्स की धूम है, वहां “वर्क-लाइफ बैलेंस” अब एक बहस का मुद्दा बन चुका है। क्या सच में ऑफिस के निर्धारित घंटे (9 से 5) की नौकरी अब बीते ज़माने की बात हो चुकी है?
LinkedIn के को-फाउंडर Reid Hoffman का मानना है कि स्टार्टअप्स की दुनिया में वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ एक मिथक (myth) है। उनका कहना है कि जो लोग सख्ती से 9-से-5 की नौकरी की सीमाओं में बंधे रहना चाहते हैं, उनके लिए स्टार्टअप्स की दुनिया शायद सही जगह नहीं है।
Reid Hoffman की राय:
Reid Hoffman का कहना है कि जब आप किसी स्टार्टअप का हिस्सा होते हैं, तो आप सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि एक मिशन का हिस्सा होते हैं। वहां तेजी से सीखना, तेजी से निर्णय लेना, और अनिश्चितता के साथ काम करना सामान्य बात है।
उनका तर्क है कि:
“If you want a predictable schedule, don’t work at a startup.”
यानी अगर आप चाहते हैं कि आपकी ज़िंदगी में रोज़ तय समय पर काम शुरू हो और तय समय पर खत्म हो जाए — तो स्टार्टअप की जिंदगी आपके लिए नहीं बनी है।
9-5 बनाम Hustle Culture:
- पारंपरिक नौकरियों में काम के घंटे तय होते हैं, पर स्टार्टअप्स में काम एक लक्ष्य और जुनून से जुड़ा होता है।
- स्टार्टअप्स में काम का समय लचीला होता है, लेकिन काम की जिम्मेदारियाँ और दबाव कहीं ज़्यादा होते हैं।
- कई बार टीम के सदस्य रातों-रात नए आइडिया पर काम करते हैं, क्योंकि बाज़ार में पहली बार जाना ही फायदेमंद हो सकता है।
क्या वर्क-लाइफ बैलेंस मुमकिन है?
Reid Hoffman यह भी कहते हैं कि शुरुआत में थोड़ा असंतुलन ज़रूरी होता है। जब स्टार्टअप नया होता है, तो उसमें “extra effort” डालना ही होता है। लेकिन, जैसे-जैसे स्टार्टअप बड़ा होता है, वैसा सिस्टम बनता है जिससे संतुलन संभव होता है।
क्या हर किसी को स्टार्टअप्स से जुड़ना चाहिए?
ज़रूरी नहीं। Hoffman मानते हैं कि हर किसी का रास्ता अलग होता है। अगर आप अपने जीवन में स्थिरता, सीमित घंटे और कम जोखिम चाहते हैं, तो कॉरपोरेट दुनिया आपके लिए बेहतर हो सकती है।
निष्कर्ष:
स्टार्टअप की दुनिया में वर्क-लाइफ बैलेंस एक ऐसा लक्ष्य है जिसे समय के साथ हासिल किया जा सकता है, लेकिन शुरुआत में यह एक संघर्ष जैसा होता है। Reid Hoffman की यह सलाह खास तौर पर उन युवाओं के लिए है जो बिना हकीकत समझे सिर्फ “स्टार्टअप का ग्लैमर” देखकर उसमें कूद जाते हैं।
यदि आप एक स्थिर जीवन चाहते हैं, तो आपको यह सोचना होगा कि क्या स्टार्टअप की “हसल कल्चर” आपकी प्राथमिकताओं के अनुरूप है या नहीं।
Source: Economic Times Article
अगर आप चाहें तो मैं इस विषय पर एक Instagram या LinkedIn पोस्ट का छोटा वर्ज़न भी तैयार कर सकता हूँ।

