DHAN-VYAPAR

मिलिए लंदन में रहने वाली महिला निवेशक से, जो 61,590 करोड़ रुपये की संपत्ति वाले भारतीय अरबपति की बेटी है

लंदन से चलने वाली फैशनप्रेमी निवेशक: ईशा भारती पसरीचा की कहानी

भारत के जाने-माने बिजनेसमैन और एयरटेल के मालिक सुनील मित्तल की बेटी ईशा भारती पसरीचा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि लंदन की फैशन और लाइफस्टाइल जगत में चर्चित शख्सियत हैं। 36 वर्षीय ईशा को निवेश की सूझबूझ विरासत में मिली है और वह आज एक सफल लाइफस्टाइल इन्वेस्टर के रूप में जानी जाती हैं।

ईशा ने ब्यूटीस्टैक जैसे टेक्नोलॉजी आधारित ब्यूटी बिजनेस से लेकर रॉकसंदा जैसे फैशन ब्रांडों तक, विविध क्षेत्रों में निवेश किया है। उन्हें ग्लोबल ब्रांड कैसे चलाए जाते हैं, इसकी बारीक समझ है। ईशा खुद एक भारतीय मूल के लंदन के उद्यमी, शरण पसरीचा की पत्नी हैं, जो लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी कंपनी एन्निसमोर चलाते हैं। इस दंपति के दो बच्चे हैं – एक बेटी और एक बेटा।

ईशा भारती पसरीचा भा भारती फाउंडेशन के न्यासी बोर्ड की सदस्य भी हैं। हालांकि उनका जन्म स्कॉटलैंड में हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण भारत में हुआ। उन्होंने अपना काफी बचपन स्कॉटलैंड में भी अपने दादा-दादी के साथ बिताया। ईशा ने इंग्लैंड के चेल्टेनहम लेडीज कॉलेज में पढ़ाई की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी ऑफ़ बाथ से पॉलिटिक्स, इटैलियन और फ्रेंच में स्नातक किया है। उन्होंने पेरिस में लुई वुइटन में एक साल बतौर सेल्स असिस्टेंट भी काम किया था।

ईशा के पति शरण पसरीचा एन्निसमोर के संस्थापक और सीईओ हैं, जिसने 2015 में स्कॉटलैंड के मशहूर ग्लेनइगल्स लक्ज़री होटल का अधिग्रहण किया था। ईशा सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं। वह अक्सर अपने निजी और पेशेवर जीवन की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर करती हैं, जहां उनके 27 हज़ार फॉलोअर्स हैं।

ईशा सिर्फ एक इन्वेस्टर नहीं हैं, बल्कि फैशन और लाइफस्टाइल की जानकार होने के साथ-साथ एक सफल पत्नी और माँ भी हैं। उनका ये बहुआयामी व्यक्तित्व ही उन्हें लंदन के जगत में खास बनाता है।

मुख्य बिंदु:

  • ईशा भारती पसरीचा एक सफल लाइफस्टाइल इन्वेस्टर हैं।
  • वह सुनील मित्तल की बेटी और शरण पसरीचा की पत्नी हैं।
  • उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश किया है, जिनमें फैशन और ब्यूटी शामिल हैं।
  • वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और उनके 27 हज़ार फॉलोअर्स हैं।
  • लंदन के उद्यमी शरण पसरीचा की जीवनसाथी, एन्निसमोर हॉस्पिटैलिटी कंपनी के सीईओ।
  • दो बच्चों की माँ, निजी और पेशेवर जीवन का संतुलन।
  • स्कॉटलैंड में जन्म, भारत और स्कॉटलैंड दोनों में बिताया बचपन।
  • चेल्टेनहम लेडीज कॉलेज और यूनिवर्सिटी ऑफ़ बाथ से शिक्षा, लुई वुइटन में कार्य अनुभव।

 

Shiba Inu धारकों को ‘.SHIB’ डोमेन मिलेगा, इसमें क्या है खास, यह जानिए।

  1. परिचय:
    • शीब इनु का परिचय
    • व्यापकता में ‘नेम टोकन’ की पेशकश
  2. नई पहल:
    • ‘.shib’ डोमेन का उपयोग
    • इंटरनेट डोमेन फर्म D3 के साथ साझेदारी
  3. नेम टोकन के उपयोग:
    • ब्लॉकचेन्स के बीच एसेट्स को जोड़ने के लिए नया तरीका
    • सुरक्षित लंबे समय तक काम करने वाला तकनीकी प्रणाली
  4. प्रक्रिया:
    • D3 और ICANN के साथ मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया
    • वेब2 और वेब3 के बीच इंटरऑपरेबलिटी का लक्ष्य
  5. क्रिप्टो मार्केट में कोई बदलाव:
    • नई पहल का असर क्रिप्टो मार्केट में
    • शीबा इनु की कीमत में कोई तात्कालिक बदलाव नहीं

शीर्षक: “शीब इनु ने ‘.shib’ डोमेन का हासिल करके नेम टोकन पेश किया: क्रिप्टो मार्केट में नई पहल”

उपशीर्षक: “Web3 का नया कारण: शीबा इनु ने लांच किया ‘.shib’ डोमेन”

शीबा इनु (Shiba Inu) के डेवलपर्स ने अपने निवेशक समुदाय के लिए एक नई पेशकश की घोषणा की है, जिससे वे ‘.shib’ डोमेन का उपयोग करके एक नए प्रकार के ‘नेम टोकन’ को लाने का कार्य करेंगे। इस नए डोमेन का उपयोग करने के द्वारा, उनका उद्देश्य कई ब्लॉकचेन्स के बीच एसेट्स को जोड़ने के लिए एक नया तरीका प्रदान करना है, जो उनके समुदाय के लिए एक लंबे समय तक स्थायी रूप से काम करेगा। यह नया डोमेन इंटरनेट डोमेन फर्म D3 के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है, जिससे एक नया संबंध बनेगा जो Web2 और Web3 के बीच इंटरऑपरेबल होगा।

शीबा इनु टीम ने ‘.shib’ डोमेन हासिल करने के लिए D3 के साथ साझेदारी की है, जिससे इस डोमेन का उपयोग उनके समुदाय के सदस्यों को ईमेल एड्रेस बनाने के लिए मिलेगा, जो Web3 एलिमेंट के साथ मिलकर काम करेगा। इससे उनकी समुदाय को एक नई और सुरक्षित तकनीकी प्रणाली का अनुभव होगा, जिसमें पारंपरिक ईमेल अनुप्रयोगों के साथ संबंधित अभिगम होगा।

 

वर्तमान में, कई Web3 डोमेन, जैसे कि .crypto और .eth प्रचलित हैं, लेकिन वे पारंपरिक Web2 DNS पर काम नहीं करते हैं और इंटरनेट टूल्स के साथ मूल रूप से काम करने का क्षमता नहीं रखते हैं।

https://twitter.com/kaaldhairya/status/1737190758648541644

इसके अलावा, शीबा इनु टीम ने डोमेन बनाने के लिए ICANN (इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स) से मंजूरी प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू की है, जो एक यूएस-आधारित गैर-लाभकारी संगठन है जो इंटरनेट पर नाम के साथ संबंधित नीति बनाता और लागू करता है।

इस प्रयास से शीबा इनु की कीमत में तात्कालिक बदलाव कोई नहीं हुआ है, और खबर तैयार करते समय एसएचआईबी (SHIB) की कीमत लगभग $0.000010 (करीब 0.000850 रुपये) थी।

स्कूटर बाजार में DHAMAKA ,ई-स्प्रिंटो(e-Sprinto) ने 8,000 इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचे, जानें किन फीचर्स के चलते हुई इतनी सफलता ?

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मेकर कंपनी ई-स्प्रिंटो (e-Sprinto) ने मार्च 2022 में अपनी स्थापना के बाद से 8,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह एक बहुत ही कम समय में हुई बड़ी सफलता है, जिसका श्रेय कंपनी के नवाचार और ग्राहक संतुष्टि के प्रति प्रतिबद्धता को दिया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • ई-स्प्रिंटो ने 8,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक स्कूटर बेचे हैं।
  • कंपनी का लक्ष्य साल 2024 में 10,000 यूनिट की बिक्री का है।
  • कंपनी ने रोमी और रैपो नामक दो इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च किए हैं।
  • दोनों स्कूटरों में डिजिटल कलर डिस्प्ले, रिमोट लॉक/अनलॉक, रिमोट स्टार्ट, चाइल्ड लॉक/पार्किंग मोड और यूएसबी चार्जिंग जैसे फीचर्स हैं।
  • कंपनी अगले साल B2B स्कूटर लॉन्च करने पर काम करेगी।

E-Sprinto – Only Electriq Solutions

विस्तृत विवरण:

ई-स्प्रिंटो ने अपनी स्थापना के बाद से बहुत ही कम समय में भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। कंपनी ने अपनी नवाचारी तकनीक और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से यह उपलब्धि हासिल की है।

ई-स्प्रिंटो के दोनों इलेक्ट्रिक स्कूटर रोमी और रैपो में कई आधुनिक सुविधाएं हैं, जो उन्हें ग्राहकों के बीच लोकप्रिय बनाती हैं। इन सुविधाओं में शामिल हैं:

  • डिजिटल कलर डिस्प्ले, जो बैटरी की स्थिति, रेंज, स्पीड और अन्य जानकारी प्रदर्शित करता है।
  • रिमोट लॉक/अनलॉक, जो स्कूटर को दूर से लॉक या अनलॉक करने की अनुमति देता है।
  • रिमोट स्टार्ट, जो स्कूटर को दूर से शुरू करने की अनुमति देता है।
  • चाइल्ड लॉक/पार्किंग मोड, जो सुरक्षा के लिए स्कूटर को लॉक या पार्क करने की अनुमति देता है।
  • यूएसबी चार्जिंग, जो मोबाइल फोन या अन्य उपकरणों को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।

E-Sprinto LS price, specs, mileage, colours, photos and reviews - Bikes4Sale

इन दोनों स्कूटरों में 100 किमी की रेंज और 25 किमी प्रति घंटे की टॉप स्पीड है। वे 250W की मोटर द्वारा संचालित होते हैं।

ई-स्प्रिंटो का कहना है कि वह अगले साल B2B स्कूटर लॉन्च करने पर काम कर रही है। यह कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जो उसे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर सेगमेंट में अपनी स्थिति और मजबूत करने में मदद करेगा।

50% Overall Growth Recorded by e-Sprinto in Q1 2023

ई-स्प्रिंटो की सफलता भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती मांग को दर्शाती है। कंपनी ने अपने नवाचार और ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से इस बाजार में अपनी एक अलग पहचान बना ली है।

 ब्रिक्स: रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में 40 अरब डॉलर का व्यापार किया, डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को बढ़ावा दिया

 ब्रिक्स: रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में 40 अरब डॉलर का व्यापार किया, डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को बढ़ावा दिया

परिचय:

ब्रिक्स देशों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिका के प्रभुत्व को कम करने के लिए डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को तेज किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में 40 अरब डॉलर के व्यापार का निपटान किया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और यह दिखाता है कि ब्रिक्स देश अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मुख्य बिंदु:

  • रूस और भारत के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान 2023 की पहली छमाही में 40 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • यह दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार के आधे से अधिक है।
  • यह डी-डॉलरीकरण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रूस और भारत का व्यापार:

रूस और भारत के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। 2022 में, दोनों देशों के बीच व्यापार 33.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2021 की तुलना में 50% अधिक है।

रूस और भारत के बीच व्यापार में वृद्धि के कई कारण हैं। इनमें से एक कारण यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार हैं। रूस भारत को ऊर्जा और रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि भारत रूस को कृषि उत्पादों और औद्योगिक उपकरणों का निर्यात करता है।

दूसरा कारण यह है कि दोनों देश ब्रिक्स के सदस्य हैं। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिका के प्रभुत्व को कम करने के लिए डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को तेज किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान किया है।

रूस-भारत का उपयोग:

रूस ने अपने बढ़ते आयात उपायों को भारत के साथ व्यापार के अवसरों में वृद्धि के रूप में पहचाना है। इसके अलावा, रूस से भारत में निर्यात भी दोगुने से अधिक हो गया है। इसमें भारतीय बाजार में रूसी उत्पादों की बढ़ती मांग और विपणि संबंधों में वृद्धि शामिल है।

भारत के लिए, रूस एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है। भारत अपने ऊर्जा आयात का लगभग 20% रूस से आयात करता है। रूस से आयातित ऊर्जा भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

ब्रिक्स के साथ भविष्य:

ब्रिक्स संघ का उद्दीपन विश्व में बदल रहे दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिससे इसके सदस्य देश एक नए और सकारात्मक वित्तीय विवेचन में आ रहे हैं। इस बदलते संदर्भ में, पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने के लिए ब्रिक्स ने डी-डॉलरीकरण की योजना को बढ़ावा दिया है। यहां तक कि इसने नए सदस्यों को संघ में शामिल करने का भी एलान किया है।

ब्रिक्स देशों का मानना है कि डी-डॉलरीकरण वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर और न्यायसंगत बना देगा। यह उन्हें अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने में भी मदद करेगा।

रूस और भारत के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह डी-डॉलरीकरण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दिखाता है कि ब्रिक्स देश अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

विशिष्ट जानकारी:

  • रूस और भारत के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान कैसे किया जाता है?
  • रूस और भारत के बीच व्यापार में वृद्धि के लिए क्या संभावनाएं हैं?
  • डी-डॉलरीकरण से विश्व व्यापार को कैसे प्रभावित करेगा?

OLA इलेक्ट्रिक ने इतिहास रचा, सेबी के पास जमा किया आईपीओ का दस्तावेज ?

सुर्खियां:

  • ओला इलेक्ट्रिक ने भारतीय शेयर बाजार में धूम मचा दी है! देश की पहली इलेक्ट्रिक वाहन कंपनी के रूप में ओला ने अपने आईपीओ के लिए बाजार नियामक सेबी के पास दस्तावेज जमा कर दिए हैं।
  • यह कदम कंपनी के लिए और पूंजी जुटाने का महत्वपूर्ण कदम है और भारतीय ईवी इकोसिस्टम के लिए एक मील का पत्थर है।
  • ओला कुल मिलाकर 7,250 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है, जिसमें 5,500 करोड़ रुपये नए शेयरों की बिक्री (फ्रेश इश्यू) और 1,750 करोड़ रुपये मौजूदा शेयरधारकों के शेयरों की बिक्री (ऑफर फॉर सेल) से आएंगे।

पहला भारतीय ईवी आईपीओ:

ओला इलेक्ट्रिक का आईपीओ भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह पहली बार है कि कोई भारतीय ईवी कंपनी सार्वजनिक रूप से शेयर बाजार में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है। यह न केवल ओला के लिए, बल्कि पूरे भारतीय ईवी उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

जुटाए गए धन का उपयोग:

ओला इलेक्ट्रिक इस पूंजी का उपयोग दो मुख्य कार्यों के लिए करेगी:

  1. ईवी कारोबार का विस्तार: ओला अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत देश भर में ई-स्कूटर और ई-बाइक का उत्पादन और बिक्री बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
  2. लिथियम-आयन सेल निर्माण इकाई स्थापना: ओला भविष्य में बड़ी मात्रा में बैटरी बनाने के लिए अपनी खुद की लिथियम-आयन सेल निर्माण इकाई स्थापित करने की योजना बना रही है। यह कदम कंपनी को विदेशी निर्भरता कम करने और लागत कम करने में मदद करेगा।

आईपीओ के बारे में और जानें:

  • लक्ष्य मूल्यांकन: सूत्रों का कहना है कि ओला का लक्ष्य मूल्यांकन लगभग 7.5 बिलियन डॉलर है।
  • आईपीओ में भाग लेने वाले बैंक: कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, गोल्डमैन सैक्स, बीओएफए सिक्योरिटीज, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एक्सिस कैपिटल, एसबीआई कैपिटल और बॉब कैपिटल जैसे प्रमुख निवेश बैंक इस आईपीओ में भाग ले रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं:

ओला इलेक्ट्रिक के आईपीओ की सफलता भारतीय ईवी उद्योग के विकास को गति दे सकती है। अन्य कंपनियों को भी ओला के नक्शेकदम पर चलने के लिए प्रेरित कर सकती है और भारतीय ईवी बाजार को और मजबूत बना सकती है। हालांकि, सफलता के लिए ओला को न केवल बाजार का विश्वास जीतना होगा, बल्कि भविष्य में लगातार मजबूत वित्तीय प्रदर्शन भी दिखाना होगा।

भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (ADB) ने त्रिपुरा में शहरी सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं में सुधार के लिए 100 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

शीर्षक: त्रिपुरा के विकास के लिए 100 मिलियन डॉलर का एडीबी ऋण: शहरी सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ावा देगा

भारत सरकार और एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने 22 दिसंबर, 2023 को पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में शहरी सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं में सुधार के लिए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण समझौता किया। यह समझौता त्रिपुरा शहरी और पर्यटन विकास परियोजना के लिए है।

मुख्य बिंदु:

  • ऋण का उपयोग निम्नलिखित परियोजनाओं के लिए किया जाएगा:
    • शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता
    • शहरी सड़कों और परिवहन
    • पर्यटन विकास
  • ऋण का उपयोग निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया जाएगा:
    • त्रिपुरा में शहरी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
    • त्रिपुरा में पर्यटन को बढ़ावा देना

यह समझौता त्रिपुरा के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह त्रिपुरा में शहरी सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं में सुधार करने में मदद करेगा, जिससे राज्य को पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित होने में मदद मिलेगी।

विस्तृत विवरण:

ऋण का उपयोग त्रिपुरा में निम्नलिखित परियोजनाओं के लिए किया जाएगा:

  • शहरी जल आपूर्ति और स्वच्छता: ऋण का उपयोग 42 किमी नई ट्रांसमिशन और वितरण पाइप स्थापित करके, चार नए जल उपचार संयंत्र स्थापित करके और 55 किमी तूफानी जल नालियों में सुधार करके शहरी जल आपूर्ति प्रणालियों को उन्नत करने के लिए किया जाएगा। इससे त्रिपुरा के लोगों को बेहतर गुणवत्ता वाली पानी और स्वच्छता सेवाएं प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • शहरी सड़कों और परिवहन: ऋण का उपयोग 21 किलोमीटर की शहरी सड़कों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा जिसमें बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों की जरूरतों को पूरा करने वाली विशेषताएं शामिल होंगी। इससे त्रिपुरा में शहरी परिवहन में सुधार होगा और लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।
  • पर्यटन विकास: ऋण का उपयोग राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए किया जाएगा। इससे त्रिपुरा में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।

एडीबी का समर्थन त्रिपुरा के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की क्षमता को भी मजबूत करेगा। इससे यूएलबी को बेहतर तरीके से शहरी सेवाएं प्रदान करने और ऋण पात्रता में सुधार करने में मदद मिलेगी।

पर्यटन के लिए संभावनाएं:

त्रिपुरा एक प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर राज्य है। इसमें कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल भी हैं। पर्यटन विकास परियोजना से राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

त्रिपुरा शहरी और पर्यटन विकास परियोजना त्रिपुरा के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना राज्य में शहरी सेवाओं और पर्यटन सुविधाओं में सुधार करने में मदद करेगी, जिससे राज्य को पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में विकसित होने में मदद मिलेगी।