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दक्षिण अफ्रीका का विरोध करने के लिए तैयार इज़राइल

इज़राइल ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आईसीजे में नरसंहार के आरोपों का मुकाबला करने की प्रतिज्ञा की है

3 जनवरी, 2024 – इज़राइल ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में नरसंहार के आरोपों का मुकाबला करने की प्रतिज्ञा की है। दक्षिण अफ्रीका ने इज़राइल पर गाजा पट्टी पर अपने हमलों को नरसंहार के रूप में परिभाषित किया है।

इज़राइल के विदेश मंत्री यायर लैपिड ने कहा कि इज़राइल “इन निराधार आरोपों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।” उन्होंने कहा कि इज़राइल “अपने नागरिकों की रक्षा करने के लिए हर हक रखता है, और हम ऐसा करने के लिए किसी भी न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं।”

दक्षिण अफ्रीका ने 2023 में आईसीजे में एक याचिका दायर की थी, जिसमें इज़राइल पर गाजा पट्टी पर अपने हमलों को नरसंहार के रूप में परिभाषित किया गया था। याचिका में इज़राइल को गाजा पट्टी से अपने सैनिकों को वापस बुलाने और गाजा के नागरिकों को सहायता प्रदान करने का आदेश देने की मांग की गई थी।

आईसीजे ने याचिका पर सुनवाई शुरू कर दी है। सुनवाई का पहला चरण 2024 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

दक्षिण अफ्रीका के आरोपों का इज़राइल ने जोरदार विरोध किया है। इज़राइल का कहना है कि उसके हमले आत्मरक्षा के लिए थे और गाजा में हथियारों का भंडार नष्ट करने के लिए आवश्यक थे।

इज़राइल और दक्षिण अफ्रीका के बीच संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं। दक्षिण अफ्रीका इज़राइल के कब्जे वाले क्षेत्रों के खिलाफ है और इज़राइल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सीमित कर दिया है।

दक्षिण अफ्रीका के आरोपों ने इज़राइल और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। यह देखना होगा कि आईसीजे इस मामले में क्या निर्णय लेता है।

700 शब्दों का लेख

दक्षिण अफ्रीका का विरोध करने के लिए तैयार इज़राइल: क्या यह एक बड़ा खतरा है?

इज़राइल ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आईसीजे में नरसंहार के आरोपों का मुकाबला करने की प्रतिज्ञा की है। यह एक महत्वपूर्ण घटना है जो इस क्षेत्र में तनाव को बढ़ा सकती है।

दक्षिण अफ्रीका के आरोपों का इज़राइल ने जोरदार विरोध किया है। इज़राइल का कहना है कि उसके हमले आत्मरक्षा के लिए थे और गाजा में हथियारों का भंडार नष्ट करने के लिए आवश्यक थे।

हालांकि, दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि इज़राइल के हमले अवैध और अमानवीय थे। दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि इज़राइल ने गाजा में हजारों नागरिकों को मार डाला और लाखों लोगों को बेघर कर दिया।

यदि आईसीजे इज़राइल पर नरसंहार का आरोप लगाता है, तो यह एक बड़ा खतरा होगा। यह इज़राइल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और उसे आर्थिक और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

इसके अलावा, यह क्षेत्र में तनाव को बढ़ा सकता है। दक्षिण अफ्रीका इज़राइल के कब्जे वाले क्षेत्रों के खिलाफ एक मजबूत आवाज है। यदि आईसीजे इज़राइल पर नरसंहार का आरोप लगाता है, तो दक्षिण अफ्रीका इज़राइल पर अधिक दबाव डाल सकता है।

क्या यह टकराव का एक बड़ा खतरा है?

यह कहना मुश्किल है कि क्या यह टकराव का एक बड़ा खतरा है। आईसीजे का फैसला अभी भी लंबित है और यह देखना होगा कि आईसीजे क्या निर्णय लेता है।

हालांकि, यह स्पष्ट है कि यह एक महत्वपूर्ण घटना है जो इस क्षेत्र में तनाव को बढ़ा सकती है।

आदानी-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय, सीबीआई को तीन महीने की मुदत बिना आईटी विभाग की जिम्मेदारी के साथ!

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने आज आदानी-हिंडनबर्ग मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है. इस मामले की और जाँच के लिए सीबीआई को और तीन महीने की मुदत दी गई है. 24 मामलों में से 22 में जाँच पूरी हो चुकी है, लेकिन बाकी दो मामलों के लिए सीबीआई को और तीन महीने की मुदत मिली है.

इस निर्णय से सीबीआई को राहत मिली है. इस मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच पैथक (एसआईटी) तैयार किया गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया है, कहते हुए कि इस जाँच में सामान्य प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है.

आदानी-हिंडनबर्ग मामला आर्थिक अनैतिकता से जुड़ा हुआ है. अमेरिकी निवेश कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने 2022 में इस मामले की जानकारी प्रदान की थी. हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि आदानी समूह ने शेयर बाजार को मानिपुलेट करके निवेशकों को फंसाया है. इस के जवाब में सीबीआई ने जाँच शुरू की थी.

इस मामले में, आदानी समूह के अध्यक्ष, गौतम आदानी, और उनके परिवार के सदस्यों को शामिल किया गया है. हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि आदानी समूह ने शेयर बाजार को मानिपुलेट करके निवेशकों को फंसाया है. इस मामले में, आदानी समूह ने इन आरोपों का खंडन किया है.

सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से आदानी समूह पर आने वाले दबाव को कम होने की संभावना है. हालांकि, इस मामले की जाँच अब भी जारी है. सीबीआई की जाँच के परिणाम से इस मामले का आउटकम तय होगा.

इस निर्णय के परिणाम पर:

सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय आदानी समूह को कुछ राहत प्रदान करता है. हालांकि, सीबीआई की जाँच अब भी जारी है. सीबीआई की जाँच के परिणाम से इस मामले का आउटकम तय होगा.