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दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर केशव महाराज की खूबसूरत पत्नी से मिलें, जो एक प्रशिक्षित कथक डांसर हैं, उनका नाम है…

नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर केशव महाराज मैदान पर अपनी गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को चकमा देने के लिए मशहूर हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनकी पत्नी लेनिका महाराज (Lenika Maharaj) एक प्रशिक्षित कथक नृत्यांगना हैं?

केशव महाराज और लेनिका महाराज की शादी 2022 में हुई थी और यह शादी भारतीय और दक्षिण अफ्रीकी परंपराओं के खूबसूरत संगम का प्रतीक थी। लेनिका एक प्रोफेशनल कथक डांसर हैं और उन्होंने इस भारतीय शास्त्रीय नृत्य में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

लेनिका महाराज: कला और संस्कृति से जुड़ी हस्ती

लेनिका महाराज भारतीय मूल की हैं और उनका परिवार भारतीय संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। कथक नृत्य में प्रशिक्षित होने के साथ-साथ लेनिका फैशन और लाइफस्टाइल में भी रुचि रखती हैं। सोशल मीडिया पर वह अक्सर अपने ट्रेडिशनल लुक और डांस परफॉर्मेंस से फैंस का दिल जीतती रहती हैं।

केशव महाराज और लेनिका की प्रेम कहानी

केशव और लेनिका की प्रेम कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दोनों की पहली मुलाकात एक पारिवारिक कार्यक्रम में हुई थी, जहां से उनकी दोस्ती शुरू हुई। कुछ समय बाद यह दोस्ती प्यार में बदल गई और फिर 2022 में दोनों ने शादी कर ली

उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई थी, जिसमें दोनों ने पारंपरिक भारतीय परिधानों में सात फेरे लिए थे। शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थीं और फैंस ने इस जोड़े को खूब बधाइयां दी थीं।

भारतीय जड़ों से जुड़े हैं केशव महाराज

केशव महाराज भारतीय मूल के क्रिकेटर हैं और उनके पूर्वज भारत के उत्तर प्रदेश से दक्षिण अफ्रीका गए थे। यही कारण है कि वह भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़े हुए हैं। वह अक्सर भारत में क्रिकेट खेलने के दौरान अपने भारतीय प्रशंसकों के साथ घुल-मिल जाते हैं और अपनी मातृभूमि से जुड़ी यादों को ताजा करते रहते हैं

निष्कर्ष

केशव महाराज और उनकी पत्नी लेनिका महाराज की जोड़ी क्रिकेट और कला का अनूठा संगम है। एक तरफ केशव अपने क्रिकेट कौशल से दुनिया भर में नाम कमा रहे हैं, तो दूसरी ओर लेनिका अपनी कला के जरिए भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ा रही हैं।

दशक पुराने प्राकृतिक गैस विवाद में सरकार ने RIL और भागीदारों पर लगाया $2.8 बिलियन का जुर्माना

नई दिल्ली: प्राकृतिक गैस प्रवासन विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट के सरकार के पक्ष में दिए गए फैसले के बाद, सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और उसके भागीदारों पर $2.81 बिलियन (करीब 23,000 करोड़ रुपये) की मांग का नोटिस जारी किया है। यह जानकारी खुद रिलायंस इंडस्ट्रीज ने मंगलवार को दी।

हालांकि, RIL ने इस फैसले को अस्थायी और कानूनी रूप से अस्थिर करार दिया है और इसे चुनौती देने की योजना बनाई है। कंपनी का कहना है कि उसे इस मांग नोटिस से कोई वित्तीय नुकसान नहीं होगा

क्या है मामला?

14 फरवरी 2024 को दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (International Arbitral Tribunal) के फैसले को पलट दिया। इस न्यायाधिकरण ने पहले यह फैसला दिया था कि RIL और उसकी साझेदार BP को सरकार को कोई मुआवजा देने की जरूरत नहीं है

सरकार का आरोप है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और BP ने बंगाल की खाड़ी में स्थित अपने KG-D6 ब्लॉक से जो प्राकृतिक गैस बेची थी, उसमें से कुछ हिस्सा असल में सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ONGC के KG-DWN-98/2 ब्लॉक से निकाला गया था

2016 में भी लगाया गया था $1.55 बिलियन का जुर्माना

इस मामले में सरकार ने 2016 में भी RIL और उसके साझेदारों पर $1.55 बिलियन (करीब 12,700 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया था

इसके बाद रिलायंस ने यह मामला अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण में ले जाया, जहां 2018 में न्यायाधिकरण ने RIL के पक्ष में फैसला सुनाया

हालांकि, 2023 में सरकार ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। पहले एकल पीठ ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन सरकार द्वारा अपील किए जाने पर डिवीजन बेंच ने इस आदेश को पलट दिया और सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया

RIL करेगी कानूनी चुनौती

रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला और पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी किया गया यह मांग नोटिस कानूनी रूप से अस्थिर है, इसलिए कंपनी इसे उच्च अदालतों में चुनौती देगी

अब देखना होगा कि यह मामला अगले कानूनी चरणों में किस ओर जाता है और क्या रिलायंस इंडस्ट्रीज पर यह भारी भरकम जुर्माना लागू होगा या नहीं

भाविश अग्रवाल ने अपनाई मस्क की रणनीति, ओला कर्मचारियों से मांगी साप्ताहिक रिपोर्ट

नई दिल्लीओला के सीईओ भाविश अग्रवाल ने कंपनी में ‘क्या चल रहा है?’ नामक एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत कर्मचारियों को हर हफ्ते अपने कार्यों की रिपोर्ट देनी होगी। यह पहल एलन मस्क की उस नीति से प्रेरित मानी जा रही है, जिसमें उन्होंने इस साल की शुरुआत में अमेरिकी संघीय कर्मचारियों को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था, अन्यथा नौकरी जाने का खतरा था।

हर रविवार देनी होगी रिपोर्ट

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले हफ्ते ओला कर्मचारियों को एक आंतरिक ईमेल भेजा गया, जिसमें उन्हें हर रविवार को एक संक्षिप्त अपडेट भेजने के लिए कहा गया। यह रिपोर्ट सीधे भाविश अग्रवाल और उनके रिपोर्टिंग मैनेजर को भेजी जानी है। कर्मचारियों को तीन से पांच बुलेट पॉइंट्स में अपने काम की जानकारी देनी होगी।

ईमेल में स्पष्ट रूप से बताया गया कि रिपोर्ट भेजने के लिए कर्मचारियों को ‘Weekly updates’ विषय पंक्ति का उपयोग करना होगा और इसे Kyachalrahahai@olagroup.in पर भेजना होगा।

भाविश अग्रवाल ने अपने ईमेल में लिखा,
“हम ‘क्या चल रहा है?’ पहल शुरू कर रहे हैं – यह एक सरल तरीका है जिससे आप अपने साप्ताहिक अपडेट सीधे मुझे और अपने प्रबंधकों को भेज सकते हैं। कृपया अपने प्रबंधक और Kyachalrahahai@olagroup.in को संक्षिप्त अपडेट भेजें, जिसमें पिछले सप्ताह में किए गए कार्यों के 3-5 बुलेट पॉइंट्स शामिल हों। इसे सरल और संक्षिप्त रखें।”

कर्मचारियों पर दबाव बढ़ा

यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कंपनी 1,000 से अधिक कर्मचारियों और अनुबंधित कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रभावित विभागों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कस्टमर रिलेशन, प्रोक्योरमेंट और फुलफिलमेंट शामिल हैं।

एलन मस्क की नीति से तुलना

भाविश अग्रवाल का यह आदेश एलन मस्क की विवादास्पद नीति से मिलता-जुलता है। इस साल की शुरुआत में, मस्क ने अमेरिकी संघीय कर्मचारियों से साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट मांगी थी, अन्यथा उन्हें नौकरी से निकाले जाने की धमकी दी गई थी। यह निर्देश काफी आलोचनाओं और कानूनी चुनौतियों का कारण बना था।

अब देखना होगा कि ओला के कर्मचारी इस नई नीति को किस तरह स्वीकार करते हैं और क्या इससे कंपनी के कार्य प्रदर्शन में सुधार होता है या कर्मचारियों के असंतोष को बढ़ावा मिलता है।