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Google ने Apple को दी टक्कर, लॉन्च किया ‘सस्ता’ Pixel 9a, iPhone 16e से कम कीमत में उपलब्ध

Google ने अपने नए स्मार्टफोन Pixel 9a को पहले से ही लॉन्च कर दिया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि Apple के iPhone 16e से मुकाबले के लिए कंपनी पूरी तरह से तैयार है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी की दौड़ में बढ़त हासिल करने के लिए गूगल ने यह किफायती डिवाइस पेश किया है, जो Apple के एंट्री-लेवल iPhone 16e से 100 डॉलर (लगभग ₹10,000) सस्ता है।

Pixel 9a vs iPhone 16e: कीमत में बड़ा अंतर

गूगल ने अपने Pixel 9a को $499 (₹49,999) की कीमत पर लॉन्च किया है, जो कि Apple के iPhone 16e की कीमत $599 (₹59,900) से $100 कम है। Apple ने iPhone SE की जगह iPhone 16e को लॉन्च किया है, लेकिन यह उम्मीद से अधिक महंगा साबित हो रहा है।

Pixel 9a की यह कीमत इसे फ्लैगशिप और मिड-रेंज स्मार्टफोन के बीच में लाकर खड़ा करती है। भारतीय बाजार के लिए यह अब भी सेमी-प्रीमियम सेगमेंट में आता है, जहां औसत आय अपेक्षाकृत कम है। हालांकि, भारत में हाई-एंड स्मार्टफोन्स की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसमें बैंक ऑफर्स और ईएमआई योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।

Pixel 9a में क्या है खास?

गूगल ने इस फोन को न सिर्फ Apple से सस्ता रखा है, बल्कि इसमें कई AI फीचर्स भी जोड़े हैं, जो इसे अन्य स्मार्टफोन्स से अलग बनाते हैं। Pixel 9a में Google का Tensor प्रोसेसर दिया गया है, जो बेहतरीन परफॉर्मेंस के साथ AI आधारित सुविधाएं प्रदान करता है।

फोन के अन्य प्रमुख फीचर्स:
6.1 इंच का OLED डिस्प्ले
50MP का प्राइमरी कैमरा और 12MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा
8GB रैम और 128GB स्टोरेज
Android 15 अपडेट के साथ 5 साल तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट
AI बेस्ड फोटो एडिटिंग और वॉयस असिस्टेंस फीचर्स

Apple के iPhone 16e की चुनौतियां

Apple ने iPhone SE की जगह iPhone 16e को पेश किया है, लेकिन इसकी कीमत कई उपयोगकर्ताओं के लिए बाधा बन सकती है। iPhone 16e की कीमत ₹59,900 होने के कारण यह Pixel 9a से ₹10,000 महंगा है, जिससे भारतीय ग्राहकों के लिए यह कम आकर्षक हो सकता है।

हालांकि, iPhone 16e में Apple का A16 बायोनिक चिप और iOS 18 का सपोर्ट है, लेकिन इसका मुकाबला Pixel 9a के AI फीचर्स से करना आसान नहीं होगा।

भारतीय बाजार में Pixel 9a की संभावना

भारत में गूगल के Pixel स्मार्टफोन की पकड़ इतनी मजबूत नहीं रही है, लेकिन Pixel 9a की आक्रामक कीमत और AI फीचर्स इसे भारतीय ग्राहकों के लिए अधिक आकर्षक बना सकते हैं।

बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी और 5G टेक्नोलॉजी की उपलब्धता के कारण भारतीय ग्राहक अब प्रीमियम स्मार्टफोन्स की ओर बढ़ रहे हैं।
बैंक ऑफर्स और ईएमआई स्कीम्स के चलते महंगे स्मार्टफोन्स को खरीदना आसान हो गया है।
Google का कैमरा और सॉफ़्टवेयर एक्सपीरियंस हमेशा से भारतीय उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय रहा है।

Google ने Pixel 9a को iPhone 16e से सस्ता और बेहतर फीचर्स के साथ पेश करके Apple को सीधी टक्कर दी है। भारतीय बाजार में जहां कीमत एक महत्वपूर्ण कारक होती है, वहां गूगल के इस कदम से उसे फायदा मिल सकता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि Pixel 9a बनाम iPhone 16e की यह जंग भारतीय ग्राहकों को किस ओर ले जाती है।

चित्रा त्रिपाठी ने 16 साल के रिश्ते के बाद पति से अलग होने की घोषणा

प्रसिद्ध समाचार एंकर चित्रा त्रिपाठी ने अपने पति अतुल अग्रवाल से अलग होने की घोषणा कर दी है। उन्होंने यह खबर अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (ट्विटर) के जरिए साझा की, जिसमें उन्होंने 16 साल की शादी को खत्म करने का फैसला किया।

उनकी यह पोस्ट बेहद भावुक थी, जिसमें उन्होंने अपने रिश्ते को लेकर गहराई से लिखा और अपने फॉलोअर्स से सम्मान और समर्थन की अपील की।

चित्रा त्रिपाठी की पोस्ट में क्या लिखा था?

चित्रा त्रिपाठी ने अपने पोस्ट में लिखा:
“हर रिश्ते में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन जब चीजें संभलने की बजाय बिगड़ने लगें, तो अलग रास्ते अपनाना ही बेहतर होता है। 16 साल के लंबे रिश्ते के बाद, मैंने और अतुल ने अलग होने का फैसला लिया है। यह एक कठिन निर्णय था, लेकिन अब यही सही लग रहा है।”

उन्होंने आगे लिखा:
“इस सफर में हमें जो प्यार और समर्थन मिला, उसके लिए मैं आभारी हूं। कृपया हमारी निजता का सम्मान करें और हमें इस समय में थोड़ी शांति दें।”

शादी और निजी जीवन

चित्रा त्रिपाठी और अतुल अग्रवाल की शादी 2008 में हुई थी। दोनों ही पत्रकारिता जगत के जाने-माने नाम हैं और कई वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हैं।

चित्रा ने आज तक, एबीपी न्यूज़ और इंडिया न्यूज़ जैसे बड़े मीडिया हाउस के साथ काम किया है, जबकि उनके पति अतुल अग्रवाल भी पत्रकारिता के क्षेत्र में एक प्रमुख नाम हैं।

क्यों आई दूरियां?

हालांकि, दोनों ने अपने अलगाव की सटीक वजहों का खुलासा नहीं किया, लेकिन पिछले कुछ समय से इनके रिश्ते में तनाव की खबरें आती रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पेशेवर और निजी जीवन की चुनौतियां इस फैसले के पीछे का कारण हो सकती हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

उनकी इस घोषणा के बाद, सोशल मीडिया पर उनके फैंस और साथी पत्रकारों ने मिश्रित प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने इस फैसले का सम्मान करते हुए समर्थन किया, तो कुछ ने हैरानी और दुख जताया।

एक यूजर ने लिखा:
“आपने हमेशा हमें अपनी पत्रकारिता से प्रेरित किया है। यह फैसला आसान नहीं होगा, लेकिन हम आपके साथ हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा:
“पर्सनल लाइफ में क्या चल रहा है, यह सिर्फ आप ही जानते हैं। उम्मीद है कि भविष्य में आपके लिए सब कुछ बेहतर होगा।”

अब देखना होगा कि चित्रा त्रिपाठी और अतुल अग्रवाल अपने करियर पर किस तरह ध्यान केंद्रित करेंगे और इस नए बदलाव को कैसे स्वीकार करेंगे।

हालांकि, चित्रा की इस घोषणा से उनके फैंस को झटका जरूर लगा है, लेकिन हर किसी को उनकी निजता का सम्मान करना चाहिए और उन्हें इस फैसले के लिए समर्थन देना चाहिए।

अडानी की कच्छ कॉपर ने मेटल और केबल निर्माण के लिए बनाया संयुक्त उपक्रम

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Adani Enterprises Ltd.) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (Kutch Copper Limited – KCL) ने प्रणीता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (Praneetha Ventures Private Limited) के साथ एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture – JV) स्थापित किया है। इस नई कंपनी का नाम प्रणीता इकोकेबल्स लिमिटेड (Praneetha Ecocables Limited – PEL) रखा गया है।

संयुक्त उद्यम की स्थापना और पूंजी संरचना

यह संयुक्त उद्यम 19 मार्च 2025 को औपचारिक रूप से गठित किया गया, जिसमें कच्छ कॉपर लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी की 50% हिस्सेदारी होगी। प्रणीता इकोकेबल्स लिमिटेड मुख्य रूप से मेटल प्रोडक्ट्स, वायर और केबल के निर्माण, विपणन और वितरण में कार्य करेगा।

संयुक्त उद्यम की अधिकृत और चुकता पूंजी ₹10 लाख रखी गई है, जिसे ₹10 प्रति शेयर की दर से 1,00,000 इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है। कच्छ कॉपर लिमिटेड ने इस नई कंपनी को अहमदाबाद के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (Registrar of Companies – ROC) में पंजीकृत कराया है।

अडानी एंटरप्राइजेज के वित्तीय प्रदर्शन पर प्रभाव

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की दिसंबर तिमाही (Q3 FY25) की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की राजस्व आय में 8.8% की गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर 2023 में यह ₹25,050 करोड़ थी, जो दिसंबर 2024 में घटकर ₹22,848 करोड़ रह गई।

  • EBITDA (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले की आय) में 4.8% की गिरावट आई और यह ₹3,069.4 करोड़ रहा।
  • EBITDA मार्जिन 12.9% से बढ़कर 13.4% हो गया, जो संचालन में कुछ सुधार को दर्शाता है।
  • वित्तीय लागत (Finance Cost) ₹596.6 करोड़ से बढ़कर ₹2,141.3 करोड़ हो गई, जिससे वित्तीय दबाव स्पष्ट होता है।
  • मूल्यह्रास लागत (Depreciation Cost) ₹760 करोड़ से बढ़कर ₹1,005.6 करोड़ हो गई, जो अधिक परिसंपत्तियों से जुड़े खर्चों का परिणाम है।

फॉरेक्स और कर व्यय में वृद्धि

  • कंपनी ने इस तिमाही में ₹296 करोड़ का फॉरेक्स (विदेशी मुद्रा) नुकसान दर्ज किया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ₹101 करोड़ का फॉरेक्स लाभ हुआ था। यह मुद्रा लेनदेन में अस्थिरता को दर्शाता है।
  • कर व्यय (Tax Expenses) ₹443 करोड़ से बढ़कर ₹588 करोड़ हो गया, जो वित्तीय दबाव को और बढ़ा सकता है।

अडानी एंटरप्राइजेज की रणनीतिक योजना

प्रणीता इकोकेबल्स लिमिटेड की स्थापना कच्छ कॉपर लिमिटेड की मेटल और केबल सेक्टर में उपस्थिति मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। अडानी एंटरप्राइजेज इस नए कदम के माध्यम से अपने विविधीकरण (Diversification) और विस्तार योजनाओं को आगे बढ़ा रहा है।

हालांकि, कंपनी को वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, फिर भी यह नई परियोजनाओं और संयुक्त उपक्रमों के माध्यम से अपनी बाजार स्थिति को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

(Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से लिखा गया है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)

शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल: सेंसेक्स 1,000 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,200 के पार – जानिए 4 प्रमुख कारण

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे सत्र में मजबूती देखने को मिली। सेंसेक्स (Sensex) लगभग 1,000 अंक और निफ्टी (Nifty) 23,200 के पार पहुंच गया, जिससे निवेशकों में उत्साह है। इस उछाल के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें बैंकिंग और आईटी शेयरों में तेजी, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, वैश्विक बाजारों का समर्थन और घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी शामिल हैं।

शेयर बाजार में बड़ी बढ़त

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 992 अंक या 1.32% की बढ़त के साथ 76,441 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 (Nifty 50) 306 अंक या 1.33% की मजबूती के साथ 23,213 के स्तर पर कारोबार कर रहा था

यह लगातार चौथा सत्र था जब बाजार में मजबूती देखने को मिली, जिससे निवेशकों को काफी फायदा हुआ।

बाजार में उछाल के 4 प्रमुख कारण

1. बैंकिंग और आईटी शेयरों में तेजी

बैंकिंग और आईटी शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखी गई। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, और इन्फोसिस जैसी कंपनियों के शेयरों में उछाल से बाजार को मजबूती मिली। आईटी सेक्टर में मजबूती का कारण अमेरिकी बाजारों में स्थिरता और डॉलर इंडेक्स में गिरावट बताई जा रही है।

2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का रुख

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) ने 2024 में ब्याज दरों में कटौती की अपनी योजना को बरकरार रखा, जिससे निवेशकों की धारणा मजबूत हुई। इससे ग्लोबल बाजारों में सकारात्मकता आई, जिसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।

3. वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत

अमेरिका और यूरोप के शेयर बाजारों में आई मजबूती से भारतीय बाजार को सपोर्ट मिला। एशियाई बाजारों में भी खरीदारी देखी गई, जिससे भारतीय निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

4. घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी बाजार में तेजी का एक और प्रमुख कारण रही। भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत फंडामेंटल्स और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने निवेशकों को उत्साहित किया।

आगे बाजार का रुख कैसा रहेगा?

विश्लेषकों के अनुसार, अगर बैंकिंग और आईटी सेक्टर में तेजी बनी रहती है और वैश्विक बाजारों से समर्थन मिलता है, तो निफ्टी 23,500 और सेंसेक्स 77,000 के स्तर को छू सकता है। हालांकि, निवेशकों को सतर्कता बरतने की भी सलाह दी जा रही है, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा संभव होता है।

(Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।)

9 महीने तक फंसे रहे अंतरिक्ष यात्रियों को कितना वेतन मिला? जानिए पूरी जानकारी

नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता “सुनी” विलियम्स और बुच विलमोर हाल ही में पृथ्वी पर लौटे, लेकिन उनकी अंतरिक्ष यात्रा अपेक्षा से कहीं अधिक लंबी हो गई। मूल रूप से कुछ महीनों के लिए योजना बनाई गई यह यात्रा 278 दिन अतिरिक्त खिंच गई। यह देरी बोइंग के स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान में तकनीकी खराबी के कारण हुई, जिससे उनकी वापसी बार-बार टलती रही। इस वजह से लोग जानना चाहते हैं कि इस अतिरिक्त समय के लिए इन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को कितना वेतन मिला।

अतिरिक्त समय के लिए कोई ओवरटाइम नहीं मिला

भले ही वे अंतरिक्ष में लगभग 9 महीने तक फंसे रहे, लेकिन उन्हें ओवरटाइम या अतिरिक्त वेतन नहीं दिया गया। नासा ने स्पष्ट किया कि अंतरिक्ष यात्री सरकारी कर्मचारियों की तरह काम करते हैं और उनके वेतन में कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं जोड़ा जाता।

“जब नासा के अंतरिक्ष यात्री इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर होते हैं, तो उन्हें नियमित 40 घंटे के कार्य-सप्ताह के आधार पर वेतन मिलता है। उन्हें ओवरटाइम या वीकेंड/हॉलिडे पे नहीं दिया जाता,” नासा ने People Magazine को 19 मार्च को बताया।

नासा के अंतरिक्ष यात्रियों का वेतन कितना होता है?

नासा ने सुनीता (59) और बुच (62) के सटीक वेतन का खुलासा नहीं किया, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के वेतनमान (GS-11 से GS-14) के तहत उनकी सैलरी $84,365 से $152,258 (लगभग 70 लाख से 1.27 करोड़ रुपये सालाना) के बीच हो सकती है।

अन्य भत्ते और सुविधाएँ

हालांकि उन्हें ओवरटाइम नहीं मिला, लेकिन अंतरिक्ष यात्रियों को सरकारी यात्रा भत्ते दिए जाते हैं। चूंकि वे आधिकारिक यात्रा पर होते हैं, इसलिए उनके आवास, भोजन और परिवहन का पूरा खर्च नासा द्वारा उठाया जाता है।

इसके अलावा, लंबी अवधि की यात्राओं पर सरकारी कर्मचारियों को दैनिक भत्ता (Per Diem) भी मिलता है। हालांकि, यह राशि काफी कम होती है।

पूर्व अंतरिक्ष यात्री कैडी कोलमैन, जो 2010-2011 में ISS पर थीं, ने The Washingtonian को बताया:

“हर दिन के लिए कुछ डॉलर का दैनिक भत्ता दिया जाता है। मेरे समय में यह सिर्फ $4 (लगभग 330 रुपये) प्रति दिन था।”

लंबी अवधि तक अंतरिक्ष में रहने की चुनौतियाँ

हालांकि नासा के अंतरिक्ष यात्रियों का वेतन अच्छा होता है, लेकिन इतने लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने की कठिनाइयाँ भी बहुत अधिक होती हैं। माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण) में मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है

बोइंग स्टारलाइनर यान में बार-बार खराबी के कारण विलियम्स और विलमोर को महीनों तक ISS पर रहना पड़ा। इस दौरान, उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान और अन्य महत्वपूर्ण कार्य जारी रखे।

निष्कर्ष

हालांकि सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को 9 महीने अतिरिक्त अंतरिक्ष में रहना पड़ा, फिर भी उन्हें कोई ओवरटाइम नहीं मिला। उनका वेतन सरकारी वेतन संरचना के अनुसार तय किया गया था और अतिरिक्त वित्तीय लाभ केवल यात्रा भत्ते और दैनिक भत्तों तक सीमित था।

उनका समर्पण और धैर्य यह साबित करता है कि अंतरिक्ष यात्रियों को वेतन से अधिक मानसिक और शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका कार्य और भी सराहनीय बन जाता है। 🚀