DHAN-VYAPAR

“Test” की शूटिंग के पीछे की कहानी: विराट सिंह बोले – ‘सबकुछ नेचुरल दिखाना चाहता था’

नई दिल्ली: नेटफ्लिक्स की चर्चित फिल्म “Test” को न सिर्फ इसकी स्टार कास्ट के लिए, बल्कि इसकी सिनेमैटोग्राफी के लिए भी खूब सराहा जा रहा है। इस स्पोर्ट्स ड्रामा में सिद्धार्थ, नयनतारा और आर. माधवन मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म के सिनेमैटोग्राफर विराज सिंह ने हाल ही में Hindustan Times से बातचीत में इस फिल्म की शूटिंग और इसके पीछे की मेहनत के बारे में विस्तार से बताया।

नेचुरल लुक था प्राथमिक लक्ष्य

विराज सिंह ने बताया कि “Test” की शूटिंग में उनका मुख्य उद्देश्य था कि सबकुछ यथासंभव प्राकृतिक और रियलिस्टिक लगे। उन्होंने कहा:

“हम चाहते थे कि दर्शकों को ऐसा लगे जैसे वो कोई मैच लाइव देख रहे हों, न कि कोई फिल्म। इसीलिए कैमरा मूवमेंट्स, लाइटिंग और फ्रेमिंग सब कुछ बहुत ही सिंपल और नेचुरल रखा गया।”

उन्होंने बताया कि मैच सीक्वेंस को असली क्रिकेट मैच की तरह शूट करना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि उसमें रफ्तार, भावना और तकनीकी संतुलन तीनों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

स्टारकास्ट के साथ काम करने का अनुभव

फिल्म में नयनतारा, सिद्धार्थ और माधवन जैसे सितारे हैं, लेकिन विराज सिंह का कहना है कि इन तीनों ने सेट पर बिल्कुल सहज माहौल बनाए रखा।

“नयनतारा के साथ काम करना बेहद प्रोफेशनल अनुभव रहा। वह अपने किरदार की गहराई को समझती हैं और हर फ्रेम में वो कैमरे के साथ तालमेल बिठा लेती हैं।”

सिद्धार्थ के बारे में विराज ने कहा कि वो कैमरे के सामने बहुत सहज हैं और टेक्निकल चीजों में भी काफी समझ रखते हैं। वहीं माधवन के साथ काम को उन्होंने “सीखने का अनुभव” बताया।

कैसे की गई ग्राउंड शॉट्स की प्लानिंग?

फिल्म की थीम चूंकि क्रिकेट है, इसलिए ग्राउंड पर शूटिंग सबसे बड़ा हिस्सा थी। विराज बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने मल्टी-कैमरा सेटअप का इस्तेमाल किया और ड्रोन शॉट्स के जरिए एक शानदार सिनेमैटिक विजन तैयार किया।

“हमने लाइव मैच के फील को कैप्चर करने के लिए कैमरे को मैदान के बिल्कुल करीब रखा, ताकि दर्शकों को लगे कि वे उसी पल में मौजूद हैं।”

पोस्ट-प्रोडक्शन में भी रियलिज्म बरकरार

विराज ने बताया कि एडिटिंग और कलर ग्रेडिंग के दौरान उन्होंने खास ध्यान रखा कि शॉट्स में “फिल्मीपन” ना आए। उन्होंने कहा:

“कई बार पोस्ट में चीजों को ज्यादा स्टाइलिश बना दिया जाता है, लेकिन हमने उसमें भी यथार्थ को प्राथमिकता दी। पूरी टीम ने इस दिशा में बेहतरीन सहयोग किया।”

“Test” ने बदला खेल आधारित फिल्मों का नजरिया

“Test” को अब तक दर्शकों और समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रियाएं मिली हैं। यह फिल्म सिर्फ क्रिकेट के खेल को नहीं बल्कि खिलाड़ियों के भावनात्मक संघर्ष और व्यक्तिगत जीवन को भी गहराई से दिखाती है।

संबंधित लिंक:

अगर आप चाहें तो मैं इसी खबर का इंस्टाग्राम पोस्ट या यूट्यूब स्क्रिप्ट भी बना सकता हूँ। बताएं!

सोना हुआ सस्ता, चांदी भी पांच हफ्तों के निचले स्तर पर — जानिए आज के ताज़ा रेट शहरवार

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अहम है। आज भारत में सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई है, वहीं चांदी की कीमतें भी पांच हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना नीचे फिसला है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है।

आज का गोल्ड रेट (Gold Price Today on MCX):

  • MCX पर सुबह के कारोबार में सोना (Gold Futures) की कीमत ₹63,950 प्रति 10 ग्राम पर दर्ज की गई।
  • यह कल के मुकाबले ₹180 की गिरावट दर्शाता है।
  • चांदी (Silver Futures) ₹74,210 प्रति किलो तक गिर गई — जो कि पिछले 5 हफ्तों का सबसे निचला स्तर है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की स्थिति:

  • COMEX (New York Commodity Exchange) पर सोने की कीमत $3,121 प्रति ट्रॉय औंस पर ट्रेड हो रही थी।
  • सुबह 10:30 बजे स्पॉट गोल्ड की कीमत $3,103.91 प्रति औंस रही।
  • अमेरिका में ट्रंप द्वारा लागू किए गए टैरिफ के बाद निवेशकों ने सोने को सुरक्षित संपत्ति के रूप में खरीदा था, जिससे हालिया दिनों में इसकी कीमतें बढ़ी थीं। लेकिन अब मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती के चलते गिरावट देखने को मिली है।

शहरवार सोने के दाम (24 कैरेट और 22 कैरेट) – 3 अप्रैल 2025

शहर 22 कैरेट (₹/10 ग्राम) 24 कैरेट (₹/10 ग्राम)
दिल्ली ₹58,200 ₹63,500
मुंबई ₹58,050 ₹63,400
कोलकाता ₹58,000 ₹63,350
चेन्नई ₹58,800 ₹64,100
बेंगलुरु ₹58,000 ₹63,400
हैदराबाद ₹58,000 ₹63,400
अहमदाबाद ₹58,100 ₹63,450
लखनऊ ₹58,150 ₹63,480
चंडीगढ़ ₹58,200 ₹63,500
जयपुर ₹58,100 ₹63,450

नोट: उपरोक्त दामों में GST, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं।

क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट निवेश के लिए एक अवसर हो सकती है। लंबे समय के निवेशकों के लिए यह स्तर फायदेमंद हो सकता है क्योंकि:

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोने को हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है।
  • शादी-ब्याह के मौसम को देखते हुए मांग में वृद्धि हो सकती है।

आगे क्या उम्मीद करें?

  • अगर डॉलर मजबूत बना रहता है, तो सोने पर और दबाव पड़ सकता है।
  • अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों से संबंधित बयान आने के बाद कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है।

महत्वपूर्ण लिंक:

निष्कर्ष: सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट ने खरीदारों के लिए राहत की सांस दी है। अगर आप निवेश या खरीदारी का प्लान कर रहे हैं, तो यह मौका मुफीद हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखें।

स्टार्टअप युग में वर्क-लाइफ बैलेंस एक मिथक है? LinkedIn के को-फाउंडर ने कही सच्चाई जो 9 से 5 की नौकरी पसंद करने वालों को कर सकती है निराश!

आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में जहां स्टार्टअप्स की धूम है, वहां “वर्क-लाइफ बैलेंस” अब एक बहस का मुद्दा बन चुका है। क्या सच में ऑफिस के निर्धारित घंटे (9 से 5) की नौकरी अब बीते ज़माने की बात हो चुकी है?

LinkedIn के को-फाउंडर Reid Hoffman का मानना है कि स्टार्टअप्स की दुनिया में वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ एक मिथक (myth) है। उनका कहना है कि जो लोग सख्ती से 9-से-5 की नौकरी की सीमाओं में बंधे रहना चाहते हैं, उनके लिए स्टार्टअप्स की दुनिया शायद सही जगह नहीं है।

Reid Hoffman की राय:

Reid Hoffman का कहना है कि जब आप किसी स्टार्टअप का हिस्सा होते हैं, तो आप सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि एक मिशन का हिस्सा होते हैं। वहां तेजी से सीखना, तेजी से निर्णय लेना, और अनिश्चितता के साथ काम करना सामान्य बात है।

उनका तर्क है कि:

“If you want a predictable schedule, don’t work at a startup.”

यानी अगर आप चाहते हैं कि आपकी ज़िंदगी में रोज़ तय समय पर काम शुरू हो और तय समय पर खत्म हो जाए — तो स्टार्टअप की जिंदगी आपके लिए नहीं बनी है।

9-5 बनाम Hustle Culture:

  • पारंपरिक नौकरियों में काम के घंटे तय होते हैं, पर स्टार्टअप्स में काम एक लक्ष्य और जुनून से जुड़ा होता है।
  • स्टार्टअप्स में काम का समय लचीला होता है, लेकिन काम की जिम्मेदारियाँ और दबाव कहीं ज़्यादा होते हैं।
  • कई बार टीम के सदस्य रातों-रात नए आइडिया पर काम करते हैं, क्योंकि बाज़ार में पहली बार जाना ही फायदेमंद हो सकता है।

क्या वर्क-लाइफ बैलेंस मुमकिन है?

Reid Hoffman यह भी कहते हैं कि शुरुआत में थोड़ा असंतुलन ज़रूरी होता है। जब स्टार्टअप नया होता है, तो उसमें “extra effort” डालना ही होता है। लेकिन, जैसे-जैसे स्टार्टअप बड़ा होता है, वैसा सिस्टम बनता है जिससे संतुलन संभव होता है।

क्या हर किसी को स्टार्टअप्स से जुड़ना चाहिए?

ज़रूरी नहीं। Hoffman मानते हैं कि हर किसी का रास्ता अलग होता है। अगर आप अपने जीवन में स्थिरता, सीमित घंटे और कम जोखिम चाहते हैं, तो कॉरपोरेट दुनिया आपके लिए बेहतर हो सकती है।

निष्कर्ष:

स्टार्टअप की दुनिया में वर्क-लाइफ बैलेंस एक ऐसा लक्ष्य है जिसे समय के साथ हासिल किया जा सकता है, लेकिन शुरुआत में यह एक संघर्ष जैसा होता है। Reid Hoffman की यह सलाह खास तौर पर उन युवाओं के लिए है जो बिना हकीकत समझे सिर्फ “स्टार्टअप का ग्लैमर” देखकर उसमें कूद जाते हैं।

यदि आप एक स्थिर जीवन चाहते हैं, तो आपको यह सोचना होगा कि क्या स्टार्टअप की “हसल कल्चर” आपकी प्राथमिकताओं के अनुरूप है या नहीं।

Source: Economic Times Article

अगर आप चाहें तो मैं इस विषय पर एक Instagram या LinkedIn पोस्ट का छोटा वर्ज़न भी तैयार कर सकता हूँ।

ONGC, Oil India के शेयरों में 6% तक गिरावट: जानिए प्रमुख कारण

नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2025: शुक्रवार, 4 अप्रैल को ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (Oil India Ltd.) के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट के कारण आई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई।

शेयरों में गिरावट का हाल

शुक्रवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में ONGC और Oil India के शेयरों में 4% से 6% तक की गिरावट देखी गई।

  • ONGC के शेयर ₹268.50 के स्तर पर पहुँच गए, जो पिछले दिन की तुलना में लगभग 5% की गिरावट थी।
  • Oil India के शेयर ₹285.20 तक गिर गए, जो 6% की भारी गिरावट दर्शाता है।

गिरावट के प्रमुख कारण

1. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है।

  • ब्रेंट क्रूड की कीमत $86 प्रति बैरल से गिरकर $81 प्रति बैरल हो गई।
  • डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड ऑयल भी $80 प्रति बैरल से नीचे आ गया।

2. वैश्विक आपूर्ति में बढ़ोतरी

ओपेक (OPEC) और अन्य तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में वृद्धि की गई, जिससे बाजार में तेल की आपूर्ति अधिक हो गई और कीमतें गिर गईं।

3. अमेरिका के आर्थिक संकेतक

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को उच्च स्तर पर बनाए रखने के संकेत दिए जाने से निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित हुआ।
  • अमेरिका में आर्थिक सुस्ती की आशंका बढ़ने से तेल की मांग कम हुई है।

4. भारतीय बाजार पर असर

भारतीय बाजार में तेल कंपनियों के शेयर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर निर्भर करते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सरकारी तेल कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है।

  • लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।
  • छोटी अवधि के निवेशकों के लिए स्टॉप-लॉस लगाना फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष

ONGC और Oil India के शेयरों में गिरावट मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण हुई है। हालांकि, दीर्घकालिक दृष्टिकोण से ये कंपनियाँ मजबूत हैं और आने वाले समय में बाजार स्थिर होने पर रिकवरी की संभावना है।

महत्वपूर्ण लिंक:

(यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। निवेश से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।)

 

1.5 लाख नौकरियां, ₹1,000 करोड़ टैक्स: Zepto CEO ने भारतीय स्टार्टअप्स का किया बचाव, Piyush Goyal की टिप्पणी पर दी प्रतिक्रिया

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) की हालिया टिप्पणी के बाद Zepto के CEO आदित पलीचा (Aadit Palicha) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। गोयल ने भारतीय स्टार्टअप्स को लेकर कहा था कि वे केवल ‘डिलीवरी बॉयज़ और गर्ल्स’ बना रहे हैं। इस बयान पर कई उद्योगपतियों और स्टार्टअप संस्थापकों ने नाराजगी जताई है।

Zepto CEO की प्रतिक्रिया

Zepto के CEO आदित पलीचा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “भारतीय स्टार्टअप्स केवल डिलीवरी बॉय और गर्ल्स की नौकरियां नहीं दे रहे, बल्कि वे लाखों लोगों को रोजगार दे रहे हैं और देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान कर रहे हैं।”

उन्होंने अपनी पोस्ट में कुछ आंकड़े साझा करते हुए कहा:

  • Zepto ने अकेले ही 1.5 लाख से अधिक नौकरियां दी हैं।
  • कंपनी ने अब तक ₹1,000 करोड़ से अधिक का टैक्स सरकार को दिया है।
  • भारतीय स्टार्टअप्स न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

भारतीय स्टार्टअप्स की भूमिका

Zepto जैसे स्टार्टअप्स ने भारत में त्वरित ई-कॉमर्स (quick commerce) को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

  • Zepto के अलावा Swiggy, Zomato और Blinkit जैसी कंपनियां तेजी से ग्राहकों तक सामान पहुंचाने में क्रांति ला रही हैं
  • लाखों लोग इन कंपनियों में रोजगार पा रहे हैं और डिजिटल इंडिया अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं
  • इन कंपनियों के कारण भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल रही हैं और छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिल रहा है

AI पर Zepto CEO का सवाल

आदित पलीचा ने आगे यह भी सवाल उठाया, “भारत का अपना बड़ा AI मॉडल क्यों नहीं है?” उन्होंने यह इशारा किया कि भारत को केवल डिलीवरी सेवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि टेक्नोलॉजी और AI में भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।

उद्योगपतियों की प्रतिक्रिया

Zepto CEO की इस टिप्पणी के बाद कई अन्य स्टार्टअप संस्थापकों और उद्योग विशेषज्ञों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। Ola के CEO भाविश अग्रवाल और Zerodha के निखिल कामथ सहित कई लोगों ने स्टार्टअप इकोसिस्टम के योगदान को रेखांकित किया।

सरकार का रुख

हालांकि, सरकार की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पहले यह स्पष्ट किया था कि स्टार्टअप्स को और अधिक इनोवेशन और रिसर्च पर ध्यान देना चाहिए

निष्कर्ष

Zepto और अन्य भारतीय स्टार्टअप्स केवल डिलीवरी सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लाखों लोगों को रोजगार देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। Zepto के CEO आदित पलीचा का यह बयान भारतीय स्टार्टअप्स के महत्व और उनकी उपलब्धियों को दर्शाने के लिए महत्वपूर्ण है। अब देखना यह होगा कि सरकार और उद्योग जगत इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाते हैं।

Zepto CEO की पूरी प्रतिक्रिया यहाँ पढ़ें
भारतीय स्टार्टअप्स पर अधिक जानकारी