DHAN-VYAPAR

Capgemini के CEO का वर्कवीक पर नया नजरिया: न 90, न 70, यहां तक कि 50 घंटे भी नहीं!

भारत में वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर एक नई बहस छिड़ी हुई है। जहां कई उद्योग जगत के दिग्गज लंबे वर्किंग ऑवर्स की वकालत कर रहे हैं, वहीं Capgemini India के CEO अश्विन यार्डी ने इस विषय पर एक अलग दृष्टिकोण पेश किया है।

Infosys के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति और L&T के चेयरमैन एस.एन. सुब्रह्मण्यम जैसे बड़े बिजनेस लीडर्स ने लंबी कार्य अवधि को भारत के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक बताया है। मूर्ति ने जहां 70 घंटे की वर्कवीक का सुझाव दिया, वहीं सुब्रह्मण्यम ने इसे 90 घंटे तक बढ़ाने की बात कही। लेकिन अश्विन यार्डी ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।

47.5 घंटे की वर्कवीक को बताया आदर्श

Nasscom टेक्नोलॉजी एंड लीडरशिप फोरम (NTLF) में मंगलवार को यार्डी ने कहा कि उनके अनुसार आदर्श वर्कवीक 47.5 घंटे की होनी चाहिए

“सप्ताह में 47.5 घंटे। हम रोजाना नौ घंटे काम करते हैं और सप्ताह में पांच दिन।”

यह सुझाव 70 और 90 घंटे के वर्कवीक से काफी कम है और एक बेहतर कार्य-जीवन संतुलन को दर्शाता है।

वीकेंड में ईमेल भेजने के सख्त खिलाफ

यार्डी ने इस बात पर भी जोर दिया कि वीकेंड पर अनावश्यक ईमेल नहीं भेजे जाने चाहिए। उनका मानना है कि यदि कोई समस्या तुरंत हल नहीं हो सकती, तो उसे वीकेंड पर उठाने की जरूरत नहीं है।

“मेरी पिछले चार सालों की गाइडलाइन यह है कि वीकेंड पर कोई ईमेल न भेजा जाए, जब तक कि आप इसे उसी समय हल नहीं कर सकते।”

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह कभी-कभी वीकेंड पर खुद काम करते हैं, लेकिन अपने कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालने से बचते हैं।

युवा कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं पर ध्यान

यार्डी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी की वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर अलग उम्मीदें हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए Capgemini ने कई बदलाव किए हैं:

तिमाही प्रमोशन सिस्टम – जिससे कर्मचारियों को जल्दी करियर ग्रोथ मिल सके।
छह सप्ताह में एक बार सर्वे – जिससे कर्मचारियों की चिंताओं और अपेक्षाओं को समझा जा सके।
संरचित करियर पाथ – जिससे कर्मचारियों को अपना प्रोफेशनल फ्यूचर प्लान करने में मदद मिले।

अन्य लीडर्स की प्रतिक्रिया

इस कार्यक्रम में मौजूद Nasscom की चेयरपर्सन सिंधु गंगाधरन और Marico के CEO सौगत गुप्ता ने भी अपने विचार साझा किए।

सिंधु गंगाधरन ने कहा कि परिणाम ज्यादा महत्वपूर्ण हैं, न कि काम के घंटे
सौगत गुप्ता ने भी सहमति जताई, लेकिन स्वीकार किया कि वे रात 11 बजे भी ईमेल भेजते हैं, जिससे यह पता चलता है कि हर लीडर की अपनी कार्यशैली होती है

निष्कर्ष

जहां कुछ लीडर्स मानते हैं कि लंबे वर्किंग ऑवर्स भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी हैं, वहीं Capgemini के अश्विन यार्डी का मानना है कि संतुलन बनाए रखना ज्यादा जरूरी है। उनका दृष्टिकोण न केवल युवा कर्मचारियों की मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि एक स्मार्ट वर्क कल्चर को भी प्रमोट करता है।

अब देखना यह होगा कि भारतीय कॉर्पोरेट जगत इस बहस में किस ओर झुकता है – लंबे घंटों की वकालत या बैलेंस्ड वर्क-लाइफ का समर्थन?

Leave a Comment

Latest News

your opinion..

[democracy id="1"]

Live Cricket