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1 मार्च 2025: सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट, जानें आज के ताजा रेट

मार्च की शुरुआत के साथ ही सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि आज के ताजा दाम क्या हैं। आइए जानते हैं 1 मार्च 2025 को भारत में सोने और चांदी की कीमतें

आज के सोने के दाम (Gold Rate Today, 1 March 2025)

  • 24 कैरेट सोना: ₹8,700.3 प्रति ग्राम (-₹540.0 की गिरावट)
  • 22 कैरेट सोना: ₹7,976.3 प्रति ग्राम (-₹500.0 की गिरावट)

पिछले एक हफ्ते में 24 कैरेट सोने की कीमत में 0.05% की गिरावट देखी गई है, जबकि बीते एक महीने में 5.43% की कमी दर्ज की गई है।

चांदी की कीमत (Silver Price Today, 1 March 2025)

  • चांदी (Silver Rate): ₹1,00,000 प्रति किलोग्राम (-₹1,000.0 की गिरावट)

क्या यह सोना-चांदी खरीदने का सही समय है?

सोने और चांदी की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव, रुपये की स्थिति और महंगाई दर शामिल हैं। मौजूदा गिरावट निवेशकों और ग्राहकों के लिए सोना खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है।

अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अपने नजदीकी ज्वेलर्स से रेट की पुष्टि जरूर करें, क्योंकि शहर के हिसाब से कीमतों में अंतर हो सकता है।

मार्च 2025 बैंक हॉलिडे: इस महीने कब-कब बंद रहेंगे बैंक, यहां देखें पूरी लिस्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) हर महीने बैंकों की छुट्टियों की सूची जारी करता है, जिससे ग्राहकों को यह पता चल सके कि कौन-कौन से दिन बैंक बंद रहेंगे। अगर आप भी मार्च 2025 में बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले यह देख लें कि आपके शहर में बैंक किस दिन बंद रहेंगे, ताकि आपके जरूरी काम अटक न जाएं।

मार्च 2025 में बैंक कितने दिन रहेंगे बंद?

इस महीने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय छुट्टियों को मिलाकर कुल 12 दिन बैंक बंद रहेंगे। हालांकि, ध्यान दें कि कुछ छुट्टियां राज्य-विशिष्ट होती हैं, यानी वे सभी राज्यों में लागू नहीं होतीं। इसके अलावा, सभी रविवार और दूसरे व चौथे शनिवार को भी बैंक बंद रहेंगे।

मार्च 2025 बैंक हॉलिडे की पूरी लिस्ट:

तारीख दिन छुट्टी का कारण राज्य
2 मार्च रविवार साप्ताहिक अवकाश सभी राज्य
8 मार्च शनिवार दूसरा शनिवार सभी राज्य
9 मार्च रविवार साप्ताहिक अवकाश सभी राज्य
17 मार्च सोमवार होली कई राज्य
20 मार्च गुरुवार नवरोज़ कुछ राज्य
22 मार्च शनिवार चौथा शनिवार सभी राज्य
23 मार्च रविवार साप्ताहिक अवकाश सभी राज्य
25 मार्च मंगलवार राम नवमी कुछ राज्य
29 मार्च शनिवार गुड फ्राइडे सभी राज्य
30 मार्च रविवार साप्ताहिक अवकाश सभी राज्य

बैंक जाने से पहले ध्यान रखें ये बातें

  • अगर आपका बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए प्लान बनाएं
  • नेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं इन छुट्टियों के दौरान भी उपलब्ध रहेंगी।
  • एटीएम, UPI और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे।
  • कुछ राज्यों में छुट्टियां अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने राज्य की स्थानीय बैंक ब्रांच से भी जानकारी प्राप्त करें

निष्कर्ष

मार्च 2025 में बैंक 12 दिन बंद रहेंगे, जिनमें से कुछ छुट्टियां राज्य-विशेष होंगी। इसलिए, बैंक जाने से पहले इस लिस्ट को चेक कर लें और अपने वित्तीय कार्यों को सही समय पर पूरा करें।

भारतीय नौसेना ने किया NASM-SR मिसाइल का सफल परीक्षण, छिपे दुश्मनों पर भी सटीक वार

भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने स्वदेशी रूप से विकसित नेवल एंटी-शिप मिसाइल शॉर्ट रेंज (NASM-SR) का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण 25 फरवरी 2025 को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में किया गया। परीक्षण के दौरान, इस मिसाइल को सी किंग 42B हेलीकॉप्टर से लॉन्च किया गया और इसने अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता से भेदा।

विदेशी मिसाइलों का होगा स्थानांतरण

NASM-SR को भारतीय नौसेना के सी किंग हेलीकॉप्टरों पर इस्तेमाल हो रही विदेशी मूल की एंटी-शिप मिसाइलों को बदलने के लिए विकसित किया गया है। यह मिसाइल 50 किमी से अधिक की अधिकतम सीमा तक हमला कर सकती है, जिससे भारत की समुद्री हमला करने की क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही, यह देश की आयातित हथियारों पर निर्भरता को भी कम करेगा।

NASM-SR की खासियत यह है कि यह समुद्र की सतह के बहुत करीब उड़ते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंचती है, जिसे सी-स्किमिंग मोड कहा जाता है। यह तकनीक इसे रडार से बचने में मदद करती है और दुश्मन को समय रहते हमले का आभास नहीं होने देती।

स्वदेशी तकनीक और उन्नत विशेषताएँ

NASM-SR पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है और इसमें कई अत्याधुनिक फीचर्स हैं:

  1. इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) सीकर – यह लक्ष्य को पहचानने और सटीक निशाना लगाने में मदद करता है, भले ही वह छिपा हुआ हो या गतिशील हो
  2. सी-स्किमिंग तकनीक – यह मिसाइल समुद्र की सतह के बहुत पास उड़ती है जिससे इसे पकड़ना और रोकना मुश्किल हो जाता है।
  3. 50+ किमी की मारक क्षमता – यह सीमा नौसेना को लंबी दूरी से हमले करने की सुविधा देती है।
  4. हल्का और तेज़ – इसका डिजाइन इसे तेज़ गति से लक्ष्य भेदने में सक्षम बनाता है।

आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम

NASM-SR मिसाइल का सफल परीक्षण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे भारतीय नौसेना को अपनी युद्ध क्षमता को बढ़ाने और विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान की नौसेना के खिलाफ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसका सफल परीक्षण यह दर्शाता है कि भारत अब सामरिक रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आगे की योजना

भारतीय नौसेना NASM-SR को जल्द ही अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बना रही है। इसके बाद इसे नौसेना के अन्य युद्धपोतों और हेलीकॉप्टरों के साथ भी एकीकृत किया जा सकता है।

इस स्वदेशी मिसाइल प्रणाली का विकास DRDO की कई प्रयोगशालाओं ने मिलकर किया है, जिसमें DRDL, RCI और अन्य रक्षा संस्थान शामिल हैं। इस परीक्षण की सफलता से भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ गया है और यह आने वाले वर्षों में भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाने वाला साबित हो सकता है

माइक्रोसॉफ्ट मई से बंद करेगा स्काइप, टीम्स पर देगा जोर

माइक्रोसॉफ्ट ने घोषणा की है कि वह मई 2025 से अपने लोकप्रिय वीडियो कॉलिंग सेवा, स्काइप, को बंद कर देगा। यह निर्णय कंपनी के संचार प्लेटफ़ॉर्म, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

स्काइप का इतिहास:

स्काइप की स्थापना 2003 में एस्टोनिया के इंजीनियरों द्वारा की गई थी। यह सेवा इंटरनेट के माध्यम से ऑडियो और वीडियो कॉल की सुविधा प्रदान करती थी, जिसने वैश्विक संचार में क्रांति ला दी थी। 2005 में, ईबे ने इसे खरीदा, और 2011 में माइक्रोसॉफ्ट ने इसे $8.5 बिलियन में अधिग्रहित किया।

स्काइप का पतन:

हाल के वर्षों में, स्काइप की लोकप्रियता में गिरावट आई है, विशेष रूप से ज़ूम और स्लैक जैसी नई सेवाओं के उदय के साथ। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब अन्य वीडियो प्लेटफ़ॉर्म की मांग बढ़ी, स्काइप उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ सका।

माइक्रोसॉफ्ट टीम्स का उदय:

2017 में, माइक्रोसॉफ्ट ने टीम्स को लॉन्च किया, जो एक व्यापक संचार और सहयोग प्लेटफ़ॉर्म है। टीम्स ने तेज़ी से लोकप्रियता हासिल की है, विशेष रूप से व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के बीच, और अब यह माइक्रोसॉफ्ट का प्रमुख संचार उपकरण बन गया है।

उपयोगकर्ताओं के लिए संक्रमण:

मौजूदा स्काइप उपयोगकर्ता अपनी वर्तमान साख का उपयोग करके माइक्रोसॉफ्ट टीम्स में लॉग इन कर सकते हैं। उनके संपर्क और चैट इतिहास स्वचालित रूप से टीम्स में स्थानांतरित हो जाएंगे, जिससे संक्रमण सुगम होगा।

भविष्य की दिशा:

माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम संचार सेवाओं को एकीकृत करने और उपयोगकर्ताओं को एक समेकित प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करने की दिशा में है। टीम्स के साथ, उपयोगकर्ता न केवल कॉल और मैसेजिंग कर सकते हैं, बल्कि मीटिंग्स होस्ट करना, कैलेंडर प्रबंधन और समुदाय बनाना जैसी सुविधाओं का भी लाभ उठा सकते हैं।

स्काइप का बंद होना एक युग के अंत का संकेत है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट टीम्स के साथ, उपयोगकर्ताओं के पास एक आधुनिक और व्यापक संचार समाधान उपलब्ध होगा।

वीकेंड बिंज: पसंद आई Dabba Cartel? तो ये महिला-केंद्रित फ़िल्में ज़रूर देखें!

नई दिल्ली:
Netflix की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज़ Dabba Cartel आखिरकार रिलीज़ हो गई है। यह क्राइम थ्रिलर पांच साधारण मध्यमवर्गीय महिलाओं की कहानी दिखाती है, जिनका डब्बा बिजनेस अचानक खतरनाक ड्रग कार्टेल की दुनिया में कदम रखता है। इस सीरीज़ में शबाना आज़मी, गजराज राव, ज्योतिका, निमिषा सजयन, शालिनी पांडे और अंजलि आनंद मुख्य भूमिकाओं में हैं।

अगर Dabba Cartel देखने के बाद आप और दमदार महिला-केंद्रित कहानियों की तलाश कर रहे हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं। आपके वीकेंड को शानदार बनाने के लिए ये टॉप फ़िल्में आपकी वॉचलिस्ट में होनी चाहिए:

1. मदर इंडिया – प्राइम वीडियो

1957 में आई यह क्लासिक फ़िल्म भारतीय सिनेमा की सबसे महान फ़िल्मों में गिनी जाती है। मेहबूब खान के निर्देशन में बनी इस फ़िल्म में नरगिस, सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार और राज कुमार ने दमदार अभिनय किया है। अगर Gen Z ने इसे अभी तक नहीं देखा, तो अब देखने का सही समय है!

2. इंग्लिश विंग्लिश – जियोसिनेमा/डिज़्नी+ हॉटस्टार

श्रीदेवी की ये बेहतरीन फ़िल्म उनकी विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2012 में टोरंटो इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के दौरान इसे 5 मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन मिला था। फ़िल्म एक मराठी गृहिणी की कहानी है, जो इंग्लिश सीखने की यात्रा पर निकलती है और आत्मनिर्भर बनती है।

3. क्वीन – नेटफ्लिक्स

कंगना रनौत की यह फ़िल्म एक साधारण लड़की रानी मेहरा की कहानी है, जो अपनी शादी टूटने के बाद अकेले ही हनीमून पर पेरिस और एम्स्टर्डम घूमने निकल पड़ती है। यह फ़िल्म न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि इसमें कई यादगार डायलॉग भी हैं, जैसे— “मेरा तो इतना लाइफ खराब हो गया!

4. गंगूबाई काठियावाड़ी – नेटफ्लिक्स

संजय लीला भंसाली की इस भव्य फ़िल्म में आलिया भट्ट ने कमाठीपुरा की एक सेक्स वर्कर से नेता बनी गंगूबाई का किरदार निभाया है। इस फ़िल्म के संवाद और गाने, खासतौर पर मेरी जान, बेहद लोकप्रिय हुए। आलिया का दमदार डायलॉग— “जब शक्ति, संपत्ति और सद्बुद्धि तीनों ही औरतें हैं, तो इन मर्दों को किस बात का गुरूर?“—आज भी चर्चा में रहता है।

5. पिंक – प्राइम वीडियो

अगर किसी फ़िल्म ने ना का मतलब ना की अहमियत समझाई, तो वो पिंक है। तापसी पन्नू और अमिताभ बच्चन अभिनीत यह कोर्टरूम ड्रामा महिलाओं की सहमति और समाज की सोच पर गहरी चोट करता है। अमिताभ बच्चन का डायलॉग— “No means no!“—आज भी याद किया जाता है।

आपकी पसंदीदा फ़िल्म कौन-सी है?

इनमें से कौन-सी फ़िल्म आपके दिल के सबसे करीब है? हमें कमेंट में ज़रूर बताएं!

Nifty 1,100 अंकों की गिरावट की ओर: यह लालच का समय है या डर का?

शेयर बाजार में उठापटक जारी

भारतीय शेयर बाजार में हाल के दिनों में गिरावट का सिलसिला देखने को मिला है। Nifty 50 इंडेक्स अब 1,100 अंकों की दूरी पर है उस स्तर से जहां इसे आधिकारिक रूप से “बियर मार्केट” (भालू बाजार) घोषित किया जा सकता है। इस स्थिति में निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह खरीदारी का सही मौका है (लालच) या फिर सतर्क रहने का समय है (डर)?

बियर मार्केट क्या है?

बियर मार्केट तब घोषित किया जाता है जब किसी प्रमुख स्टॉक इंडेक्स में सर्वोच्च स्तर से 20% या उससे अधिक की गिरावट दर्ज की जाती है। फिलहाल Nifty 50 अपने रिकॉर्ड हाई (22,126) से लगभग 1,100 अंक नीचे आ चुका है और यदि इसमें और गिरावट आती है, तो यह आधिकारिक रूप से बियर मार्केट में प्रवेश कर सकता है।

गिरावट के कारण

हाल की गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें शामिल हैं:

  1. वैश्विक बाजारों में कमजोरी – अमेरिका और यूरोप में मंदी की आशंका, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति और चीन की सुस्त अर्थव्यवस्था का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
  2. FII की बिकवाली – विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारी मात्रा में भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे दबाव बना हुआ है।
  3. भू-राजनीतिक तनाव – रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास संघर्ष और चीन-ताइवान तनाव जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं।
  4. भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे – कई कंपनियों के हालिया तिमाही नतीजे उम्मीद से कमजोर आए हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।

क्या यह निवेश का सही समय है?

अब सवाल यह है कि क्या निवेशकों को इस गिरावट में खरीदारी करनी चाहिए या सतर्क रहना चाहिए?

लालच (Greed) का पक्ष:

✅ Nifty अभी भी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ ट्रेंड में बना हुआ है।
✅ भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत देती है।
✅ बड़ी गिरावट के बाद मजबूत शेयरों में निवेश का अच्छा मौका मिल सकता है
✅ यदि बाजार बियर मार्केट में भी जाता है, तो अच्छी कंपनियों के शेयर डिस्काउंट पर मिल सकते हैं

डर (Fear) का पक्ष:

❌ मंदी और ब्याज दरों में अनिश्चितता के कारण अभी भी बाजार में और गिरावट आ सकती है
❌ FII की निरंतर बिकवाली भारतीय शेयर बाजार पर नकारात्मक दबाव बना सकती है।
❌ यदि वैश्विक मंदी आती है, तो भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा

निवेशकों के लिए सलाह

  • शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सतर्क रहना चाहिए और जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश नहीं करना चाहिए।
  • लॉन्ग टर्म निवेशक मजबूत और फंडामेंटली साउंड स्टॉक्स पर फोकस कर सकते हैं।
  • पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन बनाए रखना ज़रूरी है ताकि जोखिम कम हो।
  • टेक्निकल इंडिकेटर्स और निफ्टी के सपोर्ट लेवल पर नज़र रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
निष्कर्ष

Nifty अभी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और यह तय करना मुश्किल है कि आगे बाजार किस दिशा में जाएगा। निवेशकों को भावनाओं से दूर रहकर, सतर्कता और समझदारी से फैसले लेने चाहिए। फिलहाल, यह ना पूरी तरह लालच करने का समय है, ना ही पूरी तरह डरने का – बल्कि एक संतुलित रणनीति अपनाने का सही समय है।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल अंबानी को यूनियन बैंक के आदेश पर RBI से संपर्क करने का निर्देश दिया

मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने उद्योगपति अनिल अंबानी को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी आदेश को चुनौती देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से संपर्क करने का निर्देश दिया है। यह मामला उनके नाम को विलफुल डिफॉल्टर की सूची में शामिल किए जाने से जुड़ा है।

क्या है मामला?

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने हाल ही में अनिल अंबानी को विलफुल डिफॉल्टर घोषित करने का निर्णय लिया था। इसके खिलाफ उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने बैंक के इस फैसले को अवैध और अनुचित बताया।

बॉम्बे हाईकोर्ट का निर्देश

न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला की अगुवाई वाली हाईकोर्ट की बेंच ने अनिल अंबानी को इस मुद्दे पर पहले RBI से संपर्क करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि RBI इस मामले पर उचित फैसला लेने के लिए सक्षम प्राधिकरण है और अंबानी को पहले उसी से समाधान मांगना चाहिए।

अनिल अंबानी की दलील

अनिल अंबानी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि बैंक का यह फैसला ग़लत प्रक्रिया पर आधारित है और इससे उनके व्यवसाय और वित्तीय प्रतिष्ठा को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उन्हें सही तरीके से अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला

आगे की राह

अब अनिल अंबानी को इस फैसले को चुनौती देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) में अपील करनी होगी। यदि वहां से संतोषजनक समाधान नहीं मिलता है, तो वे फिर से हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं

यह मामला भारत में वित्तीय नियमन और बैंकों द्वारा डिफॉल्टर्स के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

सोने की कीमतों में गिरावट जारी: अमेरिकी PCE मुद्रास्फीति डेटा से पहले XAU/USD $2,890 के समर्थन स्तर से नीचे

नई दिल्ली, 28 फरवरी 2025 – अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। शुक्रवार के एशियाई ट्रेडिंग सत्र में XAU/USD $2,900 से नीचे दो सप्ताह के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। यह लगातार आठ सप्ताह की बढ़त को तोड़ने के संकेत दे रहा है। अमेरिका में PCE मुद्रास्फीति डेटा और वैश्विक आर्थिक हालात इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

अमेरिकी डॉलर की मजबूती से सोने पर दबाव

डॉलर की मजबूती:

  • अमेरिकी डॉलर (USD) फिर से मजबूती पकड़ रहा है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए 25% आयात शुल्क लगाने की धमकी से बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
  • Nvidia और अन्य टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के चलते निवेशक जोखिम से बचने के लिए डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं।

PCE मुद्रास्फीति डेटा का प्रभाव:

  • अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स के आंकड़े आज जारी होंगे।
  • जनवरी के लिए PCE मुद्रास्फीति दर 2.6% रहने का अनुमान है, जबकि दिसंबर में यह 2.8% थी।
  • यदि आंकड़े अपेक्षा से अधिक आते हैं, तो फेडरल रिजर्व (Fed) ब्याज दरों में कटौती को टाल सकता है, जिससे डॉलर और मजबूत होगा और सोने की कीमत और गिर सकती है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और सोने का भविष्य

बॉन्ड यील्ड में गिरावट:

  • 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 4.20% तक गिर चुका है, जो 11 सप्ताह का निचला स्तर है।
  • ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से बॉन्ड यील्ड कम हो रही है, जिससे सोने की गिरावट कुछ हद तक सीमित रह सकती है।

ट्रंप की नीतियों का असर:

  • ट्रंप ने पुष्टि की है कि 4 मार्च से मेक्सिको और कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 25% और चीन पर 10% शुल्क लगेगा।
  • इन नीतियों से अमेरिकी बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिससे निवेशक सोने की ओर लौट सकते हैं।

क्या सोना फिर से $3,000 के स्तर को छू सकता है?

📉 निवेशकों की चिंताएं:

  • डॉलर की मजबूती के कारण फिलहाल सोने में $2,800 तक गिरावट संभव है।
  • लेकिन, अगर फेड ब्याज दरों में कटौती का संकेत देता है, तो सोना फिर से $3,000 के ऊपर जा सकता है।

📈 मांग बढ़ने की संभावना:

  • वैश्विक अनिश्चितताओं और मंदी की चिंताओं के चलते सोने की सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में मांग बढ़ सकती है।
  • चीन और भारत में बढ़ती खुदरा मांग भी सोने की कीमतों को सपोर्ट कर सकती है।

निष्कर्ष:

अमेरिकी PCE मुद्रास्फीति डेटा और ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियां सोने की कीमतों की दिशा तय करेंगी। फिलहाल, $2,890 से नीचे स्थिरता नकारात्मक संकेत है, लेकिन यदि डॉलर में कमजोरी आती है तो सोना फिर से ऊपर जा सकता है। निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव पर नज़र रखते हुए समझदारी से निवेश करने की सलाह दी जाती है।

Pi Coin ने लगाई 300% की छलांग: जानें इस जबरदस्त उछाल के पीछे की वजह

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में Pi Coin ने तहलका मचा दिया है। 20 फरवरी को Open Mainnet लॉन्च होने के बाद से इस डिजिटल एसेट ने 290% से अधिक की बढ़त दर्ज की, जिससे इसकी कीमत $2.16 से ऊपर पहुंच गई। इस शानदार उछाल ने Bitcoin, Ethereum और Dogecoin जैसी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी को भी पीछे छोड़ दिया, जिन्होंने पिछले हफ्ते 9-20% तक की गिरावट देखी है।

Pi Coin की कीमत में उछाल के मुख्य कारण

Pi Coin की कीमत में भारी उछाल के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:

  1. Open Mainnet लॉन्च:

    • 20 फरवरी 2025 को Pi Network ने Open Mainnet लॉन्च किया, जिससे यूज़र्स को अब अपने Pi Coins को नेटवर्क के बाहर ट्रांसफर करने की सुविधा मिल गई है।
    • यह एक लंबे समय से प्रतीक्षित अपग्रेड था, जिसने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और मांग को बढ़ावा दिया।
  2. बड़े एक्सचेंजों पर लिस्टिंग:

    • Pi Coin को अब OKX, Bitget और CoinDCX जैसे प्रमुख क्रिप्टो एक्सचेंजों पर लिस्ट कर दिया गया है।
    • इस लिस्टिंग के बाद, Pi Coin की लिक्विडिटी (व्यापार की क्षमता) बढ़ गई, जिससे अधिक निवेशक इसे खरीद और बेच पा रहे हैं।
  3. बाजार में गिरावट के बावजूद मजबूती:

    • जहां Bitcoin, Ethereum और Dogecoin जैसी टॉप क्रिप्टोकरेंसीज़ 9-20% तक गिर चुकी हैं, वहीं Pi Coin ने जबरदस्त बढ़त बनाई है।
    • यह निवेशकों के लिए एक बेहतर और संभावित रूप से लाभदायक विकल्प बन रहा है।

Pi Coin की आगे की संभावनाएं

Pi Coin की तेजी से बढ़ती कीमत और बढ़ती मांग इसे बाजार में एक मजबूत खिलाड़ी बना सकती है। हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी बाजार अत्यधिक अस्थिर (volatile) होता है और किसी भी डिजिटल एसेट में निवेश करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

वर्तमान रुझानों के अनुसार, अगर Pi Coin की गोद ली जाने वाली (adoption) दर और बढ़ती रही, तो इसकी कीमत और भी ऊंचे स्तर पर जा सकती है

क्या Pi Coin क्रिप्टो बाजार में एक नई क्रांति ला सकता है? यह देखना दिलचस्प होगा!

20% गिरावट के बाद Ethereum की कीमत स्थिर, लेकिन क्या ETH में रिकवरी की उम्मीद है?

Ethereum (ETH) की कीमत में तीन दिनों में 20% की भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे यह $2,255 के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, कीमत अब $2,300 के करीब स्थिर हो गई है, जिससे निवेशकों को कुछ राहत मिली है।

ETH के डेरिवेटिव बाजार में सुधार के संकेत दिख रहे हैं, जिससे यह संभावना बढ़ रही है कि Ethereum $2,800 के स्तर तक वापस उछाल सकता है

ETH फ्यूचर्स बाजार में रिकवरी के संकेत

पिछले 30 दिनों में ETH फ्यूचर्स प्रीमियम 7% तक पहुंच गया, जो दो दिन पहले 6% था। आमतौर पर, 5% से 10% के बीच का फ्यूचर्स प्रीमियम न्यूट्रल माना जाता है, क्योंकि ट्रेडर्स लंबी अवधि के निपटान (सेटलमेंट) के लिए प्रीमियम की उम्मीद करते हैं।

इस बदलाव का मतलब है कि $2,600 से नीचे मंदी का दबाव (bearish pressure) कमजोर हो रहा है, जिससे बुलिश निवेशकों का विश्वास बढ़ सकता है।

कमजोर वैश्विक आर्थिक स्थिति ETH रिकवरी को धीमा कर सकती है

हालांकि डेटा यह संकेत दे रहा है कि Ethereum अपने निचले स्तर से ऊपर उठ चुका है, लेकिन इसकी रिकवरी की गति कई आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी।

अमेरिका में हाल ही में जारी आर्थिक आंकड़े निवेशकों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं:

  • यूएस बेरोजगारी दर (Jobless Claims): 22 फरवरी को समाप्त सप्ताह के लिए 242,000 नई बेरोजगारी दावे दर्ज किए गए, जो पिछले तीन महीनों में सबसे अधिक हैं।
  • यूएस हाउसिंग मार्केट: जनवरी में पेंडिंग होम सेल्स 4.6% तक गिरीं, जो इतिहास में सबसे निचला स्तर है।

भू-राजनीतिक तनाव और ट्रेड वार के प्रभाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, कनाडा और मैक्सिको से आयातित सामानों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

इसके अलावा, ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) से आयात पर 25% टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिसके जवाब में EU ने कड़े प्रतिशोध का संकेत दिया। इस तनाव से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है।

बाजार में व्यापक गिरावट का असर

  • Nvidia के शेयर 27 फरवरी को 3.3% गिर गए, भले ही कंपनी ने अपेक्षा से बेहतर तिमाही परिणाम पेश किए।
  • सोने की कीमत पिछले दो दिनों में 2.2% तक गिरकर $2,870 के स्तर पर आ गई, जो बाजार की अस्थिरता को दर्शाता है।

ETH के लिए आगे की संभावनाएं

Ethereum की $2,800 तक रिकवरी संभव है, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और निवेशकों की सतर्कता पर निर्भर करेगा। कमजोर अमेरिकी अर्थव्यवस्था और ट्रेड वार के बढ़ते तनाव के बीच, क्रिप्टो बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

फिलहाल, निवेशकों को सतर्क रहने और ETH में लंबी अवधि के दृष्टिकोण से निवेश करने की सलाह दी जाती है