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Bitcoin में गिरावट जारी: $90,000 के नीचे फिसला, ट्रेड पॉलिसी और इंडस्ट्री संकट बने कारण

नई दिल्ली:
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मंगलवार को भारी गिरावट देखने को मिली, जहां Bitcoin की कीमत $90,000 के नीचे आ गई। यह मध्य नवंबर के बाद का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद आई रैली अब कमजोर पड़ गई है, जिसका प्रमुख कारण उनकी आक्रामक व्यापार नीतियां और उद्योग से जुड़ी समस्याएं बताई जा रही हैं।

Bitcoin में 7.6% की गिरावट

Bitcoin ने मंगलवार को 7.6% की भारी गिरावट दर्ज की और न्यूयॉर्क में सुबह 9:36 बजे के आसपास $88,800 पर ट्रेड कर रहा था। Bitcoin के साथ-साथ अन्य प्रमुख डिजिटल एसेट्स में भी गिरावट देखी गई।

  • Ether, XRP और Solana जैसी क्रिप्टोकरेंसी में भी तेज गिरावट आई।
  • शीर्ष टोकन्स को ट्रैक करने वाला एक इंडेक्स चार दिनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज कर रहा है।

Trump की नीतियों का असर

Bitcoin की यह गिरावट ट्रंप की नीतियों से जुड़ी अनिश्चितताओं और बाजार की जोखिम उठाने की क्षमता में आई कमी को दर्शाती है।

  • नवंबर में चुनाव जीतने के बाद, Bitcoin की कीमतों में उछाल देखा गया था।
  • लेकिन जनवरी में ट्रंप के शपथ ग्रहण के बाद, Bitcoin की कीमतों में लगभग 20% की गिरावट आई है।
  • उनकी व्यापारिक नीतियां और बढ़ती महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंता लगातार बनी हुई है।

क्रिप्टो बाजार पर बढ़ता दबाव

क्रिप्टो बाजार पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा था, और अब नई परिस्थितियों ने इसे और प्रभावित किया है।

  1. अमेरिका की व्यापार नीतियां: ट्रंप की आक्रामक टैरिफ (शुल्क) नीतियों ने वैश्विक निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है, जिससे क्रिप्टोकरेंसी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
  2. नियामकीय दबाव: विभिन्न देशों में क्रिप्टोकरेंसी पर नए नियम और सख्त नीतियां लागू हो रही हैं, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हो रही है।
  3. मुद्रास्फीति का असर: अमेरिका और अन्य बड़े बाजारों में बढ़ती महंगाई के कारण निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूर हो रहे हैं, जिससे Bitcoin समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी की मांग में गिरावट आ रही है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि Bitcoin आने वाले हफ्तों में $80,000 तक फिसल सकता है, अगर यह $90,000 के स्तर से ऊपर नहीं जाता। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बाजार इस गिरावट को पचा कर मार्च तक दोबारा स्थिरता हासिल कर सकता है।

क्रिप्टो बाजार इस समय नकारात्मक रुझानों से जूझ रहा है, जिसमें ट्रंप की व्यापार नीतियां, महंगाई और उद्योग में जारी चुनौतियां अहम भूमिका निभा रही हैं। निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अगले कुछ दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Stock Market Holiday 2025: महाशिवरात्रि के अवसर पर आज बंद रहेंगे NSE और BSE, जानिए पूरी जानकारी

नई दिल्ली:
भारतीय शेयर बाजार (NSE और BSE) आज महाशिवरात्रि के अवसर पर बंद रहेंगे। इस वजह से इक्विटी, डेरिवेटिव्स और अन्य सभी सेगमेंट में ट्रेडिंग पूरी तरह से निलंबित रहेगी।

पहली आधिकारिक ट्रेडिंग हॉलिडे

महाशिवरात्रि के कारण 2025 का यह पहला आधिकारिक स्टॉक मार्केट हॉलिडे है। इस साल, कुल 14 ट्रेडिंग हॉलिडे होंगे, जिसमें बाजार बंद रहेगा। इसका मतलब है कि निवेशकों को आज कोई भी सौदा करने का मौका नहीं मिलेगा, और सभी लेन-देन अगले कारोबारी दिन के लिए स्थगित रहेंगे।

कौन-कौन से मार्केट होंगे बंद?

आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) दोनों बंद रहेंगे। इस दौरान निम्नलिखित सेगमेंट्स में ट्रेडिंग नहीं होगी:

  • इक्विटी (Equity) बाजार
  • इक्विटी डेरिवेटिव्स (Equity Derivatives) बाजार
  • एसएलबी (SLB – Securities Lending and Borrowing) सेगमेंट
  • कमोडिटी डेरिवेटिव्स (Commodity Derivatives) बाजार
  • करेन्सी डेरिवेटिव्स (Currency Derivatives) बाजार

मार्केट हॉलिडे का असर

चूंकि आज कोई कारोबार नहीं होगा, इसका असर गुरुवार को बाजार खुलने पर देखने को मिल सकता है। निवेशकों और ट्रेडर्स को किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक या वैश्विक घटनाओं पर नज़र रखनी चाहिए, जो अगले कारोबारी दिन बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।

अगला स्टॉक मार्केट हॉलिडे कब होगा?

महाशिवरात्रि के बाद अगला स्टॉक मार्केट हॉलिडे होलिका दहन (Holi) के अवसर पर 14 मार्च 2025 को होगा। इस दिन भी शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहेगा।

निवेशकों के लिए क्या करें?

  • आज के बाजार अवकाश को ध्यान में रखते हुए, निवेशकों को अपनी ट्रेडिंग रणनीति पहले से प्लान करनी चाहिए।
  • जो भी सौदे लंबित हैं, वे अब अगले कारोबारी दिन पूरे होंगे।
  • किसी भी बड़ी आर्थिक घटना या वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखें, क्योंकि इसका असर गुरुवार को बाजार पर देखने को मिल सकता है।

अगर आप आज स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करने की योजना बना रहे थे, तो आपको गुरुवार तक इंतजार करना होगा। NSE और BSE के बंद रहने से निवेशक आज कोई सौदा नहीं कर पाएंगे। अब सभी की नजरें अगले कारोबारी सत्र पर टिकी होंगी, जहां बाजार की चाल तय होगी।

पूर्व इंटेल कार्यकारी राजा कोडुरी ने कंपनी की मौजूदा समस्याओं के लिए ‘PowerPoint Snakes’ को ठहराया जिम्मेदार

नई दिल्ली:
इंटेल के पूर्व मुख्य वास्तुकार और आर्किटेक्चर, ग्राफिक्स और सॉफ्टवेयर डिवीजन के कार्यकारी उपाध्यक्ष राजा कोडुरी ने हाल ही में X (पूर्व में ट्विटर) पर एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने इंटेल के मौजूदा संकट और इससे उबरने के रास्ते पर अपने विचार साझा किए हैं।

कोडुरी के अनुसार, इंटेल के पास असाधारण बौद्धिक संपदा (IP) और तकनीकी नवाचार हैं, लेकिन वे केवल “शेल्फ पर धूल खा रहे हैं” क्योंकि कंपनी की अत्यधिक नौकरशाही प्रक्रियाएं (bureaucratic processes) नवाचार को बाधित कर रही हैं।

‘PowerPoint Snakes’ ने इंजीनियरों को जकड़ रखा है

कोडुरी ने अपनी पोस्ट में ‘स्प्रेडशीट और PowerPoint Snakes’ का जिक्र किया है, जो उनके अनुसार कॉर्पोरेट निर्णय लेने की प्रक्रियाओं पर हावी हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रक्रियाएं क्वार्टरली लॉस को कम करने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, लेकिन बड़े दृष्टिकोण को पूरी तरह नजरअंदाज कर देती हैं।

उन्होंने लिखा, “ये प्रक्रियाएं बढ़ती जाती हैं और इंजीनियरों को जकड़ लेती हैं, जिससे वे उत्पाद रोडमैप पर काम करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।”

कोडुरी का कहना है कि इंटेल में एक ऐसा माहौल बना दिया गया है, जहां यदि कोई इंजीनियर पारंपरिक प्रक्रियाओं से बाहर जाकर कुछ नया करने की कोशिश करता है और विफल हो जाता है, तो उसे ‘PowerPoint Snakes’ की सजा भुगतनी पड़ती है।

उन्होंने आगे कहा, “इस माहौल ने पूरी इंजीनियरिंग टीम में ‘सीखी हुई असहायता’ (learned helplessness) को जन्म दिया है, जिससे वही नवाचार संस्कृति खत्म हो रही है जिसने कभी इंटेल को चोटी की कंपनी बनाया था।”

AI इमेज ने दिखाई इंटेल की हकीकत

कोडुरी के लेख के साथ एक AI-जनित छवि भी है, जिसमें एक इंटेल इंजीनियर को ‘PowerPoint Snakes’ से जकड़ा हुआ दिखाया गया है, जबकि एक कार्यकारी अधिकारी इसे देखते हुए मुस्कुरा रहा है। एक अन्य व्यक्ति, जिसके माथे पर ‘Zombies’ लिखा हुआ है, बैकग्राउंड में खड़ा नजर आता है।

“अराजकता को हावी होने दें, फिर उसे नियंत्रित करें”

अपने लेख में कोडुरी ने इंटेल के पूर्व CEO एंडी ग्रोव की बात को उद्धृत करते हुए लिखा, “अराजकता को हावी होने दें, फिर उसे नियंत्रित करें।” उनका मानना है कि इंटेल को अपनी पुरानी नौकरशाही प्रक्रियाओं को छोड़कर इंजीनियरों को स्वतंत्र रूप से नए उत्पाद विकसित करने का मौका देना चाहिए।

“आप तब तक नहीं सीखते जब तक आप शिप नहीं करते”

कोडुरी ने इंटेल की मौजूदा स्थिति को लेकर लिखा, “आप तब तक नहीं सीखते जब तक आप शिप नहीं करते।” यानी कंपनी जब तक अपने नवाचारों को बाज़ार में नहीं उतारेगी, तब तक वह आगे नहीं बढ़ पाएगी।

इंटेल के लिए आगे का रास्ता

इंटेल लंबे समय से एएमडी और एनवीडिया जैसी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। कोडुरी के अनुसार, अगर इंटेल को अपनी पुरानी प्रतिष्ठा वापस पानी है, तो उसे अपने इंजीनियरों को अधिक स्वतंत्रता देनी होगी और ‘PowerPoint Snakes’ से छुटकारा पाना होगा।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इंटेल इन आलोचनाओं से कोई सबक लेता है या नहीं।

क्या गोविंदा और सुनीता आहूजा ले रहे हैं तलाक? जानें रिपोर्ट्स क्या कहती हैं

नई दिल्ली:
बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा की शादी को 37 साल हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों के बीच तलाक की खबरें जोर पकड़ रही हैं।

अलग रह रहे हैं गोविंदा और सुनीता?

Zoom TV की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जोड़ा कुछ समय से अलग रह रहा है। हालांकि, गोविंदा और सुनीता आहूजा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोविंदा और सुनीता आहूजा की जीवनशैली में मतभेद इस दूरियों की एक वजह मानी जा रही है।

Bollywood Now की एक रिपोर्ट ने दावा किया कि गोविंदा की एक मराठी अभिनेत्री के साथ कथित नजदीकियां इस रिश्ते में खटास की वजह बनी हैं।

सुनीता आहूजा का बड़ा खुलासा

हाल ही में हिंदी रश (Hindi Rush) को दिए गए एक इंटरव्यू में सुनीता आहूजा ने अपनी और गोविंदा की अलग-अलग रहने की स्थिति पर खुलकर बात की।

उन्होंने कहा, “हमारे दो घर हैं। हमारे अपार्टमेंट के सामने एक बंगला है। मेरे लिए मेरा मंदिर और मेरे बच्चे ज्यादा जरूरी हैं, इसलिए मैं फ्लैट में रहती हूं। वहीं, गोविंदा देर रात तक बैठकों और गेट-टुगेदर में व्यस्त रहते हैं, इसलिए वो अपने बंगले में रहते हैं। उन्हें बातें करना पसंद है, वो दस लोगों को इकट्ठा करते हैं और उनसे बातचीत करते रहते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं, मेरा बेटा और मेरी बेटी फ्लैट में रहते हैं, लेकिन हम ज्यादा बातें नहीं करते। मुझे लगता है कि अगर आप बहुत ज्यादा बातें करते हैं, तो आप अपनी ऊर्जा बर्बाद कर देते हैं।”

तलाक की अटकलों पर क्या कहते हैं करीबी?

ETimes की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुनीता आहूजा ने कुछ महीने पहले गोविंदा को एक सेपरेशन नोटिस भेजा था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

वहीं, गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने ETimes से कहा, “कुछ पारिवारिक सदस्यों द्वारा दिए गए बयानों के कारण दंपति के बीच कुछ मुद्दे जरूर हैं। लेकिन मामला इससे ज्यादा गंभीर नहीं है। गोविंदा एक नई फिल्म शुरू करने की प्रक्रिया में हैं, इसलिए कलाकार उनके ऑफिस आ रहे हैं। हम इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।”

गोविंदा की रोमांटिक साइड पर सुनीता की प्रतिक्रिया

हिंदी रश के इंटरव्यू में जब गोविंदा की रोमांटिक साइड के बारे में पूछा गया तो सुनीता आहूजा हंस पड़ीं और कहा, “मैंने गोविंदा से कह दिया है कि अगले जन्म में वो मेरे पति ना बनें।”

उन्होंने आगे कहा, “उन्हें घूमना पसंद नहीं है। मैं ऐसी इंसान हूं, जो अपने पति के साथ बाहर घूमना और सड़क किनारे पानी-पूरी खाना पसंद करती है। लेकिन उन्होंने अपना पूरा समय सिर्फ काम में लगा दिया। मुझे याद भी नहीं कि हमने आखिरी बार कब साथ में कोई फिल्म देखी थी।”

गोविंदा और सुनीता की शादी

गोविंदा और सुनीता की शादी मार्च 1987 में हुई थी। हालांकि, इस शादी की घोषणा उन्होंने अपनी बेटी टीना (1988) के जन्म के बाद की थी। इसके बाद 1997 में उनके बेटे यशवर्धन का जन्म हुआ।

यूनिलीवर के सीईओ हेन शूमाकर पद से इस्तीफा देंगे, फर्नांडो फर्नांडेज़ लेंगे कमान

दिग्गज उपभोक्ता सामान कंपनी यूनिलीवर (Unilever) ने मंगलवार को घोषणा की कि इसके सीईओ हेन शूमाकर (Hein Schumacher) अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनकी जगह कंपनी के मौजूदा वित्त प्रमुख (CFO) फर्नांडो फर्नांडेज़ (Fernando Fernandez) को नया सीईओ बनाया जाएगा।

मार्च में पद छोड़ेंगे हेन शूमाकर

यूनिलीवर के मुताबिक, हेन शूमाकर मार्च में सीईओ का पद छोड़ देंगे और 31 मई तक कंपनी से पूरी तरह अलग हो जाएंगे। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका जाना आपसी सहमति से हो रहा है।

हेन शूमाकर जुलाई 2023 में यूनिलीवर के सीईओ बने थे। हालांकि, सिर्फ आठ महीने बाद ही उनके इस्तीफे की खबर आ गई। उनके कार्यकाल के दौरान कंपनी ने कई रणनीतिक बदलाव किए, लेकिन अब नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लिया गया है।

फर्नांडो फर्नांडेज़ होंगे नए सीईओ

यूनिलीवर के नए सीईओ के रूप में फर्नांडो फर्नांडेज़ को चुना गया है, जो वर्तमान में कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) के पद पर कार्यरत हैं।

फर्नांडो फर्नांडेज़ कंपनी के एक अनुभवी कार्यकारी हैं और वित्तीय मामलों में उनकी गहरी समझ है। उन्होंने यूनिलीवर में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया है और कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए उनकी रणनीति महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

यूनिलीवर के लिए बड़ा बदलाव

यूनिलीवर दुनिया की सबसे बड़ी उपभोक्ता वस्तु कंपनियों में से एक है, जिसके उत्पादों का उपयोग दुनियाभर में लाखों लोग करते हैं। कंपनी के इस बड़े नेतृत्व परिवर्तन पर उद्योग जगत की पैनी नजर है।

कंपनी की ओर से यह नहीं बताया गया कि शूमाकर के इस्तीफे के पीछे क्या वजहें हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यूनिलीवर के प्रदर्शन और रणनीतियों में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी।

यूनिलीवर का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी वैश्विक स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें बढ़ती लागत, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव और प्रतिस्पर्धा शामिल है।

अब देखना होगा कि फर्नांडो फर्नांडेज़ यूनिलीवर की नई रणनीति कैसे तय करते हैं और कंपनी को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।

बिटकॉइन 3 महीने के निचले स्तर पर गिरा, $90,000 से नीचे आया

बिटकॉइन रातोंरात $90,000 के स्तर से नीचे गिर गया, क्योंकि शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखा गया और क्रिप्टो बाजार अपने अगले बड़े कारक का इंतजार कर रहा है।

Coin Metrics के अनुसार, बिटकॉइन की कीमत 6% गिरकर $88,519 हो गई। इससे पहले, यह $87,736 के निचले स्तर तक पहुंच गया था।

यह गिरावट बिटकॉइन को अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से लगभग 20% नीचे ले जाती है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण के दिन दर्ज किया गया था।

Swan Bitcoin के हेड ऑफ प्राइवेट क्लाइंट्स और फैमिली ऑफिसेज, स्टीवन लुबका ने कहा, “पिछले हफ्ते शेयर बाजार ने कुछ कठिन सत्रों का सामना किया है, जहां शीर्ष प्रदर्शन करने वाले स्टॉक्स भी भारी गिरावट में रहे। इस अनिश्चितता का असर क्रिप्टो बाजारों पर भी पड़ा है… फिलहाल, कम समय में कोई बड़ा सकारात्मक कारक नहीं दिख रहा है, जिससे मुनाफावसूली और शॉर्ट सेलिंग का दबाव बढ़ रहा है।”

इस साल की शुरुआत में, बिटकॉइन ने तेज़ी दिखाई थी, क्योंकि नए ट्रंप प्रशासन से क्रिप्टो उद्योग के लिए सकारात्मक बदलाव की उम्मीद थी। हालांकि, जनवरी के अंत में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी किए गए क्रिप्टो पर कार्यकारी आदेश के बाद, जो अपेक्षा से कम कठोर था, बाजार को आगे देखने के लिए कोई नया कारण नहीं मिला है।

हालांकि, निवेशकों को अब भी उम्मीद है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियां क्रिप्टो के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद होंगी, लेकिन बिटकॉइन की कीमतें व्यापक आर्थिक रुझानों के आधार पर आगे बढ़ सकती हैं।

लुबका का मानना है कि बिटकॉइन इस गिरावट को पचा लेगा और मार्च के मध्य तक फिर से लंबी अवधि की बढ़त की ओर लौट सकता है।

$90,000 का स्तर वह निचला स्तर है, जिस पर बिटकॉइन नवंबर के अंत से कारोबार कर रहा था। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्तर महत्वपूर्ण रूप से टूटता है, तो बिटकॉइन $80,000 तक गिर सकता है।

अन्य क्रिप्टोकरेंसी की हालत और भी खराब रही। ईथर (Ether) और सोलाना (Solana) का SOL टोकन 9% गिर गया। CoinDesk 20 इंडेक्स के अनुसार, क्रिप्टोकरेंसी का व्यापक बाजार 8% से अधिक गिर गया।

टाटा इन्वेस्टमेंट के शेयर में 10% से ज्यादा की बढ़त, जानिए वजह टाटा कैपिटल के आईपीओ की घोषणा के बाद टाटा इन्वेस्टमेंट के शेयर में जोरदार उछाल

मंगलवार को टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कंपनी के शेयर 10% से अधिक बढ़कर इंट्राडे हाई 6,344 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गए। यह तेजी टाटा कैपिटल के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को मंजूरी मिलने के बाद आई, जिसमें टाटा इन्वेस्टमेंट की हिस्सेदारी है।

टाटा इन्वेस्टमेंट के शेयर का प्रदर्शन
वर्तमान में टाटा इन्वेस्टमेंट का शेयर 6,206.75 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा है, जो लगभग 8% की बढ़त को दर्शाता है। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 31,390 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। पिछले पांच दिनों में इस शेयर में लगभग 9% की तेजी आई है, जबकि मासिक आधार पर इसमें करीब 5% की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, अगर पूरे साल के प्रदर्शन की बात करें तो इस शेयर में 13% की गिरावट देखी गई है।

टाटा कैपिटल का आईपीओ: क्या है खास?
टाटा कैपिटल, जो टाटा सन्स के अंतर्गत एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) है, को अपने पब्लिक इश्यू के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। इस आईपीओ में 23 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, साथ ही कुछ मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ऑफर फॉर सेल भी शामिल होगा।

विश्लेषकों के अनुसार, टाटा कैपिटल के आईपीओ से टाटा इन्वेस्टमेंट को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है, क्योंकि कंपनी की टाटा कैपिटल में हिस्सेदारी है। निवेशकों की निगाहें अब इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ पर टिकी हैं, जो भारतीय वित्तीय बाजार में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में टाटा इन्वेस्टमेंट के शेयरों में और भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि निवेशक टाटा कैपिटल के आईपीओ से जुड़ी आगे की घोषणाओं का इंतजार कर रहे हैं।

भारत में मांस सुरक्षा: स्वच्छता और प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंताएं

नई दिल्ली: भारत में मांस और मांस उत्पादों की स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। हाल के वर्षों में, खाद्य प्रदूषण, असुरक्षित प्रसंस्करण और गुणवत्ता मानकों की कमी ने उपभोक्ताओं और उद्योग विशेषज्ञों के बीच बहस छेड़ दी है। स्वच्छ और सुरक्षित मांस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र कई उपाय कर रहे हैं, लेकिन चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

मांस सुरक्षा को लेकर प्रमुख चिंताएं

  1. संक्रमण और प्रदूषण
    भारत में मांस उत्पादन और वितरण प्रणाली में कई खामियां देखी गई हैं। अस्वच्छ कसाईखानों, खुले में मांस बिक्री और खराब कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं प्रदूषण और संक्रमण को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में ई. कोलाई, साल्मोनेला और लिस्टेरिया जैसे खतरनाक बैक्टीरिया के कारण खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बना रहता है।

  2. अवैध और अनियमित बूचड़खाने
    देश में कई बूचड़खाने बिना किसी सरकारी निगरानी के संचालित हो रहे हैं, जहां मांस की गुणवत्ता, स्वच्छता और पशु कल्याण पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। इन अवैध बूचड़खानों से मांस की ट्रेसबिलिटी (खोजने योग्य स्रोत) मुश्किल हो जाती है, जिससे उपभोक्ताओं तक असुरक्षित उत्पाद पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।

  3. खाद्य सुरक्षा मानकों का अभाव
    भारत में खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित नियम हैं, लेकिन कई विक्रेता और कसाई इनका पालन नहीं करतेअच्छी प्रैक्टिसेज की कमी, प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव और उपभोक्ता जागरूकता की कमी मांस सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सरकार और उद्योग की पहल

👉 FSSAI और स्थानीय प्रशासन मांस सुरक्षा को लेकर कड़े नियम लागू कर रहे हैं। कई राज्यों में अनियमित और अस्वच्छ बूचड़खानों को बंद किया गया है।

👉 “क्लीन, सेफ एंड रेडी” पहल के तहत सरकार स्वच्छ और प्रमाणित मांस बाजारों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है।

👉 ऑनलाइन मांस बिक्री प्लेटफॉर्म्स जैसे Licious और FreshToHome उपभोक्ताओं को क्वालिटी-अश्वस्त और स्वच्छ मांस उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक अपना रहे हैं।

✔ सर्टिफाइड दुकानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से ही मांस खरीदें।
✔ मांस को सही तापमान पर स्टोर करें और अच्छे से पकाकर खाएं।
✔ खुले बाजारों में मिलने वाले अनियमित मांस से बचें।

भारत में मांस की सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा बन गया है, लेकिन सरकार, उद्योग और उपभोक्ताओं की सतर्कता से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। साफ, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला मांस सुनिश्चित करने के लिए नियमों का सख्ती से पालन और उपभोक्ताओं की जागरूकता बेहद जरूरी है।

सेंसेक्स 750 अंक टूटा, निफ्टी 22,600 के नीचे; गिरावट के 4 बड़े कारण

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को लगातार पांचवें दिन गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 750 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 22,600 के नीचे फिसल गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी, अमेरिका में उपभोक्ता मांग में गिरावट और नए टैरिफ खतरे के कारण भारतीय बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा। सभी प्रमुख सेक्टरों में गिरावट देखी गई।

बाजार में भारी गिरावट

बीएसई सेंसेक्स 764.29 अंक (-1.01%) गिरकर 74,546.77 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 227.45 अंक (-1%) टूटकर 22,568.40 पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार में गिरावट के 4 प्रमुख कारण:

1. वैश्विक बाजारों में कमजोरी

अमेरिकी शेयर बाजार में हाल ही में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इससे वैश्विक निवेशकों में अस्थिरता बढ़ी और भारतीय बाजार में भी दबाव देखने को मिला।

2. अमेरिका में उपभोक्ता मांग में गिरावट

अमेरिका में उपभोक्ता मांग कमजोर होने के संकेत मिले हैं, जिससे निवेशकों को चिंता है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए भी यह एक नकारात्मक संकेत है।

3. टैरिफ को लेकर बढ़ती चिंता

अमेरिका द्वारा नए टैरिफ लगाए जाने की आशंका बनी हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखा गया।

4. बैंकिंग और आईटी सेक्टर में बिकवाली

बैंकिंग और आईटी सेक्टर में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। निवेशकों ने इन सेक्टरों में मुनाफावसूली की, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हो गई।

आगे क्या होगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को वैश्विक संकेतों और घरेलू कारकों पर नजर रखनी चाहिए। वहीं, आगामी महंगाई दर के आंकड़े और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे।

📉 बाजार में निवेश से पहले सतर्कता बरतें और लंबी अवधि के लिए मजबूत कंपनियों में निवेश करें।

परेश रावल ने की पुष्टि – पहले कार्तिक आर्यन को ‘हेरा फेरी 3’ के लिए किया गया था कास्ट, बताया क्या वह अक्षय कुमार को रिप्लेस कर रहे थे?

बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल, जिन्होंने ‘हेरा फेरी’ फ्रेंचाइज़ी में बाबूराव गणपतराव आपटे के किरदार से दर्शकों का दिल जीता, ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कार्तिक आर्यन के ‘हेरा फेरी 3’ से बाहर होने और ‘फिर हेरा फेरी’ के परिणाम से अपनी नाराजगी के बारे में खुलकर बात की।

कार्तिक आर्यन अब ‘हेरा फेरी 3’ का हिस्सा नहीं हैं – परेश रावल

इंटरव्यू के दौरान परेश रावल ने सिद्धार्थ कन्नन से बातचीत में इस बात की पुष्टि की कि कार्तिक आर्यन को शुरुआत में ‘हेरा फेरी 3’ के लिए साइन किया गया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या कार्तिक अक्षय कुमार के ‘राजू’ वाले किरदार को निभाने वाले थे, तो उन्होंने स्पष्ट किया,
“उस समय कहानी कुछ और थी। इसको राजू समझकर पकड़ के लाए थे, लेकिन यह किरदार बिल्कुल अलग था। यह मैं इसलिए कह सकता हूं क्योंकि मैंने भी पूरी स्क्रिप्ट नहीं सुनी थी।”

उन्होंने आगे कहा कि अब फिल्म की कहानी पूरी तरह बदल चुकी है और इसी कारण कार्तिक आर्यन अब फिल्म का हिस्सा नहीं हैं

परेश रावल ने ‘फिर हेरा फेरी’ पर जताई नाराजगी

जब परेश रावल से पूछा गया कि क्या वह ‘फिर हेरा फेरी’ के समय ओवरकॉन्फिडेंट हो गए थे, तो उन्होंने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा,
“मैं नहीं, बल्कि बाकी सभी लोग खुद को लेकर बहुत ज्यादा कॉन्फिडेंट हो गए थे। इसी वजह से फिल्म की मासूमियत खो गई। माफ कीजिए, लेकिन वो फिल्म ठीक से बनी ही नहीं थी।”

उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने फिल्म के निर्देशक नीरज वोरा को समझाने की कोशिश की थी कि,
“तू इस फिल्म को जरूरत से ज्यादा भर रहा है, यह जरूरी नहीं है। पहली फिल्म की तरह इसे सिंपल ही रखना चाहिए था। अगर ज्यादा चीजें जोड़ोगे तो मामला बिगड़ेगा। लोग हर चीज पर हंसेंगे, लेकिन हमें हर हाल में दर्शकों को हंसाने के लिए अनावश्यक चीजें नहीं डालनी चाहिए। फिल्म में एक संतुलन होना चाहिए।”

बाबूराव के किरदार की जबरदस्त लोकप्रियता

परेश रावल ने अपने बाबूराव के किरदार की शानदार फैन फॉलोइंग और इसकी बाजार में वैल्यू पर भी बात की। उन्होंने कहा कि,
“इस किरदार की लोकप्रियता और इसकी ब्रांड वैल्यू 500 करोड़ रुपये की है। लेकिन केवल पुराने मज़ाक को नए सेटअप में दोहराने का कोई मतलब नहीं है। लोग बाबूराव को एक नई जर्नी में देखना चाहते हैं।”

परेश रावल की आगामी फ़िल्में

परेश रावल के पास आने वाले समय में कई शानदार फिल्में हैं। वह जल्द ही अक्षय कुमार और तब्बू के साथ निर्देशक प्रियदर्शन की हॉरर-कॉमेडी ‘भूत बंगला’ में नजर आएंगे, जो 2 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

इसके अलावा, वह मल्टी-स्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ में भी दिखाई देंगे। इस फिल्म में अक्षय कुमार, रवीना टंडन, जैकलीन फर्नांडीज़ और कई बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में होंगे।