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भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट: निवेशकों को 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में अप्रत्याशित गिरावट देखने को मिली, जब सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक टूटकर 80,300 के नीचे आ गया और निफ्टी 218.7 अंक गिरकर 23,980.15 पर बंद हुआ। इस भारी गिरावट ने बाजार में खलबली मचा दी, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।

इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 2025 में ब्याज दरों में कम कटौती का संकेत देना है। फेड की इस घोषणा ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों में बेचैनी फैल गई। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली हुई।

इस गिरावट के परिणामस्वरूप निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। यह एक ही दिन में निवेशकों के लिए बहुत बड़ी आर्थिक चोट है। सेंसेक्स की इस गिरावट में प्रमुख कंपनियों जैसे एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एसबीआई और एचसीएल टेक के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई।

घरेलू आईटी कंपनियों पर भी इसका भारी असर पड़ा, जो अमेरिकी बाजारों पर काफी निर्भर हैं। एलटीआई माइंडट्री, एमफैसिस, और विप्रो जैसे आईटी कंपनियों के शेयरों में 5% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही बैंकिंग सेक्टर में भी बड़ी बिकवाली हुई, जिसने सेंसेक्स और निफ्टी को नीचे खींच लिया।

बाजार की अस्थिरता का सूचकांक इंडिया VIX 5% बढ़कर 14.37 पर पहुंच गया। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में निवेशकों को सतर्क रहने और अपने निवेश पोर्टफोलियो की समीक्षा करने की जरूरत है।

बाजार की इस गिरावट के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए और बिना सोचे-समझे फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार की अस्थिरता के बावजूद, यह निवेशकों के लिए एक अवसर भी हो सकता है कि वे दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाएं और मजबूत कंपनियों के शेयर खरीदें।

इस घटना ने भारतीय शेयर बाजार को गहरे दबाव में डाल दिया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है, लेकिन यह निवेशकों के लिए एक सबक भी है कि वे अपने निवेश में सावधानी बरतें और बाजार की स्थितियों पर लगातार नजर रखें।

प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

नई दिल्ली: भारतीय संगीत जगत के महान तबला वादक उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का 73 वर्ष की आयु में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निधन हो गया। उनके असमय निधन की खबर से संगीत प्रेमियों और कलाकारों में शोक की लहर दौड़ गई है।

संगीत की दुनिया का चमकता सितारा

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन भारतीय शास्त्रीय संगीत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रख्यात कलाकारों में से एक थे। उन्होंने अपनी प्रतिभा से न केवल भारत में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय शास्त्रीय संगीत को एक नई पहचान दिलाई। उनका संगीत करियर कई दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने शास्त्रीय, फ्यूजन और पश्चिमी संगीत के साथ अपने प्रयोगों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

सम्मान और योगदान
  • उस्ताद ज़ाकिर हुसैन को उनके शानदार योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री (1988) और पद्म भूषण (2002) से सम्मानित किया गया था।
  • उन्होंने कई प्रतिष्ठित संगीतकारों के साथ भारत और विदेशों में प्रदर्शन किया।
  • उनकी विशेषता तबले की जटिल ताल और लय को सहजता से प्रस्तुत करना थी।
शोक संदेश और श्रद्धांजलि

उनके निधन की खबर के बाद संगीत और कला जगत की कई हस्तियों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा, “उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का योगदान भारतीय संगीत के इतिहास में अमिट रहेगा। उनके निधन से हमने एक महान कलाकार खो दिया।”
गायक एआर रहमान ने कहा, “उस्ताद जी की विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उनकी संगीत की धुनें हमारे दिलों में हमेशा गूंजती रहेंगी।”

यादगार विरासत

उस्ताद ज़ाकिर हुसैन का संगीत और उनकी कला को आने वाले समय में याद किया जाएगा। उनका योगदान केवल भारतीय संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने विश्व स्तर पर भारतीय संगीत का परचम लहराया।

उनका निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी संगीत साधना और जादुई तबले की थाप हमेशा जीवित रहेंगी।

Hamps Bio IPO Day 2: जानिए लेटेस्ट GMP, सब्सक्रिप्शन स्टेटस, लिस्टिंग डेट और अन्य जानकारी

Hamps Bio का SME IPO:
Hamps Bio का SME IPO दूसरे दिन भी निवेशकों के बीच चर्चा में है। यह IPO निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान कर रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो छोटे और मझोले उद्यम (SME) कंपनियों में निवेश करना चाहते हैं। यहां इस IPO से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:

लेटेस्ट GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम):

Hamps Bio के IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) तेजी दिखा रहा है। सूत्रों के अनुसार, GMP में बढ़त ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। वर्तमान में GMP कंपनी के शेयर के प्रति निवेशकों की रुचि और संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत देता है।

सब्सक्रिप्शन स्टेटस:

IPO के दूसरे दिन सब्सक्रिप्शन स्टेटस काफी सकारात्मक दिख रहा है। रिटेल और नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों (NII) की अच्छी भागीदारी देखी गई है। कई निवेशक इसे ओवरसब्सक्राइब होने की संभावना मान रहे हैं।

लिस्टिंग डेट:

Hamps Bio के शेयरों की लिस्टिंग की तारीख 21 दिसंबर 2024 को निर्धारित की गई है। शेयरों की लिस्टिंग NSE SME प्लेटफॉर्म पर होगी।

IPO का आकार और मूल्य बैंड:
  • इश्यू साइज: Hamps Bio IPO का कुल साइज 20 करोड़ रुपये के आसपास है।
  • प्राइस बैंड: प्रति शेयर प्राइस ₹100-₹120 के बीच रखा गया है।
  • लॉट साइज: निवेशक कम से कम 1 लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं, जिसमें 1000 शेयर होंगे।
कंपनी प्रोफाइल:

Hamps Bio एक उभरती हुई बायोटेक्नोलॉजी कंपनी है, जो हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस पर काम करती है। कंपनी का फोकस इनोवेशन और क्वालिटी पर है, जो इसे SME सेक्टर में एक मजबूत खिलाड़ी बनाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, Hamps Bio IPO लॉन्ग-टर्म के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति और बाजार की मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन करके ही फैसला लेना चाहिए।

कौन थे सुचिर बालाजी? पूर्व OpenAI शोधकर्ता जिन्होंने AI की कानूनी जटिलताओं को उजागर किया।

सुचिर बालाजी, OpenAI के पूर्व शोधकर्ता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की कानूनी और नैतिक चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित करने वाले प्रमुख व्यक्ति थे। उन्होंने AI के विकास में तेजी से बढ़ती कानूनी जटिलताओं और इनके संभावित खतरों पर गहन चर्चा शुरू की, जिससे यह विषय वैश्विक बहस का हिस्सा बन गया।

AI की कानूनी धुंध और सुचिर बालाजी की भूमिका

बालाजी ने AI तकनीक के उपयोग और दुरुपयोग के बीच की महीन रेखा पर जोर दिया। उनके अनुसार, AI का विस्तार इतना तेज़ी से हो रहा है कि कानून और नियामक इसे संभालने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने ऐसे कई उदाहरणों को उजागर किया, जहां AI तकनीक का उपयोग समाज में गहरे प्रभाव डाल सकता है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट नियमों का अभाव है।

उन्होंने चेतावनी दी कि AI का गलत इस्तेमाल व्यक्तिगत गोपनीयता, नैतिकता, और मानव अधिकारों पर गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। बालाजी ने यह भी बताया कि AI की कानूनी अस्पष्टता न केवल आम जनता के लिए, बल्कि डेवलपर्स और संगठनों के लिए भी समस्याएं खड़ी कर रही है।

AI की चुनौतियां जो बालाजी ने उजागर कीं
  1. डेटा गोपनीयता का उल्लंघन:
    बालाजी ने कहा कि AI के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े डेटा सेट अक्सर व्यक्तिगत जानकारी को उजागर करते हैं, जो गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
  2. भेदभाव और पक्षपात:
    AI एल्गोरिदम में अक्सर पूर्वाग्रह (bias) शामिल होता है, जो समाज में भेदभाव को और बढ़ावा दे सकता है। बालाजी ने इसे एक बड़ी चुनौती बताया।
  3. नियमों का अभाव:
    उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून AI की उन्नत क्षमताओं को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर AI के लिए स्पष्ट और सख्त नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया।
AI की नैतिकता पर उनकी चिंताएं

बालाजी AI के नैतिक आयामों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते थे। उन्होंने कहा कि AI की शक्ति इतनी बढ़ रही है कि इसका नियंत्रण खोने का जोखिम हमेशा बना रहता है। उन्होंने AI के प्रयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही, और नैतिकता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने की वकालत की।

सुचिर बालाजी का योगदान और विरासत

OpenAI में अपने कार्यकाल के दौरान, बालाजी ने AI के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेकिन उनकी सबसे बड़ी विरासत AI के कानूनी और नैतिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाने की रही। उन्होंने डेवलपर्स, सरकारों, और आम जनता से अपील की कि वे AI के जिम्मेदार उपयोग के लिए मिलकर काम करें।

सुचिर बालाजी ने अपनी आलोचनात्मक दृष्टि और तर्कों से AI की दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या तकनीकी प्रगति मानवता के लिए हमेशा फायदेमंद होगी। उनके विचार आज भी AI की नैतिकता और कानूनी ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों में मार्गदर्शक हैं।

सुचिर बालाजी ने AI के संभावित खतरों और इसके जिम्मेदार उपयोग के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित किया। उनकी चेतावनियां और सुझाव AI के भविष्य को सही दिशा में ले जाने के लिए मील का पत्थर साबित हो सकते हैं। AI के क्षेत्र में उनकी दृष्टि और योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है: पूर्व राष्ट्रपति कोविंद

पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक क्रांतिकारी पहल करार दिया है। एजेंडा आजतक 2024 के पहले दिन कोविंद ने इस विचार पर चर्चा करते हुए इसके संभावित लाभों और इसके कार्यान्वयन से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला।

क्या है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’?

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुख्य उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ आयोजित करना है। वर्तमान में, देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं, जिससे बार-बार चुनावी खर्च, प्रशासनिक बाधाएं और विकास कार्यों में रुकावटें आती हैं।

कोविंद ने कहा कि यह नीति न केवल आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद होगी, बल्कि इससे देश की प्रशासनिक प्रणाली में स्थिरता आएगी। बार-बार आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।

लाभ जो इसे गेम चेंजर बना सकते हैं

  1. चुनावी खर्च में कमी:
    बार-बार चुनाव कराना सरकारी खजाने पर भारी बोझ डालता है। एक साथ चुनाव होने से यह खर्च काफी हद तक कम हो सकता है।
  2. स्थिरता और सुचारु शासन:
    कोविंद ने बताया कि बार-बार चुनावी गतिविधियां प्रशासन और शासन में बाधा डालती हैं। इस मॉडल को अपनाने से सरकारें विकास और नीतियों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।
  3. जनता और प्रशासन को राहत:
    चुनावों के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भारी दबाव होता है। एक साथ चुनाव होने से जनता और प्रशासन दोनों को राहत मिलेगी।

हालांकि, यह पहल जितनी फायदेमंद दिखती है, उतनी ही चुनौतियों से भरी भी है। देश में विविधता, राजनीतिक दलों की सहमति और संवैधानिक बदलाव इस योजना की राह में प्रमुख बाधाएं हैं। कोविंद ने जोर देकर कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए व्यापक विचार-विमर्श और राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी।

इसके अलावा, कोविंद ने बताया कि इस पहल को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना होगा। राज्यों और केंद्र के बीच तालमेल को मजबूत बनाना इस प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होगा।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विचार पर चर्चा करते हुए कोविंद ने इसे भारतीय लोकतंत्र को एक नई दिशा देने वाला कदम बताया। उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक पहल नहीं, बल्कि जनता के हित में एक दूरदर्शी निर्णय करार दिया।

यह विचार न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि यह भारत को विश्व के सामने एक संगठित और सशक्त राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करेगा। हालांकि इसे लागू करने में समय और संसाधन लगेंगे, लेकिन अगर यह सफल होता है, तो भारतीय लोकतंत्र के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के माध्यम से भारत एक नई शुरुआत की ओर बढ़ सकता है। इसके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों के बावजूद, इसका लाभ लंबे समय में देश और जनता को मिलेगा। पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की यह दृष्टि भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट आईपीओ: पहले दिन 4% सब्सक्रिप्शन, रिटेल निवेशकों का अच्छा रिस्पॉन्स

इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (IGI) के आईपीओ ने पहले दिन 13 दिसंबर को 4% सब्सक्रिप्शन हासिल किया। रिटेल निवेशकों ने इसमें खास रुचि दिखाई, जहां इस श्रेणी में 17% शेयर सब्सक्राइब हुए।

IPO की खास बातें:

  • इश्यू साइज: ₹4,225 करोड़
  • एंकर निवेशकों से राशि: ₹1,900 करोड़ (एक दिन पहले जुटाई गई)
  • बोली लगाई गई कुल शेयर: 22.28 लाख
  • कुल ऑफर किए गए शेयर: 5.85 करोड़

एनएसई पर सुबह 11:06 बजे तक उपलब्ध डेटा के अनुसार, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की श्रेणी में 3% सब्सक्रिप्शन देखा गया।

आईपीओ की समयसीमा

  • अलॉटमेंट की तारीख: 18 दिसंबर 2024
  • लिस्टिंग की तारीख: 20 दिसंबर 2024
  • स्टॉक एक्सचेंज: बीएसई और एनएसई

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP)

आईजीआई के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। हालांकि, इसका सटीक आंकड़ा अपडेट किया जा रहा है।

बैकग्राउंड:
ब्लैकस्टोन समर्थित डायमंड ग्रेडिंग कंपनी इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (इंडिया) लिमिटेड ने इस आईपीओ के जरिए निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।

निवेशकों के लिए मौका:
यह तीन दिवसीय आईपीओ 15 दिसंबर तक खुला रहेगा, जो निवेशकों को उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।

इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (IGI) के आईपीओ ने पहले दिन 13 दिसंबर को 4% सब्सक्रिप्शन हासिल किया। रिटेल निवेशकों ने इसमें खास रुचि दिखाई, जहां इस श्रेणी में 17% शेयर सब्सक्राइब हुए।

IPO की खास बातें:

  • इश्यू साइज: ₹4,225 करोड़
  • एंकर निवेशकों से राशि: ₹1,900 करोड़ (एक दिन पहले जुटाई गई)
  • बोली लगाई गई कुल शेयर: 22.28 लाख
  • कुल ऑफर किए गए शेयर: 5.85 करोड़

एनएसई पर सुबह 11:06 बजे तक उपलब्ध डेटा के अनुसार, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की श्रेणी में 3% सब्सक्रिप्शन देखा गया।

आईपीओ की समयसीमा

  • अलॉटमेंट की तारीख: 18 दिसंबर 2024
  • लिस्टिंग की तारीख: 20 दिसंबर 2024
  • स्टॉक एक्सचेंज: बीएसई और एनएसई

ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP)

आईजीआई के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) में भी निवेशकों की रुचि बनी हुई है। हालांकि, इसका सटीक आंकड़ा अपडेट किया जा रहा है।

बैकग्राउंड:
ब्लैकस्टोन समर्थित डायमंड ग्रेडिंग कंपनी इंटरनेशनल जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (इंडिया) लिमिटेड ने इस आईपीओ के जरिए निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है।

यह तीन दिवसीय आईपीओ 15 दिसंबर तक खुला रहेगा, जो निवेशकों को उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों में भागीदारी का अवसर प्रदान करता है।

गुकेश: चौथी कक्षा में स्कूल छोड़ा, बिना प्रायोजक, पिता ने नौकरी छोड़ी, मां बनीं एकमात्र कमाने वाली: सबसे युवा विश्व चैंपियन की कहानी

भारतीय शतरंज खिलाड़ी डी. गुकेश का जीवन संघर्ष और बलिदान की मिसाल है। मात्र सात साल की उम्र में विश्व चैंपियन बनने का सपना देखने वाले गुकेश ने महज 11 साल में यह सपना सच कर दिखाया। 18 साल की उम्र में सबसे युवा विश्व चैंपियन बनने वाले गुकेश ने चीन के मौजूदा चैंपियन डिंग लिरेन को 14 मैचों की मैराथन में हराया और विश्वनाथन आनंद के बाद यह खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय बने।

यह जीत न केवल गुकेश के लिए, बल्कि उनके माता-पिता के लिए भी अविस्मरणीय थी। उनके पिता डॉ. रजनीकांत, जो एक प्रतिष्ठित ईएनटी सर्जन थे, ने अपने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी। वहीं उनकी मां पद्मा, जो एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट हैं, परिवार की एकमात्र कमाने वाली बन गईं।

बलिदान और संघर्ष की कहानी

गुकेश का शतरंज का सफर आसान नहीं था। उनके पिता ने 2017-18 में प्रैक्टिस बंद कर दी और बेटे के साथ दुनिया भर में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए सीमित बजट पर सफर किया। इस दौरान, उनकी मां ने घर की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालीं।

गुकेश ने कहा, “हम आर्थिक रूप से बहुत मजबूत नहीं थे, लेकिन उस समय मुझे इसका अहसास नहीं था। 2017 और 2018 में स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि मेरे माता-पिता के दोस्तों ने मेरी मदद की। मेरे माता-पिता ने मेरे लिए कई तरह के बदलाव किए और सबसे ज्यादा बलिदान दिए।”

गुकेश ने चौथी कक्षा के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया ताकि वे शतरंज पर पूरा ध्यान दे सकें। 2013 में, जब विश्वनाथन आनंद ने अपना विश्व खिताब मैग्नस कार्लसन के खिलाफ गंवाया था, तब गुकेश ने सप्ताह में तीन बार एक घंटे की शतरंज कक्षाओं से शुरुआत की।

शुरुआती सफलता और चढ़ाई

गुकेश ने अपनी पहली बड़ी जीत 2018 में एशियन स्कूल चैंपियनशिप और वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप (अंडर-12) में गोल्ड मेडल के रूप में दर्ज की। 2019 में, नई दिल्ली में आयोजित एक प्रतियोगिता के दौरान, उन्होंने इतिहास रचते हुए दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंडमास्टर का खिताब जीता।

हालांकि, इस सफर में गुकेश को प्रायोजकों का अभाव झेलना पड़ा। उनकी ज्यादातर आर्थिक जरूरतें पुरस्कार राशि और माता-पिता की क्राउड-फंडिंग के जरिए पूरी हुईं। लेकिन इन सभी चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपने आदर्श विश्वनाथन आनंद को पीछे छोड़ते हुए भारत के नंबर-1 खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।

आनंद से मिली दिशा

गुकेश की किस्मत तब चमकी, जब वेस्टब्रिज-आनंद चेस अकादमी, जो 2020 में COVID-19 महामारी के दौरान शुरू हुई थी, में उन्हें आनंद से प्रशिक्षण लेने का मौका मिला। इस अकादमी ने गुकेश को उनके खेल में सुधार करने और नई ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद की।

गुकेश ने अपने माता-पिता के समर्थन और अपने दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया कि कठिनाइयों के बावजूद, अगर जुनून और मेहनत हो, तो कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।

पुष्पा 2 बॉक्स ऑफिस डे 7: अल्लू अर्जुन की फिल्म 1,000 करोड़ की दौड़ के बाद भी अजेय

अल्लू अर्जुन और निर्देशक सुकुमार की फिल्म पुष्पा 2: द रूल बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। सात दिनों में, फिल्म ने दुनिया भर में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है और यह शानदार प्रदर्शन जारी है। ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार, दूसरे वीकेंड में फिल्म की कमाई में और वृद्धि होने की संभावना है। 11 दिसंबर को पुष्पा 2 ने थिएटर्स में अपना एक हफ्ता पूरा किया और एक के बाद एक बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड तोड़ दिए।

सातवें दिन का कलेक्शन

फिल्म, जो 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी, ने 11 दिसंबर को भारत में लगभग 42 करोड़ रुपये नेट कमाए। हालांकि यह छठे दिन की कमाई से कम है, लेकिन यह एक वर्किंग डे के लिए अभी भी एक अच्छा आंकड़ा है।

हिंदी संस्करण ने 30 करोड़ रुपये नेट कमाए, जबकि तेलुगु संस्करण ने 9 करोड़ रुपये नेट और तमिल संस्करण ने 2 करोड़ रुपये नेट सातवें दिन भारत में कमाए।

सात दिनों का कुल कलेक्शन

पुष्पा 2 का सात दिनों का भारत में कुल कलेक्शन अब 687 करोड़ रुपये नेट तक पहुंच गया है, जिसमें हिंदी संस्करण ने कुल 389.1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। तेलुगु और तमिल संस्करणों ने क्रमशः 232.75 करोड़ रुपये और 39 करोड़ रुपये कमाए हैं।

भारत में दिनवार कलेक्शन

  • डे 0: 10.65 करोड़ रुपये (प्रीमियर शो से)
  • डे 1: 164.25 करोड़ रुपये
  • डे 2: 93.8 करोड़ रुपये
  • डे 3: 119.25 करोड़ रुपये
  • डे 4: 141.05 करोड़ रुपये
  • डे 5: 64.5 करोड़ रुपये
  • डे 6: 52.50 करोड़ रुपये
  • डे 7: 42 करोड़ रुपये

कुल: 687 करोड़ रुपये

डोनाल्ड ट्रंप की चुनावी जीत के बाद एलन मस्क की संपत्ति में जबरदस्त इजाफा।

टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने हाल ही में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की आश्चर्यजनक जीत के बाद अपनी संपत्ति में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, मस्क की संपत्ति में यह उछाल कई कारणों से जुड़ा हुआ है, जो बाजार के लिए सकारात्मक साबित हो रहे हैं।

मस्क की संपत्ति में वृद्धि के प्रमुख कारण

  1. टेक सेक्टर में बाजार का विश्वास: ट्रंप प्रशासन ने आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहित करने वाली नीतियों का वादा किया है, जिससे टेक उद्योग में निवेशकों का विश्वास बढ़ा है। टेस्ला के शेयर, जो मस्क की संपत्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, निवेशकों की उम्मीदों के चलते बढ़े हैं।
  2. स्पेसएक्स की बढ़ती वैल्यूएशन: वाणिज्यिक अंतरिक्ष अन्वेषण और उपग्रह लॉन्च में स्पेसएक्स की प्रगति ने निवेश को आकर्षित किया है, जिससे मस्क की संपत्ति और बढ़ी है। अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रम को बढ़ावा देने पर ट्रंप के जोर से स्पेसएक्स की संभावित वृद्धि को बल मिल सकता है।
  3. बाजार की व्यापक प्रवृत्तियां: बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद शेयर बाजार में अक्सर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। हाल के चुनाव परिणामों ने उन विशेष क्षेत्रों में रैली शुरू की है, जिनमें स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीक शामिल हैं, जहां मस्क की कंपनियां अग्रणी हैं।

मस्क की संपत्ति पर प्रभाव

वर्तमान में, एलन मस्क की संपत्ति में कई अरब डॉलर की वृद्धि का अनुमान है, जिससे वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में अपनी जगह पक्की कर रहे हैं। टेस्ला के शेयर रिकॉर्ड ऊंचाई पर ट्रेड कर रहे हैं और स्पेसएक्स की वैल्यूएशन लगातार बढ़ रही है, जिससे मस्क की वित्तीय प्रगति आशाजनक लग रही है।

निवेशकों के लिए इसका मतलब

चुनावी परिणामों के बाद बाजार की प्रवृत्तियां यह बताती हैं कि नीतिगत बदलावों और उनके हाई-ग्रोथ सेक्टर्स पर प्रभाव को समझना महत्वपूर्ण है। मस्क की बढ़ती संपत्ति इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतरिक्ष तकनीक में अवसरों को रेखांकित करती है।

भविष्य की संभावनाएं

हालांकि राजनीतिक परिदृश्य गतिशील बना हुआ है, एलन मस्क की नवीन परियोजनाएं मजबूत गति बनाए रखेंगी। जैसे-जैसे वैश्विक बाजार ट्रंप प्रशासन की नीतियों के अनुरूप ढलते हैं, निवेशक टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रदर्शन पर करीब से नजर रखेंगे।

विजय केडिया ने ₹25 करोड़ में ग्रीव्स कॉटन में 0.52% हिस्सेदारी खरीदी।

प्रसिद्ध निवेशक विजय केडिया ने सोमवार को ग्रीव्स कॉटन के 12 लाख शेयर ब्लॉक डील के माध्यम से खरीदे, जो कंपनी की 0.52% हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करता है। केडिया ने अपनी कंपनी केडिया सिक्योरिटीज के माध्यम से ₹208.87 प्रति शेयर के औसत मूल्य पर कुल ₹25 करोड़ में यह निवेश किया। यह उनका ग्रीव्स कॉटन में पहला दांव हो सकता है।

ग्रीव्स कॉटन के शेयर सोमवार को 8% तक उछलकर एनएसई पर ₹215 के 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। इस ब्लॉक डील के कारण शेयरों के लेनदेन में भी भारी इजाफा हुआ, जो एक करोड़ से अधिक हो गया। यह पिछले छह महीनों में औसत 36 लाख शेयरों की तुलना में काफी अधिक है। ग्रीव्स कॉटन के शेयरों ने 2024 में अब तक 40% से अधिक की तेजी दिखाई है, जबकि इसी अवधि में निफ्टी50 ने 13% का लाभ दर्ज किया है।

इसके अतिरिक्त, दिसंबर तिमाही में डायमेंशनल फंड एडवाइजर्स, सुंदरम एसेट मैनेजमेंट कंपनी, और मोतिलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट जैसे फंड हाउसों ने भी कंपनी के शेयर खरीदे, ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार।

दिलचस्प बात यह है कि केडिया द्वारा ग्रीव्स कॉटन में निवेश कंपनी की इलेक्ट्रिक वाहन यूनिट की प्रस्तावित लिस्टिंग से पहले किया गया है। दिसंबर के पहले हफ्ते में, ग्रीव्स कॉटन के बोर्ड ने अपनी सहायक कंपनी ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड (GEML) की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) को मंजूरी दी। इस IPO में इक्विटी शेयरों का फ्रेश इश्यू और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा बिक्री प्रस्ताव शामिल हैं।

GEML, जो अन्य स्थापित खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, FY25 और FY26 में क्रमशः 7% और 14% की राजस्व वृद्धि हासिल करने की उम्मीद है।

ग्रीव्स कॉटन ने FY24 में ₹135.3 करोड़ का शुद्ध नुकसान दर्ज किया, जबकि FY23 में ₹78 करोड़ का मुनाफा कमाया था। कंपनी का शुद्ध राजस्व 2.5% घटकर ₹2,633 करोड़ हो गया। हालांकि, FY25 की पहली छमाही में कंपनी ने ₹13.5 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया। सोमवार के क्लोजिंग के अनुसार, कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹4,957 करोड़ है।

ग्रीव्स कॉटन आंतरिक दहन इंजन, पावर जनरेशन उपकरण और पावर ट्रांसमिशन सिस्टम का निर्माण करती है। कंपनी खनन, तेल क्षेत्र, निर्माण और सामग्री प्रबंधन उपकरण, एकीकृत प्रणालियां और इलेक्ट्रॉनिक्स भी बनाती है। इसके अलावा, ग्रीव्स कॉटन तिपहिया ऑटो रिक्शा, पॉलिमर और रेजिन जैसे उत्पाद भी निर्मित करती है।