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 ब्रिक्स: रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में 40 अरब डॉलर का व्यापार किया, डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को बढ़ावा दिया

 ब्रिक्स: रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में 40 अरब डॉलर का व्यापार किया, डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को बढ़ावा दिया

परिचय:

ब्रिक्स देशों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिका के प्रभुत्व को कम करने के लिए डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को तेज किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में 40 अरब डॉलर के व्यापार का निपटान किया है। यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और यह दिखाता है कि ब्रिक्स देश अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

मुख्य बिंदु:

  • रूस और भारत के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान 2023 की पहली छमाही में 40 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
  • यह दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार के आधे से अधिक है।
  • यह डी-डॉलरीकरण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रूस और भारत का व्यापार:

रूस और भारत के बीच व्यापार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। 2022 में, दोनों देशों के बीच व्यापार 33.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2021 की तुलना में 50% अधिक है।

रूस और भारत के बीच व्यापार में वृद्धि के कई कारण हैं। इनमें से एक कारण यह है कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदार हैं। रूस भारत को ऊर्जा और रक्षा उपकरणों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, जबकि भारत रूस को कृषि उत्पादों और औद्योगिक उपकरणों का निर्यात करता है।

दूसरा कारण यह है कि दोनों देश ब्रिक्स के सदस्य हैं। ब्रिक्स देशों ने वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अमेरिका के प्रभुत्व को कम करने के लिए डी-डॉलरीकरण के प्रयासों को तेज किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, रूस और भारत ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान किया है।

रूस-भारत का उपयोग:

रूस ने अपने बढ़ते आयात उपायों को भारत के साथ व्यापार के अवसरों में वृद्धि के रूप में पहचाना है। इसके अलावा, रूस से भारत में निर्यात भी दोगुने से अधिक हो गया है। इसमें भारतीय बाजार में रूसी उत्पादों की बढ़ती मांग और विपणि संबंधों में वृद्धि शामिल है।

भारत के लिए, रूस एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता है। भारत अपने ऊर्जा आयात का लगभग 20% रूस से आयात करता है। रूस से आयातित ऊर्जा भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।

ब्रिक्स के साथ भविष्य:

ब्रिक्स संघ का उद्दीपन विश्व में बदल रहे दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिससे इसके सदस्य देश एक नए और सकारात्मक वित्तीय विवेचन में आ रहे हैं। इस बदलते संदर्भ में, पश्चिमी देशों के प्रभाव को कम करने के लिए ब्रिक्स ने डी-डॉलरीकरण की योजना को बढ़ावा दिया है। यहां तक कि इसने नए सदस्यों को संघ में शामिल करने का भी एलान किया है।

ब्रिक्स देशों का मानना है कि डी-डॉलरीकरण वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर और न्यायसंगत बना देगा। यह उन्हें अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने और अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने में भी मदद करेगा।

रूस और भारत के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह डी-डॉलरीकरण के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दिखाता है कि ब्रिक्स देश अपनी आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

विशिष्ट जानकारी:

  • रूस और भारत के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार का निपटान कैसे किया जाता है?
  • रूस और भारत के बीच व्यापार में वृद्धि के लिए क्या संभावनाएं हैं?
  • डी-डॉलरीकरण से विश्व व्यापार को कैसे प्रभावित करेगा?
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