कोरोना महामारी का भयानक दौर अभी बीता भी नहीं है कि दुनियाभर में डिजीज एक्स (Disease X) के खतरे की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। यह शब्द किसी विशिष्ट बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह उस अज्ञात संक्रमण या बीमारी को दर्शाता है, जिसके बारे में अभी तक किसी को कोई जानकारी नहीं है। वैज्ञानिकों का मानना है कि डिजीज एक्स भविष्य में महामारी का रूप ले सकता है और 5 करोड़ से भी अधिक लोगों की जान ले सकता है। आइए जानते हैं कि क्या है डिजीज एक्स, इसके फैलने की आशंका क्यों है और वैज्ञानिक किस तरह से इस संभावित खतरे का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।
डिजीज एक्स और इसकी उत्पत्ति : एक अनदेखा दुश्मन
डिजीज एक्स किसी भी जीव – वायरस, बैक्टीरिया, फंगस – के कारण हो सकता है जो अभी तक मानव रोग का कारक नहीं पाया गया है। संभावना है कि यह पहले से विद्यमान कोई अज्ञात वायरस, किसी जानवर से मानव में संक्रमित होने वाला नया वायरस, या फिर किसी मौजूदा वायरस में होने वाला उत्परिवर्तन हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस तरह की संभावित महामारी के लिए अग्रिम तैयारी करने के उद्देश्य से डिजीज एक्स जैसे अज्ञात रोगों की एक लिस्ट तैयार की है।
डिजीज एक्स के खतरे का आकलन : विनाशकारी संभावनाएं
वैज्ञानिकों का मानना है कि डिजीज एक्स कोरोना जैसी ही संक्रामक, लेकिन ज्यादा घातक हो सकता है। इसे स्पेनिश फ्लू जैसी भयानक महामारी का रूप लेने की आशंका है, जिसने लगभग 5 करोड़ लोगों की जान ले ली थी। यह तीव्र गति से फैल सकता है और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य प्रणालियों को पंगु बना सकता है।
वैज्ञानिक तैयारी : अज्ञात का मुकाबला करने की रणनीतियां
डिजीज एक्स जैसे अज्ञात खतरे से निपटने के लिए वैज्ञानिक कई स्तरों पर तैयारी कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
- जीनोम सीक्वेंसिंग और रोग पहचान : नए माइक्रोबों की जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए तेजी से पहचान और उसके आनुवंशिक कोड का अध्ययन करना।
- वैक्सीन विकास : नई महामारी की आशंका को देखते हुए वायरस के फैलने की गति से तेज वैक्सीन विकास पर शोध।
- दवाइयों का परीक्षण : पहले से मौजूद एंटीवायरल और एंटीबायोटिक दवाओं का परीक्षण करके यह पता लगाना कि क्या वे डिजीज एक्स के इलाज में प्रभावी हो सकती हैं।
- जानवरों और मानवों में निगरानी : नए वायरस के उद्भव पर नजर रखने के लिए जंगली जानवरों और मनुष्यों में नियमित निगरानी प्रणाली स्थापित करना।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग : सूचना, डेटा और अनुसंधान का आदान-प्रदान करने के लिए विश्व स्तर पर स्वास्थ्य संगठनों और देशों का आपसी सहयोग बढ़ाना।
भारत में तैयारी : सतर्कता का समय
भारत सरकार भी डिजीज एक्स जैसे संभावित खतरों को लेकर सतर्क है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) और अन्य शोध संस्थान इस दिशा में लगातार शोध कर रहे हैं। साथ ही, देश के स्वास्थ्य प्रणालियों को अपग्रेड करने और संक्रामक रोगों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
