पिछले साल अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के एक साल बाद, अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने उस तूफान से निकले सबक और मजबूती के अनुभव को साझा किया है। हिंडनबर्ग ने कंपनी पर धोखाधड़ी और शेयर मूल्य हेरफेर के आरोप लगाए थे, जिनका समूह लगातार खंडन करता रहा है। इस विवाद की वजह से कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब एक साल बाद स्थिति अलग है।
एक प्रमुख मीडिया आउटलेट को दिए साक्षात्कार में, अडानी ने कहा, “हिंडनबर्ग का प्रकरण निस्संदेह कठिन रहा, लेकिन इसने हमें मूल्यवान सबक दिए और हमें मजबूत बनाया है। हमने अपनी प्रक्रियाओं की कमी की समीक्षा की है, बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस अपनाया है, और अपने निवेशकों के साथ संचार को बढ़ाया है। परिणामस्वरूप, हमारा कर्ज घटा है, हमने नए निवेशक आकर्षित किए हैं, और महत्वपूर्ण परियोजनाएं हासिल की हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम हिंडनबर्ग के आरोपों का दृढ़ता से खंडन करते हैं और सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर उनसे लड़ेंगे। लेकिन सच्चाई अंततः सामने आएगी। इस अनुभव ने हमें अधिक कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है।”
विवाद की समीक्षा:
2023 जनवरी में, हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें अडानी समूह पर वित्तीय हेरफेर, अत्यधिक कर्ज और अनाचार के आरोप लगाए गए थे। रिपोर्ट ने कंपनी के शेयरों की कीमत में भारी गिरावट का कारण बना, और निवेशकों और विनियामकों की चिंता को जन्म दिया। अडानी समूह ने सभी आरोपों का खंडन किया और निवेशकों का विश्वास वापस पाने के लिए कदम उठाए।
विवाद के नतीजे:
विवाद के बावजूद, अडानी समूह ने पिछले एक साल में कई सकारात्मक कदम उठाए हैं। कंपनी ने कर्ज कम किया है, नये निवेशकों को आकर्षित किया है, और कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को जीता है। इसके अलावा, कंपनी ने कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रथाओं को मजबूत किया है और निवेशकों के साथ संचार को बेहतर बनाया है।
विवाद के भविष्य:
हिंडनबर्ग का विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। अडानी समूह ने कानूनी कार्रवाई की धमकी दी है, और यह संभावना है कि विवाद आने वाले महीनों और वर्षों तक चल सकता है। हालांकि, विवाद के बावजूद, ऐसा लगता है कि अडानी समूह मजबूत होकर उभरा है और यह आने वाले समय में भी भारत के आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।



