इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास रच दिया है। लगातार सातवें वर्ष भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में भारत के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव हासिल कर, इंदौर ने स्वच्छता की अपनी गौरवमयी परंपरा को और मजबूत कर दिया है। इस जीत ने न केवल इंदौरवासियों को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण स्थापित किया है।
6,27,459 अंकों के शानदार स्कोर के साथ, इंदौर ने दूसरे स्थान पर रहे ग्रेटर नोएडा को मीलों पीछे छोड़ दिया। यह अंतर स्वच्छता के प्रति इंदौर के अथक प्रयासों और सातत्यपूर्ण प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मेयर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने शहरवासियों को इस अविश्वसनीय उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा, “यह जीत सात सालों तक हमारे कड़े परिश्रम और दृढ़ संकल्प का फल है। इंदौर अब स्वच्छता के मानक को परिभाषित करता है, यह हमारे जुनून और सतत प्रयासों का प्रमाण है।”
इंदौर की स्वच्छता यात्रा सिर्फ सफाई अभियानों से आगे निकलकर एक जन आंदोलन बन चुकी है। शहर के हर नुक्कड़ पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लोगों को कचरा प्रबंधन के महत्व के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। घर-घर कचरा संग्रहण की सुव्यवस्थित प्रणाली सुनिश्चित करती है कि हर गली, हर मोहल्ला साफ-सुथरा रहे। आधुनिक कूड़े के निपटान संयंत्रों और रिसाइक्लिंग इकाइयों ने इंदौर को एक मॉडल सिटी बना दिया है।
सार्वजनिक स्वच्छता के प्रति समर्पण भी इंदौर की सफलता का एक प्रमुख कारक है। शहर में सार्वजनिक शौचालयों की व्यापक उपलब्धता ने खुले में शौच मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इंदौर का स्वच्छता मॉडल न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व के लिए प्रकाशस्तंभ बन चुका है। 2020 में स्वच्छ सर्वेक्षण में विश्व के सबसे स्वच्छ शहर के खिताब के बाद, इंदौर ने लगातार सातवें वर्ष घरेलू स्तर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर अपनी श्रेष्ठता साबित की है।
यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि भारत स्वच्छता के अपने अभियान में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इंदौर की निरंतर सफलता अन्य शहरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह समय है कि हम सभी इंदौर से सीखें और स्वच्छता को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं। आखिरकार, एक स्वच्छ शहर न केवल सुंदर दिखता है, बल्कि स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण भी करता है।

