वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के यहां आयोजित 10वें संस्करण में चंद्रशेखरन ने कहा कि समूह 2 महीने में साणंद में लिथियम आयन बैटरी बनाने के लिए 20 गीगावॉट की गीगाफैक्टरी शुरू करेगा।
Vibrant Gujarat Summit 2024 के मंच पर गूंज रहा है भारत के आत्मनिर्भर बनने का स्वर, और इस धुन में टाटा ग्रुप ने स्वर मिलाते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। गुजरात के दिल में, टाटा ग्रुप एक अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर प्लांट का निर्माण करेगा, जिससे देश के तकनीकी नक्शे पर एक महत्वपूर्ण बिंदु अंकित होगा। यह निर्णय न केवल भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत स्थान बनाने की पहल भी है।
सेमिकंडक्टर, आधुनिक जीवन का अदृश्य नायक है। वह हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, स्मार्टफोन से लेकर कारों तक, के दिल में धड़कता है। किंतु, इस छोटे से चिप पर हमारी निर्भरता इतनी अधिक है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के व्यवधान से, भारत समेत कई देश आर्थिक झटके सह चुके हैं। यही कारण है कि सेमीकंडक्टर उत्पादन में आत्मनिर्भरता एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है।
टाटा ग्रुप की पहल इसी प्राथमिकता को मजबूती प्रदान करती है। गुजरात के धोलेरा में निर्मित होने वाला यह प्लांट, देश की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं का आधारशिला बनेगा। यह न केवल सेमीकंडक्टर की कमी को कम करेगा, बल्कि नवाचार को बढ़ावा देकर और घरेलू तकनीकी प्रगति को गति देकर भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में एक शक्तिशाली प्रतियोगी बनाएगा।
इस प्लांट के प्रभाव व्यापक और दीर्घकालिक होंगे। सबसे पहले, यह रोजगार के नए अवसरों की एक बाढ़ लाएगा। अनुमान है कि हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बल मिलेगा। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर निर्माण से संबंधित विनिर्माण, आपूर्ति और सेवा क्षेत्रों में भी वृद्धि होगी, पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाते हुए।
दूसरा, यह प्लांट भारत की तकनीकी प्रगति को एक नया आयाम देगा। स्वदेशी सेमीकंडक्टर उत्पादन अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करेगा और घरेलू नवाचार को बल देगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और विनिर्माण में भारतीय विशेषज्ञता का विकास होगा, साथ ही रक्षा, चिकित्सा और कृषि जैसे क्षेत्रों में तकनीकी प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा।
तीसरा, यह प्लांट वैश्विक बाजार में भारत की छवि को और मजबूत करेगा। एक तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में, भारत का निवेश आकर्षण बढ़ेगा और विदेशी कंपनियों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन जाएगा। इससे न केवल व्यापार और वित्तीय लाभ होंगे, बल्कि ज्ञान और प्रौद्योगिकी के अंतर्राष्ट्रीय आदान-प्रदान के द्वार भी खुलेंगे।
हालांकि, यह यात्रा चुनौतियों से रहित नहीं है। कुशल मानव संसाधन का विकास, वैश्विक स्तर की तकनीक का अधिग्रहण और उचित बुनियादी ढांचे का निर्माण, ऐसी कुछ मुख्य चुनौतियां हैं जिन्हें पार करना होगा। किंतु, जैसे एक मजबूत नींव से भव्य इमारतें खड़ी होती हैं, वैसे ही मजबूत इरादे से इन चुनौतियों को भी पार किया जा सकता है।

