बॉलीवुड अभिनेता जॉन अब्राहम ने भारत में अल्पसंख्यकों की असुरक्षा के दावे को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी खुद को अधिक सुरक्षित महसूस नहीं किया। टाइम्स नाउ की पत्रकार नविका कुमार को दिए एक साक्षात्कार में जब उनसे इस बहस के बारे में पूछा गया कि “भारत में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं,” तो उन्होंने इस विचार को पूरी तरह से नकार दिया।
जॉन अब्राहम का स्पष्ट बयान
जॉन अब्राहम ने कहा, “मैं भारत में जन्मा और पला-बढ़ा हूं। मैंने कभी भी अपने देश में असुरक्षित महसूस नहीं किया। यह मेरी मातृभूमि है, और मुझे यहाँ हमेशा अपनापन और सुरक्षा का एहसास हुआ है।”
उन्होंने आगे कहा कि भारत हमेशा से विविधता में एकता का देश रहा है और यहां हर धर्म और समुदाय के लोगों को समान अवसर मिलते हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर जिंदगी में कभी भी किसी भेदभाव का शिकार नहीं हुए।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बहस
हाल के दिनों में भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर कई तरह की चर्चाएँ हो रही हैं। कुछ लोग मानते हैं कि देश में धार्मिक असहिष्णुता बढ़ रही है, जबकि कई अन्य लोगों का मानना है कि भारत सदियों से सभी धर्मों को साथ लेकर चलने वाला देश रहा है।
समर्थकों और आलोचकों की प्रतिक्रियाएँ
जॉन अब्राहम के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनकी बातों का समर्थन किया, जबकि कुछ ने उनकी राय से असहमति जताई। बॉलीवुड में भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग विचार देखने को मिले हैं।
निष्कर्ष
जॉन अब्राहम ने अपने बयान से स्पष्ट कर दिया कि उन्हें भारत में कभी भी असुरक्षित महसूस नहीं हुआ। उनका मानना है कि भारत में सभी धर्मों और समुदायों को समान अवसर मिलते हैं और यह देश सभी के लिए सुरक्षित है। उनके इस बयान ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिससे देशभर में विभिन्न विचार सामने आ रहे हैं।



