वाशिंगटन, 2 अप्रैल 2025 – अमेरिका को दुनिया के सबसे कम टैरिफ वाले देशों में गिना जाता है, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे बदलने का निर्णय लिया है। उनके नए प्रतिपक्षीय टैरिफ (Reciprocal Tariffs) 2 अप्रैल से लागू हो रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
क्या हैं प्रतिपक्षीय टैरिफ?
प्रतिपक्षीय टैरिफ का मतलब है कि अमेरिका अब उन देशों पर वही आयात शुल्क लगाएगा जो वे अमेरिकी उत्पादों पर लगाते हैं। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि यह नीति अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की आधिकारिक वेबसाइट
किन देशों पर पड़ेगा प्रभाव?
ट्रम्प ने रविवार को चेतावनी दी कि “सभी देश” इस टैरिफ नीति से प्रभावित होंगे।
🔹 चीन – अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के चलते चीन पहले से ही उच्च अमेरिकी शुल्क झेल रहा है।
🔹 यूरोपीय संघ – यूरोप से आयातित लक्ज़री कारों और खाद्य उत्पादों पर शुल्क बढ़ सकता है।
🔹 भारत – ट्रम्प ने पहले भी भारतीय टैरिफ नीति की आलोचना की है, जिससे भारतीय निर्यातकों पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी व्यापार नीति पर CNN की रिपोर्ट
कौन से उत्पाद होंगे प्रभावित?
🛠️ उद्योग और तकनीकी क्षेत्र: चीन और जर्मनी से आयातित मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक्स पर शुल्क बढ़ सकता है।
🍏 कृषि उत्पाद: यूरोप और दक्षिण अमेरिका से आने वाले शराब, डेयरी और फलों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
🚗 वाहन उद्योग: जर्मनी, जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाली कारों पर अतिरिक्त शुल्क लग सकता है।
अमेरिकी वाणिज्य विभाग की रिपोर्ट
सबसे अधिक और सबसे कम टैरिफ वाले देश
📈 सबसे अधिक टैरिफ: भारत, ब्राजील, अर्जेंटीना, चीन, तुर्की
📉 सबसे कम टैरिफ: अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, सिंगापुर
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापार विवाद को बढ़ा सकती है।
💬 इकोनॉमिस्ट जेम्स एलन का कहना है: “इस नीति से उपभोक्ताओं को महंगे उत्पाद खरीदने पड़ सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।”
🛒 अमेरिकी कंपनियों को आयात महंगा पड़ेगा, जिससे उनके उत्पादन खर्च में बढ़ोतरी होगी।
ब्लूमबर्ग की व्यापार नीति रिपोर्ट
क्या आगे होगा?
इस नीति के लागू होने के बाद अमेरिका और अन्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में बदलाव देखने को मिल सकता है। कुछ देश अमेरिका के खिलाफ जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बन सकती है।
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