फिल्म का नाम: कोर्ट – स्टेट Vs. ए नोबडी
रिलीज डेट: 14 मार्च 2025
रेटिंग: ⭐⭐⭐✨ (3.25/5)
कलाकार: प्रियदर्शी, हर्ष रोशन, श्रीदेवी, शिवाजी, साई कुमार, हर्षवर्धन, रोहिणी, शुभलेखा सुधाकर, सुरभि प्रभावती, राजशेखर अनिंगी
निर्देशक: राम जगदीश
निर्माता: प्रशांति टिपिरनेनी
संगीत: विजय बुल्गानिन
सिनेमैटोग्राफर: दिनेश पुरुषोत्तम
संपादक: कार्तिका श्रीनिवास आर
कहानी:
फिल्म की कहानी 2013 में विशाखापट्टनम में सेट की गई है। मेट्टू चंद्रशेखर (हर्ष रोशन) उर्फ चंदू एक चौकीदार का बेटा है, जो अपनी आजीविका के लिए छोटे-मोटे काम करता है। वहीं, जबिली (श्रीदेवी अपल्ला) एक सम्मानित परिवार की छात्रा है, जिसकी मुलाकात चंदू से होती है।
एक मज़ाक के चलते जबिली और चंदू के बीच बातचीत शुरू होती है। लेकिन एक दिन जबिली का चाचा मंगापति (शिवाजी), जो जातिवाद और पारिवारिक प्रतिष्ठा को लेकर अंधा है, उसे चंदू के घर में पाता है। गुस्से में आकर वह चंदू पर झूठे आरोप लगाकर POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार करवा देता है और उसकी ज़िंदगी तबाह करने की कोशिश करता है।
इस मामले को संभालने के लिए जबिली का परिवार विजयवाड़ा के वकील सूर्य तेजा (प्रियदर्शी) की मदद लेता है, जो वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन राव (साई कुमार) के सहायक हैं। अब सवाल यह है कि:
- क्या सूर्य तेजा चंदू को निर्दोष साबित कर पाएगा?
- मंगापति चंदू से इतनी नफरत क्यों करता है?
- कोर्टरूम में इस केस का अंजाम क्या होगा?
इन सभी सवालों के जवाब फिल्म में मिलते हैं।
प्लस पॉइंट्स:
- निर्देशक राम जगदीश का निर्देशन काबिल-ए-तारीफ है। यह उनकी पहली फिल्म होने के बावजूद उन्होंने कोर्टरूम ड्रामा को बेहद शानदार तरीके से प्रस्तुत किया है। कोर्ट सीन्स को बेहतरीन ढंग से लिखा गया है, जिससे दर्शक फिल्म से जुड़े रहते हैं।
- शिवाजी ने मंगापति के रूप में जबरदस्त अभिनय किया है। उनका किरदार जातिवाद और पारिवारिक प्रतिष्ठा के प्रति कट्टरता को दर्शाता है, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया है। उनका अभिनय इतना प्रभावी है कि दर्शकों को यह किरदार वास्तविक लग सकता है।
- प्रियदर्शी ने भी अपनी भूमिका को अच्छे से निभाया है। वह एक दृढ़निश्चयी वकील के रूप में उभरकर आते हैं और उनके डायलॉग्स प्रभावशाली हैं।
- फिल्म में कोर्टरूम ड्रामा को असली तरीके से पेश किया गया है, जो इसे और रोचक बनाता है।
‘कोर्ट – स्टेट Vs. ए नोबडी’ एक मजबूत सामाजिक संदेश देने वाली फिल्म है, जिसमें जातिवाद और न्याय व्यवस्था की कमियों को उजागर किया गया है। हालांकि, फिल्म पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, लेकिन इसके शानदार कोर्टरूम सीन, दमदार परफॉर्मेंस और सामाजिक मुद्दों पर आधारित कहानी इसे देखने लायक बनाते हैं। अगर आप कोर्टरूम ड्रामा और रियलिस्टिक सिनेमा पसंद करते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखें।



