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कैमरे में कैद हुआ: वैज्ञानिकों ने पहली बार पौधों को एक-दूसरे से “बात करते” हुए देखा!

हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा! वैज्ञानिकों ने पहली बार पौधों को एक-दूसरे से संवाद करते हुए कैमरे में कैद किया है। यह एक ऐतिहासिक खोज है जो पौधों के जगत के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल सकती है।

एक अनदेखी दुनिया का खुलासा

यह अध्ययन जापान के सैतामा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था, जिनका नेतृत्व मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट मासात्सुगु टोयोटा ने किया था। टीम ने पता लगाया है कि पौधे हवा में फैले सूक्ष्म रसायनों के जरिए एक-दूसरे से बात करते हैं। ये रसायन गंध की तरह होते हैं और आसपास के पौधों को खतरों के बारे में चेतावनी देते हैं।

अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने दो अलग-अलग कंटेनरों में पौधों को रखा। एक कंटेनर में पौधों को बिना किसी नुकसान के रखा गया था, जबकि दूसरे कंटेनर में पौधों को कीटों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया था। उन्होंने पाया कि बिना नुकसान वाले पौधों ने कीटों द्वारा क्षतिग्रस्त पौधों द्वारा जारी किए गए रसायनों का पता लगाया और बचाव के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त की।

यह खोज दर्शाती है कि पौधे एक जटिल संचार प्रणाली का उपयोग करते हैं जो उन्हें अपने वातावरण के बारे में जानकारी साझा करने और खतरों का जवाब देने की अनुमति देता है।

अध्ययन के निष्कर्ष

अध्ययन के लेखकों ने कहा, “पौधे उन वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (वीओसी) को समझते हैं जो यांत्रिक रूप से या शाकाहारी-क्षतिग्रस्त पड़ोसी पौधों द्वारा जारी किए जाते हैं और विभिन्न रक्षा प्रतिक्रियाओं को प्रेरित करते हैं। ऐसे अंतर-पौधों के संचार पर्यावरण के खतरों से पौधों की रक्षा करते हैं।”

यह खोज पौधों के बारे में हमारी समझ को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकती है। यह दर्शाता है कि पौधे केवल निष्क्रिय जीव नहीं हैं, बल्कि उनके आसपास की दुनिया के प्रति जागरूक और प्रतिक्रियाशील हैं।

अध्ययन के संभावित प्रभाव

इस खोज के कई महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। यह कृषि के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है। किसान पौधों के संचार प्रणाली को समझकर फसलों की रक्षा के लिए नए तरीके विकसित कर सकते हैं। इससे कीटनाशकों के उपयोग की आवश्यकता कम हो सकती है और पर्यावरण की रक्षा हो सकती है।

यह खोज दवा विकास के क्षेत्र में भी मददगार हो सकती है। वैज्ञानिक पौधों द्वारा उत्पादित रसायनों का अध्ययन करके नए दवाओं का विकास कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह एक ऐतिहासिक खोज है जो पौधों के जगत के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह से बदल सकती है। यह अध्ययन न केवल कृषि और दवा विकास के क्षेत्र में क्रांति ला सकता है, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे दृष्टिकोण को भी बदल सकता है।

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ऑस्कर्स 2024: ‘टू किल अ टाइगर’ भारत की ओर से सर्वश्रेष्ठ Documentary के लिए नामांकित

भारतीय सिनेमा ने एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है! ‘ऑस्कर्स 2024’ फिल्म समारोह में, भारत की एक दमदार Documentary ‘टू किल अ टाइगर’ को प्रतिष्ठित सर्वश्रेष्ठ Documentary फीचर श्रेणी के लिए नामांकित किया गया है। यह नामांकन न केवल फिल्म के लिए, बल्कि भारतीय Documentary film निर्माण के लिए भी एक गौरव का क्षण है।

‘टू किल अ टाइगर’ निर्देशक रिया सेनगुप्ता की एक शक्तिशाली कृति है, जो मानव-पशु संघर्ष के जटिल मुद्दे से निपटती है। फिल्म हमें भारत के सुंदर और जंगली सुदूर इलाकों में ले जाती है, जहां बाघों और मवेशों के बीच संघर्ष का दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। फिल्म इस संघर्ष के विभिन्न पक्षों को संवेदनशीलता से उजागर करती है, जिसमें बाघों के संरक्षण की आवश्यकता, ग्रामीणों की आजीविका की चिंताएं और वन विभाग की चुनौतियां शामिल हैं।

फिल्म के केंद्र में रामकीला नाम का एक आदमी है, जो अपने भाई को बाघ के हमले में खो चुका है। फिल्म दर्शाती है कि कैसे यह घटना उसके जीवन को तबाह कर देती है और उसे बाघों के प्रति बदले की भावना से भर देती है। हालांकि, जैसा कि हम रामकीला की कहानी का अनुसरण करते हैं, हम देखते हैं कि वह धीरे-धीरे अपनी नफरत को समझने और क्षमा करने की यात्रा पर निकलता है।

‘टू किल अ टाइगर’ सिर्फ एक Documentary नहीं है, बल्कि एक मानवीय कहानी है जो हमें सहानुभूति और समझ की शक्ति की याद दिलाती है। फिल्म यह दिखाती है कि मानव और प्रकृति के बीच संघर्ष को केवल तभी हल किया जा सकता है जब हम एक-दूसरे को सुनने और एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझने का प्रयास करें।

यह नामांकन भारतीय वृत्तचित्र निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि भारतीय फिल्म निर्माता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण विषयों पर शक्तिशाली और चलती-फिरती फिल्में बना रहे हैं। ‘टू किल अ टाइगर’ की सफलता निस्संदेह भारतीय Documentaries’ के लिए वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने के नए रास्ते खोलेगी।

निर्देशक रिया सेनगुप्ता फिल्म के नामांकन से बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा, “मुझे इस बात पर अविश्वसनीय रूप से गर्व है कि ‘टू किल अ टाइगर’ को ‘ऑस्कर्स 2024’ में सर्वश्रेष्ठ Documentary फीचर के लिए नामांकित किया गया है। यह फिल्म मेरे लिए बेहद खास है और मैं इसे दुनिया के साथ साझा करने के लिए सम्मानित महसूस करती हूं। मुझे उम्मीद है कि यह फिल्म मानव-पशु संघर्ष के बारे में बातचीत को प्रेरित करेगी और हमें एक-दूसरे को समझने और सहानुभूति रखने के लिए प्रेरित करेगी।”

‘टू किल अ टाइगर’ का ‘ऑस्कर्स 2024’ में नामांकन भारतीय सिनेमा के लिए एक शानदार जीत है। यह फिल्म न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ रही है, बल्कि मानव-पशु संघर्ष के बारे में महत्वपूर्ण बातचीत को भी प्रेरित कर रही है।

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एयर इंडिया ने बेंगलुरु हवाई अड्डे से देश का पहला एयरबस ए 350 संचालित किया

बेंगलुरु, 22 जनवरी, 2024 – एयर इंडिया ने सोमवार को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से देश का पहला एयरबस ए 350-900 विमान का संचालन किया। फ्लाइट एआई 589 सुबह 7:05 बजे बेंगलुरु से रवाना हुई और 8:50 बजे मुंबई पहुंची।

इस ऐतिहासिक उड़ान पर 297 यात्री सवार थे। विमान में 316 सीटें हैं, जिनमें 28 निजी बिजनेस सुइट्स, 24 प्रीमियम इकोनॉमी सीटें और 264 इकोनॉमी सीटें शामिल हैं।

एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री अनिल त्रिवेदी ने कहा, “एयरबस ए 350 हमारे बेड़े में शामिल होने वाला सबसे आधुनिक विमान है। यह विमान अपने ईंधन दक्षता, आराम और सुविधाओं के लिए जाना जाता है। हम अपने यात्रियों को एक बेहतरीन उड़ान अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, और एयरबस ए 350 हमें यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा।”

एयरबस ए 350 एक मध्य-आकार का, टर्बोफैन-संचालित, दो-इंजन वाला, चौड़े शरीर वाला विमान है। यह दुनिया का सबसे ईंधन-कुशल विमानों में से एक है, और इसमें स्वच्छ हवा प्रणाली और अन्य सुविधाएं हैं जो यात्रियों के आराम को बढ़ाती हैं।

एयर इंडिया ने जून 2023 में एयरबस और बोइंग के साथ 470 विमानों के रिकॉर्ड सेटिंग ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए थे। एयरबस ए 350 इस ऑर्डर का हिस्सा है। एयर इंडिया के बेड़े में 2024 के अंत तक 10 एयरबस ए 350 शामिल होने की उम्मीद है।

एयरबस ए 350 की प्रमुख विशेषताएं

  • ईंधन दक्षता: एयरबस ए 350 अन्य समान विमानों की तुलना में 20% अधिक ईंधन कुशल है। यह ईंधन बचत न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि एयरलाइन के लिए भी लागत कम करता है।
  • आराम: एयरबस ए 350 में यात्रियों के आराम के लिए कई सुविधाएं हैं। इसमें पूर्ण-फ्लैट बेड के साथ बिजनेस सुइट्स, अतिरिक्त लेगरूम के साथ प्रीमियम इकोनॉमी सीटें और व्यक्तिगत मनोरंजन प्रणाली शामिल हैं।
  • सुविधाएँ: एयरबस ए 350 में कई सुविधाएँ हैं जो यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाती हैं। इसमें स्वच्छ हवा प्रणाली, आधुनिक इंफोटेनमेंट सिस्टम और उन्नत सुरक्षा सुविधाएं शामिल हैं।

एयर इंडिया के लिए एयरबस ए 350 का महत्व

एयरबस ए 350 एयर इंडिया के बेड़े में एक महत्वपूर्ण जोड़ है। यह विमान एयरलाइन को अपने यात्रियों को एक बेहतरीन उड़ान अनुभव प्रदान करने में मदद करेगा। एयरबस ए 350 की ईंधन दक्षता एयरलाइन के लिए लागत कम करने में भी मदद करेगी।

एयर इंडिया के लिए एयरबस ए 350 का महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट होता है:

  • यह विमान एयरलाइन को अपने यात्रियों को एक बेहतरीन उड़ान अनुभव प्रदान करने में मदद करेगा।
  • यह विमान एयरलाइन के लिए लागत कम करने में मदद करेगा।
  • यह विमान एयरलाइन को लंबी दूरी की उड़ानें भरने में सक्षम बनाएगा।

एयरबस ए 350 के बेड़े में शामिल होने से एयर इंडिया को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और भारतीय विमानन उद्योग में अपना नेतृत्व बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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