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कैबिनेट ने दी नए इनकम टैक्स बिल को मंजूरी, सोमवार को लोकसभा में पेश होगा

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने शुक्रवार को अपनी कैबिनेट बैठक में नए इनकम टैक्स बिल को मंजूरी दे दी है। यह बिल अब सोमवार को लोकसभा में पेश किया जाएगा। इस बिल को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश करते समय जानकारी दी थी और इसे टैक्स ढांचे को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बिल पर चर्चा की गई और इसे हरी झंडी दे दी गई। सरकार का दावा है कि यह बिल करदाताओं के लिए लाभदायक होगा और टैक्स व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस बिल को लेकर सवाल खड़े किए हैं और इसे आम जनता के लिए ज्यादा लाभकारी न होने का दावा किया है।

इस बीच, संसद का बजट सत्र जारी है, और अमेरिका द्वारा अवैध प्रवासियों को भारत भेजे जाने के मुद्दे पर संसद में हंगामा होने की आशंका जताई जा रही है। विपक्ष इस मामले को मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दे रहा है और इसे लेकर संसद में तीखी बहस होने की संभावना है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद संजय राउत आज दिल्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं।

माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्षी नेता नए इनकम टैक्स बिल, अमेरिका से लौटाए गए अवैध प्रवासियों और सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा सकते हैं। राहुल गांधी पहले भी इन मुद्दों पर सरकार की आलोचना कर चुके हैं, और अब उनके साथ एनसीपी और शिवसेना के नेता भी इस पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।

सरकार ने बजट सत्र के दौरान कई अहम बिल लाने की योजना बनाई है, जिनमें से इनकम टैक्स बिल सबसे प्रमुख है। सरकार का कहना है कि यह बिल देश में टैक्स सुधारों को गति देगा और करदाताओं को राहत प्रदान करेगा। अब देखना होगा कि लोकसभा में इस बिल पर विपक्ष क्या रुख अपनाता है और संसद में इस पर कैसी बहस होती है।

असम: नेपाल की भू-राजनीतिक दुविधा पर डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय साहित्य उत्सव में चर्चा

डिब्रूगढ़: असम के डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में चल रहे अंतरराष्ट्रीय साहित्य उत्सव के दौरान नेपाल की भू-राजनीतिक स्थिति पर एक रोचक बहस देखने को मिली।

चार दिवसीय इस आयोजन में एशिया, अफ्रीका और यूरोप के लगभग 25 देशों से आए 200 से अधिक लेखकों ने भाग लिया। उत्सव के 50 से अधिक सत्रों में साहित्य और संस्कृति से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हो रही है।

नेपाल की राजनीति पर तीखी बहस

“नेपाल नैरेटिव: पीपल, पैलेस और पॉलिटिक्स” शीर्षक वाले सत्र में काठमांडू के लेखक अमीश राज मुल्मी, जो “ऑल रोड्स लीड नॉर्थ: नेपाल्स टर्न टू चाइना” के लेखक हैं, एक प्रमुख वक्ता थे।

मुल्मी ने भारत-नेपाल संबंधों में हाल के वर्षों में आई दरार को नेपाल की चीन पर बढ़ती निर्भरता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि नेपाल की आर्थिक प्रगति की जरूरतों ने उसे चीन की ओर देखने के लिए मजबूर किया है, हालांकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से वह भारत के अधिक निकट रहा है।

नेपाल-भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा

पूर्व भारतीय राजदूत रंजीत राय ने, हंसी-हंसी में, मुल्मी की पुस्तक के शीर्षक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इसका नाम “ऑल रोड्स लीड टू साउथ” होना चाहिए था, क्योंकि नेपाल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भारत के साथ अधिक घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।

मुल्मी ने यह भी बताया कि 2008 में नेपाल में 240 वर्षों से चली आ रही राजशाही के अंत और नेपाल के एकमात्र हिंदू राष्ट्र होने की पहचान खत्म होने के बाद, भारत-नेपाल संबंधों में सुधार हुआ था, लेकिन बाद में यह संबंध फिर से कमजोर हो गए।

नेपाल की सांस्कृतिक विविधता पर प्रकाश

नेपाल की लेखिका स्मृति रवींद्र, जो अपने उपन्यास “द वुमन हू क्लाइंब्ड ट्रीज़” के लिए जानी जाती हैं, ने नेपाल और भारत के बीच सांस्कृतिक समानताओं को उजागर किया।

मुल्मी और रवींद्र, दोनों ने यह बताया कि नेपाल को अक्सर केवल हिमालय और पर्वतारोहण से जोड़कर देखा जाता है, जबकि देश का एक बड़ा हिस्सा तराई क्षेत्र में स्थित है, जिसे साहित्य में अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

मधेशी समुदाय की पहचान और संघर्ष

तराई क्षेत्र से आने वाली रवींद्र ने इस गलतफहमी पर चिंता जताई कि नेपाल के दक्षिणी क्षेत्र में रहने वाले मधेशी समुदाय को नेपाल के भीतर भी भारतीय समझा जाता है।

उन्होंने कहा कि मधेशी समुदाय को नेपाल के उत्तरी हिस्से और सरकार द्वारा हाशिए पर रखा जाता है, क्योंकि उनकी भारत से गहरी सांस्कृतिक और पारिवारिक कड़ियां हैं।

रवींद्र ने खुद को “मधेशी” के रूप में पहचाना और गर्व से बताया कि उनके परिवार में भारतियों से विवाह आम बात है, जो किसी दूसरे देश में नहीं, बल्कि किसी अन्य राज्य में शादी करने जैसा लगता है।

नेपाल के साहित्यिक योगदान पर चर्चा

सत्र के दौरान, जब दर्शकों से नेपाल की वैश्विक साहित्यिक पहचान पर सवाल किया गया, तो दोनों लेखकों ने स्वीकार किया कि नेपाल के प्रवासी समुदाय दुनिया भर में फैले हुए हैं, लेकिन नेपाली साहित्य अभी भी वैश्विक स्तर पर अपनी पूरी क्षमता तक नहीं पहुंचा है।

नेपाल की राजनीति, सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक स्थिति पर केंद्रित यह चर्चा, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय साहित्य उत्सव के सबसे चर्चित सत्रों में से एक रही।

Crypto Price Today: बिटकॉइन $97,000 के पार, Sui और XRP में 10% तक की गिरावट

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में आज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जहां बिटकॉइन (Bitcoin) $97,000 से ऊपर ट्रेड कर रहा है, वहीं कई अन्य टोकन भारी गिरावट का सामना कर रहे हैं। Sui और XRP में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों में हलचल बढ़ गई है।

बिटकॉइन ने बरकरार रखी मजबूती

बिटकॉइन की कीमत आज $97,000 के ऊपर बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि क्रिप्टो मार्केट में फिलहाल बुलिश सेंटिमेंट बना हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों से बिटकॉइन लगातार मजबूती दिखा रहा है और इसका प्रमुख कारण इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी और मार्केट में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बिटकॉइन इसी ट्रेंड को बनाए रखता है, तो यह जल्द ही $100,000 का स्तर पार कर सकता है। हालांकि, क्रिप्टो मार्केट में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है और किसी भी बड़ी बिकवाली से इसमें गिरावट भी देखी जा सकती है।

Sui और XRP में 10% तक की गिरावट

बिटकॉइन के शानदार प्रदर्शन के बावजूद, अन्य कई क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट दर्ज की गई है। Sui और XRP ने 10% तक की गिरावट झेली, जिससे निवेशकों को झटका लगा है। Sui की कीमतों में अचानक आई गिरावट का कारण ग्लोबल मार्केट में बढ़ते उतार-चढ़ाव को माना जा रहा है।

XRP की बात करें तो, इस क्रिप्टो टोकन ने हाल ही में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन आज की गिरावट से यह निवेशकों की चिंता बढ़ा सकता है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सिर्फ एक अस्थायी गिरावट हो सकती है और आने वाले दिनों में XRP रिकवरी कर सकता है।

क्रिप्टो मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी

क्रिप्टो मार्केट हमेशा अस्थिर रहता है, और यही इसकी खासियत भी है। जहां एक ओर बिटकॉइन लगातार मजबूत बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर कई ऑल्टकॉइन्स (Altcoins) दबाव में नजर आ रहे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी का भविष्य सकारात्मक तो है, लेकिन इसमें निवेश करने से पहले रिस्क फैक्टर्स को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।

यदि आप क्रिप्टो मार्केट में निवेश करना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों की राय लेना और मार्केट ट्रेंड को समझना जरूरी है। बिटकॉइन फिलहाल मजबूती बनाए हुए है, लेकिन अन्य क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट चिंता का विषय हो सकती है।

बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी निर्णय से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए।

‘लाफ्टर शेफ’ ने TRP में मचाया धमाल, ‘सेलेब्रिटी मास्टरशेफ’ रह गया पीछे

टीवी इंडस्ट्री में हर हफ्ते TRP की रेस दिलचस्प होती जा रही है। इस हफ्ते ‘लाफ्टर शेफ’ ने जबरदस्त एंट्री मारी है और दर्शकों के बीच छा गया है। वहीं, ‘सेलेब्रिटी मास्टरशेफ’ को उम्मीद के मुताबिक TRP नहीं मिल पाई और शो टॉप 10 में भी जगह बनाने में नाकाम रहा।

‘लाफ्टर शेफ’ ने मारी टॉप 6 में एंट्री

BARC की लेटेस्ट रेटिंग्स के मुताबिक, ‘लाफ्टर शेफ 2’ ने टॉप 6 में जगह बना ली है। यह शो अपनी अनोखी थीम की वजह से लोगों को खूब पसंद आ रहा है। दर्शकों को हंसी और खाना बनाने का यह अनोखा कॉम्बिनेशन काफी एंटरटेनिंग लग रहा है। शो में मौजूद कॉमेडियन और शेफ्स की मस्ती ने इसे दर्शकों की फेवरेट लिस्ट में शामिल कर दिया है।

इस शो में जहां एक ओर टैलेंटेड शेफ्स अलग-अलग तरह के डिशेज बना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कॉमेडियन अपने मजेदार अंदाज से शो में जान डाल रहे हैं। यह कांसेप्ट लोगों को काफी पसंद आ रहा है और यही वजह है कि शो ने TRP लिस्ट में शानदार एंट्री मारी है।

‘सेलेब्रिटी मास्टरशेफ’ फिसला, ड्रामा भी नहीं आया काम

जहां ‘लाफ्टर शेफ’ ने धमाकेदार एंट्री की, वहीं ‘सेलेब्रिटी मास्टरशेफ’ को इस हफ्ते बड़ा झटका लगा है। शो को केवल 37वीं रैंक मिली है, जो इसके मेकर्स के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि शो में जबरदस्त ड्रामा दिखाया जा रहा है, लेकिन फिर भी दर्शक इससे खास प्रभावित नहीं हो रहे।

मेकर्स ने शो की टीआरपी बढ़ाने के लिए कई ट्विस्ट और टर्न्स जोड़े, लेकिन इसका खास असर नहीं हुआ। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि दर्शक अब सिर्फ ड्रामा नहीं, बल्कि अच्छे कंटेंट की तलाश में हैं।

दर्शकों की पसंद में बदलाव

इस बार की TRP रेटिंग्स से साफ जाहिर होता है कि दर्शकों की पसंद अब बदल रही है। वे केवल बड़े सितारों को देखने के लिए शो नहीं देखते, बल्कि उन्हें अच्छा कंटेंट चाहिए। ‘लाफ्टर शेफ’ ने इस बार साबित कर दिया कि नई और दिलचस्प कहानियों को दर्शक ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जबकि सिर्फ सेलेब्रिटी के नाम पर कोई शो हिट नहीं हो सकता।

अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले हफ्तों में ‘लाफ्टर शेफ’ अपनी पोजीशन बनाए रखता है या नहीं और ‘सेलेब्रिटी मास्टरशेफ’ कोई बड़ा बदलाव कर पाता है या नहीं। फिलहाल, ‘लाफ्टर शेफ’ इस हफ्ते की TRP रेस का असली विनर साबित हुआ है!

आरबीआई और वित्त मंत्रालय की जुगलबंदी से पांच साल बाद मिली ब्याज दरों में राहत

मुंबई: बजट में घोषित महत्वपूर्ण कर कटौती के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। शुक्रवार को आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती करते हुए इसे 6.25% कर दिया। पांच साल बाद यह पहला मौका है जब ब्याज दरों में राहत दी गई है, जिससे उपभोक्ता आधारित वृद्धि को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इस कटौती का सीधा असर यह होगा कि होम लोन, ऑटो लोन और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण सस्ते होंगे। फ्लोटिंग ब्याज दरों पर लिए गए ऋण की दरें भी अपने आप 25 बेसिस प्वाइंट तक घट जाएंगी।

इससे पहले, उच्च ब्याज दरों का यह दूसरा सबसे लंबा दौर था, जो अक्टूबर 2008 में समाप्त हुआ था। तब वैश्विक वित्तीय संकट के चलते ब्याज दरों में बदलाव आया था। मई 2020 के बाद पहली बार आरबीआई ने रेपो दर में कटौती की है, जब महामारी के चरम पर 50 बेसिस प्वाइंट की असाधारण कटौती कर इसे 4% तक लाया गया था।

हालांकि, उद्योग और बाजार इस 0.25% की मामूली कटौती से बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं दिखे, क्योंकि उन्हें अधिक कटौती की उम्मीद थी। लेकिन इस बार आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान में एक नई सोच झलकती है। उनके अनुसार, मौद्रिक नीति को अब विकास को बढ़ावा देने पर अधिक ध्यान देना चाहिए, बजाय केवल महंगाई नियंत्रण पर फोकस करने के।

आरबीआई को उम्मीद है कि कृषि उत्पादन बेहतर रहेगा और विनिर्माण क्षेत्र 2025 की दूसरी छमाही में सुधार करेगा। इसी आधार पर मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगले वित्तीय वर्ष में 6.7% वृद्धि दर का अनुमान जताया है, जो इस साल के 6.4% से अधिक है।

महंगाई को लेकर आरबीआई को भरोसा है कि कीमतें धीरे-धीरे नियंत्रित होती जाएंगी। अनुमान है कि चालू वित्तीय वर्ष में महंगाई दर 4.8% पर रहेगी, जो अगले साल घटकर 4.2% तक आ सकती है।

बजट में दी गई कर कटौती पर बोलते हुए मल्होत्रा ने कहा कि इससे घरेलू उपभोग को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि रोजगार के बेहतर अवसरों से लोगों की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी।