सीईएस ने जनवरी 2023 में वैश्विक वायरलेस चार्जिंग मानक, क्यूई के लिए एक नई पीढ़ी के अपग्रेड की घोषणा की थी। इस घड़ी में, वायरलेस पावर कंसोर्टियम (WPC) ने एक नए मानक, Qi2, का परिचय किया, जो Apple की MagSafe तकनीक पर आधारित है। Qi2 प्रमाणित फोन और चार्जरों की अनुमानित आगमन 2023 के छुट्टियों में है, जो एक बड़े परिवर्तन की आशा दिखाता है। हाल ही में WPC ने घोषणा की है कि Qi2 तकनीक का डेडलॉक लग चुका है, जिसका मतलब है कि एंड्रॉइड फोनों पर जल्द ही MagSafe वायरलेस चार्जिंग तकनीक को देखा जा सकता है।
WPS की प्रमुख विशेषताएं और दावें: WPS के अनुसार, Qi2 में MagSafe की तरह चुंबकीय संलग्नता, तेज चार्जिंग, उच्च दक्षता, और अन्य कई विशेषताएं होंगी। पहला Qi2 प्रमाणित उत्पाद Apple के iPhone 15 लाइनअप से आने वाला है, जिसे छुट्टियों के मौसम में लॉन्च किया जाएगा। Qi2 प्रोफाइल को अपनाने की आशा है कि एंड्रॉइड फोन भी इसे अपना सकेंगे। Belkin, Mophie, Anker, और Aircharge जैसी कंपनियाँ पहले से ही Qi2 चार्जिंग उत्पादों की घोषणा कर चुकी हैं, और 100 से अधिक डिवाइस प्रमाणन प्रक्रिया में हैं।
Qi2 मानक में प्रोफाइल विवरण: WPC के अनुसार, Qi2 मानक में दो प्रमुख प्रोफाइल हैं: मैग्नेटिक पावर प्रोफाइल (MPP) और एक्सटेंडेड पावर प्रोफाइल (EPP)। MPP, जो कि Apple की MagSafe तकनीक पर आधारित है, Qi2 लोगो से ब्रांडेड है, जबकि EPP मौजूदा वायरलेस चार्जिंग को सुधारता है लेकिन मैग्नेट का समर्थन नहीं करता। WPS ने हाल ही में घोषणा की है कि नए Qi2 EPP उत्पादों को मौजूदा Qi लोगो के साथ ब्रांड किया जाएगा।


Android फ़ोन्स में इंटीग्रेशन: Android फोनों के साथ Qi2 मानक का इंटीग्रेशन करने की संभावना है, और आगामी Android फोनों पर MagSafe-आधारित MPP प्रोफ़ाइल का समर्थन हो सकता है। नए वायरलेस चार्जर संगत एंड्रॉइड डिवाइस से चुंबकीय रूप से जुड़ने में सक्षम हो सकते हैं, जैसे कि मैगसेफ चार्जर आईफोन से जुड़ता है। इसके अलावा, एंड्रॉइड फोन पर मैग्नेटिक अटैचमेंट से जुड़ने की सुविधा के साथ, मैग्नेट-आधारित फोन एक्सेसरीज भी उपलब्ध हो सकते हैं, जो वर्तमान में आईफोन के लिए ही उपलब्ध हैं। इनमें मैगसेफ-संगत केस, मैग्नेटिक वॉलेट, बैटरी पैक, और बहुत कुछ शामिल हैं।
WPS के निदेशक की बातें: डब्ल्यूपीसी के कार्यकारी निदेशक पॉल स्ट्रुहसेकर ने बताया, “ये प्रमाणित Qi2 चार्जर अधिक सहज, तेज चार्जिंग प्रदान करते हैं जो अधिक ऊर्जा कुशल है और व्यापक अंतरसंचालनीयता प्रदान करते हैं।” इसके अलावा, उन्होंने चुंबकीय लगाव से संबंधित बातें शेयर कीं और बताया कि इससे उपभोक्ताओं को फोन और चार्जर को सही से मिलाने में कोई परेशानी नहीं होगी।
Google Pixel 9 लाइनअप पर आशंका: Google Pixel 9 लाइनअप को भी Qi2 वायरलेस चार्जिंग के साथ लॉन्च करने की चर्चा है। WPC में हाल ही में शामिल हुए लियू यांग, जो पिक्सेल हैंडसेट्स के लिए वायरलेस चार्जिंग सिस्टम पर काम कर रहे हैं, ने इस पर इशारा किया है कि पिक्सेल 9 लाइनअप भी Qi2 का समर्थन कर सकता है।
Qi2 वायरलेस चार्जिंग का आगमन एक नई मोबाइल तकनीक की दुनिया में एक बड़ा कदम है, जो तेज, सुरक्षित, और उपयोगकर्ता के अनुकूलित चार्जिंग का वादा करता है। Qi2 के अगले फ़ीचर्स की संभावना से एंड्रॉइड फोनों को एक नया दिशा मिल सकता है और इससे यह सिद्ध हो सकता है कि वे भी चार्जिंग के क्षेत्र में मौजूदा नेतृत्व को पीछे छोड़ दें। चार्जिंग तकनीक के इस नए मानक के साथ, उपभोक्ता एक नए और सुधारित चार्जिंग अनुभव की ओर बढ़ सकते हैं।

दीपेंद्र गोयल की लाइफ में धीरे-धीरे दूसरे हीरो की एंट्री हुई। पंकज चड्ढा था दूसरा साथी। दोनों ने 2008 में FoodiEBAY नामक एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। अब आप इस पोर्टल पर रेस्टोरेंट की डिटेल्स और रेटिंग भी दे सकते हैं। जिसमें उन्होंने दिल्ली में 1200 रेस्तरां के मेन्यू को शामिल किया था। देखते ही देखते ये पोर्टल चर्चा में आने लगे। FoodiEBAY 2010 तक देश के कई शहरों में पहुंच गया था।
तब जोमैटो नाम पड़ा, और दीपेंद्र गोयल अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने का विचार कर रहे थे, लेकिन दोनों को समय की कमी थी। दीपेंद्र गोयल ने अपनी पत्नी की नौकरी मिलने के बाद FoodiEBAY पर पूरी तरह से ध्यान देने लगा। फिर उन्होंने 2010 में कंपनी का नाम बदलकर जोमैटो कर दिया। जोमैटो नाम के पीछे कोई बड़ी कहानी नहीं है; बस टोमेटो और जोमैटो को एक जैसा लगता था, इसलिए इसका नाम आया।
मदद की बात करते हुए, naukri.com के संजीव ने 2010 में एक मिलियन डॉलर का निवेश किया था। ध्यान दें कि संजीव के पास सिर्फ ३७% शेयर हैं। 2013 में कंपनी को कई नए निवेशक मिले, जिससे उसका फंड 223.8 मिलियन डॉलर (करीब 18 करोड़ 57 लाख रुपए) हो गया।
कुछ सालों बाद जिओ की एंट्री, जियो ने दी रफ्तार। हम सब जानते हैं कि जिओ के आने से टेलीकॉम क्षेत्र में एक क्रांति हुई। 3G, यानी हाई स्पीड डाटा, हर किसी को फ्री में उपलब्ध था। ऑनलाइन पोर्टल पर लोग तेजी से शिफ्ट हो रहे थे। जोमैटो इससे लाभ मिला। दीपेन्द्र गोयल ने विचार किया कि एक ऐप बनाया जाए क्योंकि उनकी वेबसाइट पर दैनिक आगंतुकों की संख्या बढ़ी है। जिससे लोगों तक पहुंच आसानी से होगी।
डिलीवरी योजना ऐप बनाने के बाद, कंपनी ने एक और योजना पर काम करना शुरू किया। दीपेंद्र चड्ढा की मेहनत और लोगों का प्यार रंग ला रहे थे। यह देखते हुए, उन्होंने खाना देने की भी शुरुआत की। यानी आप खाना संबंधित रेस्तरां में ऐप के माध्यम से ऑर्डर करेंगे और डिलीवरी जोमैटो होगी।