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Zomato की रोचक सफलता की कहानी पढ़ें: 2 लोगों से 23 देश तक पहुंचे, भीड़ देखकर आइडिया आया

Zomato की सफलता की कहानी: आइडिया एक छोटे से शहर से 23 देशों में कैसे छा गया? जानिए जोमौटो की सफलता की कहानी। Zomato की सफलता की कहानी:  जब बाहर खाना खाने के लिए बाहर जाना नहीं चाहता था, तो मैंने फोन उठाया और जोमैटो ऐप पर अपना मनपसंद खाना ऑर्डर किया।तुरंत बाद डिलीवरी बॉय घर पर खाना लाता है। पूरी प्रक्रिया बहुत सरल है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि इस आसान प्रक्रिया को बनाने में कितनी मेहनत लगी है? आज भारत में सबसे बड़ी खाद्य डिलीवरी कंपनी जोमैटो है। भारत के साथ 23 देशों में इसका कारोबार चलता है। दीपेंद्र गोयल कंपनी का मालिक हैं। दीपेंद्र गोयल की मेहनत बड़ी कंपनी की तरह है। यह कंपनी आखिर कैसे शुरू हुई? योजना क्या थी? आज आपको इन सभी के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी। दीपेंद्र गोयल का जन्म पंजाब में हुआ था  और उनका मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगा था। घर पर मम्मी और पापा दोनों शिक्षक थे। किंतु दीपेंद्र गोयल को पढ़ाई से कोई दिलचस्पी नहीं थी। दीपेंद्र गोयल ने पांचवीं कक्षा में फेल होने के बाद घरवालों से प्रेरित होकर अपनी पढ़ाई को सीरियस लेना शुरू किया। दीपेंद्र ने 2005 में आईआईटी दिल्ली से एम.टेक करने के बाद Bain and Company में काम किया। इसी कंपनी में काम करते हुए वे जोमैटो का विचार पाए। एक दिन उन्होंने सोचा कि लोग खाने का मेन्यू कार्ड देखने में सबसे ज्यादा समय बिताते हैं. इससे आइडिया आया। यह जानने के लिए उनके ऑफिस में लंबी कतार लगी हुई थी कि आज क्या खाना है? तो उन्होंने सोचा कि क्यों न इंटरनेट का उपयोग करके सारी सूचनाओं को एकत्रित कर दिया जाए, जिससे लोग घर बैठे पूरी सूचना प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने अपनी कंपनी का मेन्यू डाटा ऑनलाइन बनाया। जो उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया देता था। यही से उन्होंने इस बात को सीरियस लेना शुरू कर दिया कि देश में तकनीक मजबूत हो रही है और समय बदल रहा है। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त प्रसून जैन के साथ मिलकर फूडलैट वेंचर की शुरुआत की, जिसका अर्थ था कि दिल्लीवासी घर बैठकर किसी विशिष्ट रेस्तरां में क्या खाना मिलता है और कितने रुपये में मिलता है। किंतु वेंचर की गति धीमी हो गई जब उनके दोस्त प्रसून ने दीपेंद्र गोयल का साथ छोड़ दिया। दीपेंद्र गोयल की लाइफ में धीरे-धीरे दूसरे हीरो की एंट्री हुई। पंकज चड्ढा था दूसरा साथी। दोनों ने 2008 में FoodiEBAY नामक एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। अब आप इस पोर्टल पर रेस्टोरेंट की डिटेल्स और रेटिंग भी दे सकते हैं। जिसमें उन्होंने दिल्ली में 1200 रेस्तरां के मेन्यू को शामिल किया था। देखते ही देखते ये पोर्टल चर्चा में आने लगे। FoodiEBAY 2010 तक देश के कई शहरों में पहुंच गया था। तब जोमैटो नाम पड़ा, और दीपेंद्र गोयल अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने का विचार कर रहे थे, लेकिन दोनों को समय की कमी थी। दीपेंद्र गोयल ने अपनी पत्नी की नौकरी मिलने के बाद FoodiEBAY पर पूरी तरह से ध्यान देने लगा। फिर उन्होंने 2010 में कंपनी का नाम बदलकर जोमैटो कर दिया। जोमैटो नाम के पीछे कोई बड़ी कहानी नहीं है; बस टोमेटो और जोमैटो को एक जैसा लगता था, इसलिए इसका नाम आया। मदद की बात करते हुए, naukri.com के संजीव ने 2010 में एक मिलियन डॉलर का निवेश किया था। ध्यान दें कि संजीव के पास सिर्फ ३७% शेयर हैं। 2013 में कंपनी को कई नए निवेशक मिले, जिससे उसका फंड 223.8 मिलियन डॉलर (करीब 18 करोड़ 57 लाख रुपए) हो गया। कुछ सालों बाद जिओ की एंट्री, जियो ने दी रफ्तार। हम सब जानते हैं कि जिओ के आने से टेलीकॉम क्षेत्र में एक क्रांति हुई। 3G, यानी हाई स्पीड डाटा, हर किसी को फ्री में उपलब्ध था। ऑनलाइन पोर्टल पर लोग तेजी से शिफ्ट हो रहे थे। जोमैटो इससे लाभ मिला। दीपेन्द्र गोयल ने विचार किया कि एक ऐप बनाया जाए क्योंकि उनकी वेबसाइट पर दैनिक आगंतुकों की संख्या बढ़ी है। जिससे लोगों तक पहुंच आसानी से होगी। डिलीवरी योजना ऐप बनाने के बाद, कंपनी ने एक और योजना पर काम करना शुरू किया। दीपेंद्र चड्ढा की मेहनत और लोगों का प्यार रंग ला रहे थे। यह देखते हुए, उन्होंने खाना देने की भी शुरुआत की। यानी आप खाना संबंधित रेस्तरां में ऐप के माध्यम से ऑर्डर करेंगे और डिलीवरी जोमैटो होगी।  

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