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Vi संकट से बाहर नहीं, बैंकों का कहना – सरकार की बढ़ी हिस्सेदारी भी ऋण देने के लिए पर्याप्त नहीं!

बैंकों ने कहा – सरकार की इक्विटी बढ़ाने के बावजूद वोडाफोन आइडिया को लोन देना संभव नहीं

भारत सरकार ने हाल ही में कर्ज में डूबी वोडाफोन आइडिया (Vi) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा दी है, लेकिन बैंकों का मानना है कि यह कदम कंपनी की वित्तीय स्थिति को स्थिर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार द्वारा की गई इक्विटी रूपांतरण प्रक्रिया सिर्फ सितंबर तक की बकाया राशि को कवर करती है, जो कुल बकाया राशि का केवल 15% हिस्सा है।

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सरकार की हिस्सेदारी बढ़ाने का असर

सरकार द्वारा वोडाफोन आइडिया में इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ाकर 36.7% करने के बावजूद, बैंक अभी भी कंपनी को नए लोन देने से हिचकिचा रहे हैं

मुख्य बिंदु:

  • सरकार की इक्विटी बढ़ाने की प्रक्रिया से कंपनी को सीधे नकद लाभ नहीं मिलेगा
  • कंपनी के कुल बकाया कर्ज़ का केवल 15% हिस्सा ही इससे कवर होगा
  • Vi को कर्ज देने के लिए बैंक स्पष्ट वित्तीय स्थिरता देखना चाहते हैं।
  • कंपनी को नई 5G सेवाओं में निवेश करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी।

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क्या Vi के लिए संकट अभी भी बना हुआ है?

बकाया कर्ज़ और बैंकों की चिंता

बैंकों का कहना है कि सरकार की यह पहल केवल सीमित राहत देगी, लेकिन Vi को अपने पूरे कर्ज संकट से निकालने के लिए अधिक वित्तीय मदद की जरूरत होगी

विवरण राशि (₹ करोड़ में)
कुल बकाया कर्ज 2,30,000
सरकार द्वारा इक्विटी रूपांतरण 15,000
बकाया AGR और स्पेक्ट्रम शुल्क 1,68,000
अन्य देनदारियां 47,000

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बैंकों का रुख और संभावित समाधान

बैंकों का कहना है कि Vi को कर्ज देने से पहले वे देखना चाहते हैं कि:

  • कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन सुधरता है या नहीं।
  • नई पूंजी कितनी जुटाई जाती है।
  • भविष्य में राजस्व वृद्धि की क्या संभावनाएं हैं।

Vi के सामने चुनौतियाँ:

भारी कर्ज़ का बोझ: कंपनी के पास अभी भी ₹2.3 लाख करोड़ का भारी कर्ज़ है। ✔ निजी निवेश की कमी: अन्य टेलीकॉम कंपनियों जैसे रिलायंस जियो और एयरटेल ने बड़े निवेश आकर्षित किए हैं, लेकिन Vi इस मामले में पिछड़ रहा है। ✔ 5G नेटवर्क का रोलआउट: Vi को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए 5G नेटवर्क पर निवेश करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए पूंजी की जरूरत होगी। ✔ ग्राहक आधार में गिरावट: Jio और Airtel की तुलना में Vi का ग्राहक आधार लगातार घट रहा है।

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क्या Vi अपने संकट से बाहर आ सकता है?

विश्लेषकों का मानना है कि वोडाफोन आइडिया को अपनी बैलेंस शीट मजबूत करनी होगी और नई पूंजी जुटाने पर जोर देना होगा

संभावित समाधान:

  • कंपनी को निजी निवेशकों से नई पूंजी जुटानी होगी
  • 5G सेवाओं में निवेश बढ़ाना होगा ताकि वह जियो और एयरटेल को टक्कर दे सके।
  • सरकार को अतिरिक्त वित्तीय राहत देने के उपायों पर विचार करना होगा
  • ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए बेहतर नेटवर्क और योजनाएं पेश करनी होंगी।

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निष्कर्ष:

वोडाफोन आइडिया के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है। सरकार द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाने के बावजूद, यह केवल सीमित राहत प्रदान करता है और कंपनी के दीर्घकालिक संकट को हल नहीं कर सकता। जब तक Vi नई पूंजी नहीं जुटाता और अपने बिजनेस मॉडल को मजबूत नहीं करता, तब तक इसे बैंकों से वित्तीय सहायता मिलना मुश्किल रहेगा। आने वाले महीनों में, Vi की रणनीति और सरकार के अगले कदम तय करेंगे कि क्या यह टेलीकॉम कंपनी अपने संकट से बाहर निकल पाएगी या नहीं।

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